💌दिल का Notification #12 –
शीर्षक : पापा की चप्पल
एक दिन
गलती से पापा की चप्पल पहन ली।
दो कदम चला ही था कि...
समझ आ गया,
वो चप्पल मेरे नाप की नहीं थी।
उसमें सिर्फ़ पैर नहीं समाते थे...
ज़िम्मेदारियाँ भी समाई हुई थीं।
हर घिसा हुआ कोना...
घर के लिए किया गया एक समझौता था।
तब एहसास हुआ...
बचपन में लगता था,
पापा की चप्पल बस पुरानी हो गई है।
आज समझ आया...
घिसी सिर्फ़ चप्पल नहीं थी,
पापा की उम्र थी।
❤️ धड़कते रहिए...
जिगर अशोक पंड्या