तेरे जाने के बाद भी हम होश में आए नहीं,
जाम तो लब से लगा, पर दर्द मिट पाए नहीं।
इश्क़ का नशा था ऐसा जो उतरता ही नहीं,
मय-कदे के साक़ी भी कोई हल सुझा पाए नहीं।
हर कतरे में शराब के तस्वीर थी तेरी बसी,
हम भुलाने की ज़िद में भी तुझे भुला पाए नहीं।
दर्द-ए-दिल छुपाने को हमने महफ़िलें आबाद कीं,
आँसू आँखों में रहे, पर लब मुस्कुरा पाए नहीं।
ज़िंदगी गुज़र रही है ख़्वाब और ख़ुमार में,
मोहब्बत वो दास्तान बनी जो हम सुना पाए नहीं।(Rajesh Kaliya)