मैं और मेरे अह्सास
जीने के मायने
अजनबी हमराही जीने के मायने सिखा गया l
मंजिल तक पहुंचने के सहीं रास्ते दिखा गया ll
जिंदगी किस तरफ जीते हैं वो बताकर के l
चार लम्हें हसी खुशी के साथ बिता गया ll
मुस्कराकर आगे बढ़ने का नाम ही जीवन l
ताउम्र पाया हुआ तजुर्बा वो लिखा गया ll
सखी
डॉ दर्शिता बाबूभाई शाह