REBIRTH OF MEHBUBA

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यह कहानी है धोखे प्‍यार और बदले की जिसमें मोहब्‍बत एक दफा नहीं होती। क्योंकि जो एक दफ़ा हो जाए, उसे मोहब्बत नहीं कहते। और अगर किसी कहानी का अंत हो चुका हो, तो इसका यह अर्थ नहीं कि वह अधूरी है— कभी-कभी वह कहानी अपने अंजाम का इंतज़ार कर रही होती है। मोहब्बत जिस्म से नहीं, रूह से की जाती है और रूहें… कभी-कभी मरने के बाद भी ज़िंदा रहती हैं और रूहें अगर टूटी हुई हो तो कब्रें भी उन्हें क़ैद नहीं कर पातीं। कहते हैं, भगवान चाहे तो क्या नहीं कर सकता— वह ज़िंदा को मौत दे सकता है और मरे हुए को फिर से साँसें भी। लेकिन सोचिए…

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REBIRTH OF MEHBUBA - 1

REBIRTH OF MEHBUBA यह कहानी है धोखे प्‍यार और बदले की जिसमें मोहब्‍बत एक दफा नहीं होती। क्योंकि एक दफ़ा हो जाए, उसे मोहब्बत नहीं कहते। और अगर किसी कहानी का अंत हो चुका हो, तो इसका यह अर्थ नहीं कि वह अधूरी है— कभी-कभी वह कहानी अपने अंजाम का इंतज़ार कर रही होती है। मोहब्बत जिस्म से नहीं, रूह से की जाती है और रूहें… कभी-कभी मरने के बाद भी ज़िंदा रहती हैं और रूहें अगर टूटी हुई हो तो कब्रें भी उन्हें क़ैद नहीं कर पातीं। कहते हैं, भगवान चाहे तो क्या नहीं कर सकता— ...Read More

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REBIRTH OF MEHBUBA - 2

रूप और निया घर के क़रीब ही पहुँची थी बारिश अब भी बिना थमे बरस रही थी। तभी सामने एक लड़का दौड़ता हुआ आता दिखाई देता है। उसकके एक हाथ में बैग था, और बदन पर सफ़ेद शर्ट— जो बारिश में भीगकर उसके जिस्म से चिपक चुकी थी, लगभग पारदर्शी… अचानक— वो लड़का सीधे रूप से टकरा जाता है। बारिश की वजह से सड़क पहले ही फिसलन भरी थी इसलिए दोनों ज़मीन पर गिर पड़ते हैं। रूप (झुँझलाकर): “ये दिखायी नहीं देता क्या? रोड है ये… मैराथन नहीं!” लड़का जल्दी से उठता है, अपना बैग संभालते हुए अपना एक ...Read More