गौतम और लक्षिता बचपन से ही एक ही मोहल्ले में पले-बढ़े थे। दोनों एक ही स्कूल गए, एक ही रास्ते से कॉलेज तक पहुँचे, मगर उनके रिश्ते की डोर हमेशा दोस्ती तक ही सीमित रही।
लक्षिता एक बड़े जॉइंट फैमिली से थी। वह हमेशा सबका ख्याल रखने वाली, दादी की दवा से लेकर छोटे बच्चों के होमवर्क तक संभाल लेती। भगवान में गहरी श्रद्धा रखने वाली लक्षिता का दिल उतना ही सुंदर था जितनी वो दिखने में खूबसूरत थी।
गौतम अक्सर मज़ाक में कह देता,“लक्षिता, अगर दुनिया में सच में अच्छे लोगों का अवार्ड मिलता, तो तू ही जीतती।”
लक्षिता बस हल्की मुस्कान दे देती, क्योंकि उसके दिल में एक और राज़ छुपा था – उसका पहला और आख़िरी प्यार था गौतम।
गौतम मेहनती था। उसका सपना था बड़ा डॉक्टर बनना। लक्षिता जानती थी कि अगर उसने अपने दिल की बात गौतम को बता दी तो कहीं उसका ध्यान पढ़ाई से न हट जाए। इसलिए उसने अपने प्यार को दिल में दबा लिया और बस भगवान से यही दुआ करती,“हे भगवान, मेरे गौतम की हर मेहनत रंग लाए। उसकी जिंदगी में सिर्फ खुशियाँ हों, चाहे मेरे हिस्से की ही क्यों न चली जाएं।”
परीक्षाएँ पास हुईं। गौतम ने शानदार सफलता पाई। घर में जश्न था। सब खुशियाँ मना रहे थे। गौतम ने सबसे पहले लक्षिता को फोन किया,“लक्षिता! मैंने कर दिखाया… मैं सेलेक्ट हो गया!”
लक्षिता की आँखों में आँसू आ गए, लेकिन आवाज़ में मुस्कान थी,“मुझे पता था गौतम, तू जरूर जीत जाएगा। तू हमेशा बेस्ट है।”
उसने चाहा कि वो कह दे – “गौतम, तू ही मेरी दुनिया है” – मगर अगले ही पल उसने अपने दिल को रोक लिया।
वक़्त बीतता गया। गौतम अपनी पढ़ाई और करियर में आगे बढ़ता गया। हर बार उसकी जीत पर लक्षिता के होंठ मुस्कुराते और दिल चुपचाप रो लेता।
गौतम को कभी महसूस होता कि लक्षिता की नज़रों में कुछ और है, मगर उसने कभी पूछा नहीं। और लक्षिता? उसने तय कर लिया था कि वो अपना प्यार सिर्फ भगवान और अपने दिल के बीच ही रखेगी।
एक दिन गौतम ने मज़ाक में कहा,“लक्षिता, तू हमेशा मेरे लिए इतनी दुआएँ क्यों करती है? कहीं मुझे खोने से डर तो नहीं लगता तुझे?”
लक्षिता ने हंसकर कहा,“तू मेरा दोस्त है गौतम, दोस्ती खोने से कौन नहीं डरता।”
गौतम हंस पड़ा, मगर लक्षिता के दिल में वही बात प्यार बनकर और गहरी बैठ गई।
लक्षिता का प्यार अधूरा रहा, लेकिन उसकी ख़ुशी पूरी थी क्योंकि गौतम की सफलता ही उसका सबसे बड़ा सपना था।
और शायद यही खामोश प्यार सबसे खूबसूरत होता है – जहाँ अपनी चाहत से ज्यादा, उस इंसान की मुस्कान मायने रखती है।
💖 अंतयह कहानी सिर्फ एक अधूरी मोहब्बत नहीं थी, बल्कि उस मोहब्बत की मिसाल थी जिसमें चाहत से ज्यादा दुआएँ और अपनापन होता है।
🌸 चुपके चुपके… एक खामोश प्यार (Part – 2)
गौतम अब अपने करियर में और आगे बढ़ चुका था। डॉक्टर बनने का सपना लगभग पूरा हो गया था। वह अब पहले से ज़्यादा व्यस्त रहता, मगर चाहे दिन कितना भी थका देने वाला क्यों न हो, एक फोन कॉल लक्षिता को जरूर करता।
“लक्षिता, तूने खाना खा लिया न?”“हाँ, और तू?”“तेरे बिना कैसे खा सकता हूँ मैं…” – गौतम हँसकर कह देता, और दोनों ठहाका लगा देते।
लक्षिता के लिए यह छोटे-छोटे पल ही उसकी पूरी दुनिया थे। वो जानती थी कि गौतम की ज़िंदगी में उसका नाम सिर्फ दोस्त की लिस्ट में है, मगर उसके लिए गौतम हर रिश्ता था – दोस्ती भी, मोहब्बत भी, और दुआ भी।
🌷 परिवार का सच
एक दिन गौतम की माँ, जो लक्षिता को अपनी बेटी की तरह मानती थीं, उससे बोलीं –“लक्षिता, तू जानती है न गौतम की ज़िंदगी कितनी मुश्किल रही है। तू ही है जो हर वक़्त उसका सहारा बनी। अगर तेरा साथ न होता, तो पता नहीं वो इतना आगे बढ़ पाता या नहीं।”
लक्षिता ने सिर झुका लिया, उसकी आँखें नम थीं। वो कहना चाहती थी –“आंटी, मेरे लिए गौतम ही मेरी पूरी दुनिया है।”मगर बोली सिर्फ –“गौतम तो वैसे भी सबका गर्व है आंटी, मैं तो बस उसका दोस्त हूँ।”
🌷 गौतम की उलझन
गौतम को धीरे-धीरे कुछ बातें समझ आने लगी थीं।जब भी वो बीमार होता, लक्षिता सबसे पहले उसके लिए मंदिर जाती।जब भी उसकी कोई सफलता होती, लक्षिता सबसे ज्यादा खुश होती।जब भी वो उदास होता, लक्षिता की आँखें पहले नम होतीं।
गौतम कई बार सोचता –“क्या लक्षिता सिर्फ दोस्त है? या फिर… उसके दिल में कुछ और है?”
मगर फिर खुद को समझा लेता –“नहीं, अगर कुछ होता तो वो अब तक बता चुकी होती।”
🌷 लक्षिता का त्याग
गौतम की पढ़ाई अब विदेश में आगे बढ़ने वाली थी। घर में चर्चा हुई कि उसे बाहर भेजा जाए। सब खुश थे, मगर लक्षिता के दिल में तूफ़ान था।“गौतम इतना दूर चला जाएगा… शायद फिर कभी उतना करीब न रहे।”
रात को मंदिर के सामने बैठकर उसने भगवान से कहा –“हे भगवान, अगर मेरे हिस्से की खुशियाँ भी गौतम को देनी हों, तो दे देना। बस उसका रास्ता हमेशा आसान बना देना।”
उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे, मगर दिल में एक सुकून था।
🌷 गौतम का सवाल
गौतम के जाने से पहले दोनों एक मंदिर गए। वहां शांति थी।गौतम ने अचानक लक्षिता की आँखों में देखा और पूछा –“लक्षिता… अगर मैं तुझसे कुछ पूछूँ तो तू सच-सच बताएगी?”
लक्षिता थोड़ी घबरा गई, फिर धीरे से बोली –“हाँ, पूछ।”
गौतम ने मुस्कुराते हुए कहा –“तेरी दुआओं में हमेशा मेरा ही नाम क्यों होता है?”
लक्षिता का दिल जोर से धड़क उठा। उसकी आँखें भर आईं। उसने सिर झुका लिया और बोली –“क्योंकि… तेरी खुशी ही मेरी सबसे बड़ी चाहत है।”
गौतम चुप रहा। उसके चेहरे पर हैरानी भी थी और कहीं न कहीं गहराई से एक नया अहसास भी।
🌸 जारी रहेगा…
👉 अगले पार्ट में दिखाएँगे कि क्या गौतम लक्षिता के छुपे प्यार को महसूस करेगा और क्या वो उससे अपने दिल की बात कह पाएगा या नहीं।
Kajal Thakur 😊