: : प्रकरण : : 23
फ्लाइट ने टेक ओफ कर लिया था. और सब लोग घर लौट रहे थे. रात को तीन बज चुके थे. और मुस्कान अब भी रो रही थी.
काफ़ी रात बीत चुकी थी तो परमेश्वर के साले ने हमे ' कीसी' के घर में रोक लिया था.
सोने का तो कोई सवाल नहीं था. सब लोग बातें कर रहे थे.
छह बजे की करीब टेलिफोन की रिंग बज उठी थी. परमेश्वर सुख रूप दुबई पहुंच गया होगा और उस ने फोन किया होगा, यह सोचकर उस के साले ने फोन उठाया तो सामने से रोने की आवाज आई.
वह आवाज अपने जीजू की थी यह जानकार साला भी चिंतित हो गया : उस ने सवाल किया:
" क्या हुआ जीजू? "
" मैं लुंट गया बरबाद हो गया. "
" जीजू! प्लीझ रोना बंद करो और साफ बात करो क्या हुआ हैं? "
वह तब भी रो रहा था. उस के साले ने फोन का रिसिवर मेरे हाथों में थमा दिया.
मैंने उसे सवाल किया :
" क्या हुआ? "
" संभव भैया, मुझे बताई गई कोई कंपनी यहाँ मौजूद नहीं हैं. और वादे के मुताबिक कोई मुझे लेने नहीं आया. मैं कोई बडे फ़्रॉड़ का शिकार बन गया हूं. मेरे जैसे दो चार लडके भी फ़स गये है. हम सब को एयर पोर्ट में ही रोक दिया गया है. "
मुझे उस की बात सुनकर बहुत गुस्सा हुआ. वह हर चीज में जल्द बाजी करता था, कुछ सोचता नहीं था. विदेश जाने का सपना पूरा होने की खुशी में वह अति उत्साहित हो गया था. मैं एक मित्र के नाते उसे बहुत कुछ कहना चाहता था, लेकिन मैंने अपने आप को रोक लिया था.
उस वक़्त मुझे अब्दुल भाई की याद आई थी, जो ' शेठ ब्रदर्स ' के लिये कमिशन एजेंट्स का काम करते थे जिसे मैं अच्छी तरह जानता पहचानता था.
मैंने उसे वही रुकने को कहां था और तुरंत अब्दुल भाई को फोन लगाया था. उस वक़्त 5-45 हुआ था. उस समय कीसी को फोन करना ठीक नहीं था. लेकिन परिस्थिति का तकाजा था.
मैंने उन्हें फोन किया था. मेरा नाम सुनकर उन्हें अचरज हुआ था. इतनी सुबह फोन करने के लिये सहज सवाल किया था
मैंने उन्हें सारा किस्सा सुना दिया था.
उन्होंने परमेश्वर के बारे में जानकारी मांगी थी. शुरू कुछ समय मांगा था.
ठीक दो घंटो के बाद परमेश्वर का फोन आया था.
" अब्दुल भाई ने मुझे कस्टम चेकिंग से छुड़ा लिया है इतना ही नहीं उन की ओइल रिफाइनरी में मुझे जोब दे दिया है., "
सुनकर मुझे बहुत खुशी हुई थी. मैंने तहेदिल से उन का शुक्रिया अदा किया था.
परमेश्वर ने मुझे बिनती की थी.
" मेरे साथ जो कुछ हुआ उस के बारे में तुम्हारी बहन को कुछ नहीं बताना. वह खामखा परेशान हो जायेगी. उस के मना करने के बाद भी तुम दुबई चले गये और ऐसा हुआ यह बात को कौन सह पायेगा? "
और सब कुछ सेटल हो गया था.
' कीसी' ने भी उस के बिना जीने की आदत डाल दी थी. फिर भी वह एक या दूसरे बहाने चिंतित रहती थी शायद उसी वजह से वह पेट के अल्सर की शिकार हो गई थी. कुछ बाकी ऱह गया तो परमेश्वर के अजीज दोस्त ने पैसों के बारे में उस के साथ विश्वासघात किया था.
उस का उपचार जारी था.. उस के भाई लोग उस का बराबर ख्याल रखता था. मैं भी उस का ख्याल रखता था लेकिन अपने पति की गैर मौजूदगी में वह अकेलापन महसूस करती थी.
परमेश्वर साल में दो बार छुट्टी लेकर मुंबई आता था.. आठ दस दिन साथ रहता था..
अल्सर के बारे में यह कहां जाता था. यह दुनिया की दसवी जानलेवा बीमारी थी.. इस जानकारी से ' कीसी' को डर लगता था.
मुस्कान अभी छोटी थी. उस की देखभाल निहायत जरूरी थी.
मेरा इस दौरान पाईल्स का ओपरेशन हुआ था.. आरती ने उसे बताया था.. उस पर ' कीसी' ने प्रत्याधात व्यक्त किया था उस से हमे बुरा लगा था.
" मैं कैसे आ सकती हूं?"
वह ज़ब चाहे तब विपुल के घर जाती थी लेकिन मेरे घर आने के लिये ऐसा सवाल किया था..
लेकिन उस ने मेरे साथ स्टंट किया था.
परमेश्वर छुट्टी लेकर मुंबई आया था.. वह उसे साथ लाकर मुझे सरप्राइज देना चाहती थी.
और एक दिन दोपहर को दोनों मेरे घर आये थे.. और मुझे वाकई में सरप्राइज दिया था.
उन्ही दिनों मेरी दूसरी बेटी कृष्णा का 11 साल के बाद जन्म हुआ था. उस वजह से आरती थोड़ा कमजोर महसूस कर रही थी. हमें पानी का प्रोब्लेम था.. और दो मजले की सीढ़िया चढ़कर नीचे से पानी लाना पड़ता था. तब परमेश्वर ने हमें पानी भरने में मदद की थी.
घर में बच्चे भी उन को मानते थे, सन्मानते थे. वह जब भी आते थे उन के लिये कुछ ना कुछ ले आते थे.
दिवाली के दिन हम लोग उन के घर गये थे..मेरी तबियत कुछ ठीक नहीं थी.
यह जानकर दोनों मुझ पर गुस्सा हो गये थे .और परमेश्वर ने मेरी जेब में सो रूपये रखकर सूचना दी थी.
" सीधा टेक्सी कर के घर पहुंच जाओ. "
दूसरे दिन डोक्टर को बताया था. और उन्होंने भी मुझे पीलिया हो जाने का डायग्नोसिस किया था.
और एक महिने तक मैं घर से बाहर निकल नहीं पाया था.
परमेश्वर तो कुछ दिनों में दुबई लौट गया था. लेकिन ' कीसी' नियमित तौर से फोन पर मेरा हाल चाल पूछती थी.
वह दो साल का करार है यह कहकर दुबई गया था. बाद में क्या हुआ था..' कीसी' को उस के बारे में कुछ पता नहीं था. उस का नसीब था. और मैं दुबई में अब्दुल भाई को पहचानता था. उस की वजह से परमेश्वर को उन की रिफाइनरी में जोब मिल गया. वह उस के काम से खुश थे. रहने को फ्लैट भी दिया और उसे कायमी नौकरी दे दी थी. और साल में दो बार अपने परिवार को मिलने की अनुमति भी दे दी थी.
उन दिनों ' कीसी' की तबियत ज्यादा बिगड गई थी. उस समय वह चाहती थी. उस का पति उस के साथ हो. लेकिन उस ने केवल फोन और ख़त से काम चलाया था. इस बात का ' कीसी' को रंज होता था.
परमेश्वर मुंबई आना चाहता था.
लेकिन?