: : प्रकरण - 36 : :
फिल्मों में अधिकाधिक अभिनेत्रीयो ने अपनी कला के जोहर दिखाये थे जिस में कानन कौशल, कामिनी कौशल, नूरजहाँ, सुरैया, निम्मी, नरगिस, नूतन, मधु बाला, मीना कुमारी, वैजयंती माला, माला सिन्हा, पद्मिनी, संध्या, श्यामा, शशि कला, शकीला, निरूपा रोय और नये दौर में माधुरी दीक्षित, मीनाक्षी शेषाद्री, महिमा चौधरी, श्रीदेवी, मौसमी चैटर्जी, दिप्ति नवल इत्यादि.. इत्यादि लोग शामिल थे.
अभिनेता की फेहरिष्ट में धुरंधर दिलीप कुमार, देव आनंद, राज कपूर और उस के दो भाई शम्मी कपूर, शशि कपूर, और लडके. रणधीर कपूर, ऋषि कपूर, संजय कपूर और रणधीर कपूर की दो लड़कियां करिश्मा और करीना और ऋषि कपूर का लडका रणबीर कपूर इत्यादि का समावेश होता हैं.
प्ले बेक सिंगर की क्यू में मुकेश, मोहम्मद रफ़ी, महेंद्र कपूर, मन्ना डे, हेमंत कुमार, विजय मुख़र्जी, सुबीर सेन, तलत मेहमूद, पंकज मलिक, सी एच आत्मा और के एल सईगल शामिल थे.
फीमेल सिंगर्स मैं लता मंगेशकर उन की दो बहन उषा और मीना. उन तीनो ने साथ फ़िल्म मदर इंडिया का गाना गाया था.
' दुनिया में हम आये हो जीना हीं पड़ेगा,
जीवन हैं अगर जहर to पीना हीं पड़ेगा
उस के अलावा आशा भोंसले, सुमन कल्याण पुर, गीता दत्त, सुरैया, सुधा मल्होत्रा इत्यादि सिंगर्स थे.
संगीत में नौशाद, शंकर जय किशन, कल्याणजी आनंदजी, लक्ष्मी कांत प्यारे लाल, रवि, ओ पी नैय्यर, चित्र गुप्त, दत्ता राम इत्यादि लोगो की बोलबाला थी.
गीतकार की यादी में साहिर, मज़रूह, शैलेन्द्र, हसरत जयपुरी, कैफ़ी आज़मी इत्यादि लोगो का नाम मशहूर था.
सिनेमा की तरह मुझे क्रिकेट भी काफ़ी दिलचस्पी थी.
ना जाने क्या बात थी? लेकिन एक महाराष्ट्रीय खिलाडी से गजब का लगाव हो गया था.
सब से पहली बार मैंने अख़बार में पढ़ा था. उन्होंने तीन दिवसीय मैच में शतक बनाया था. उन के साथ दूसरे खिलाडी ने भी शतक बनाया था. तब से वह दोनों मानो अपने हो गये थे. विजय मेहरा तो ज्यादा खेले नहीं थे. लेकिन सरदेसाई काफ़ी मैच खेले थे.
उन्होंने ने कानपुर टेस्ट में डेब्यू किया था. सातवे नंबर पर बेटिंग करने आये थे.. उन्होंने 28 रन का योगदान दिया था. उस के बाद इंग्लैंड के खिलाफ वह पांच टेस्ट मैच खेले थे उस में कुल 449 रन बनाये थे जिस में पांच अर्ध सदी का समावेश था.
उन के हर इनिंग्स के आंकड़े काफ़ी प्रतिभाशाली थे. 65,2,12,66, 54,36, 44, 4, 79,87 रहे थे.
उस के बाद उन्होंने ने न्यूझी लेंड के सामने चार मैच खेले थे उस में एक डबल शतक मारकर टीम को पराजय से बचाया था इतना हीं नहीं अगली मैच में तेज शतक लगाकर भारतीय टीम को विजय की हारमाला पहनाई थी.
उस के बाद 1971 में वेस्ट इंडीज जैसी टीम के सामने 10 इनिंग्स के साथ 636 रन बनाये थे. जिस में एक डबल शतक, और दो शतक बनाये थे. उन की वजह से भारतीय टीम ने वेस्ट इंडीज जैसी धुरंधर टीम को अपनी ही धरती पर पराजित किया था.
सरदेसाई की हर कोई लेवल की मैच देखने मैं दौड़ा जाता था. मुझे चौपाटी नजदीक ईरानी होटल में उन्हें देखने का मौका मिला था. वह कफ परेड इलाके में रहते थे.
एक ऑस्ट्रेलियन प्रवास के दौरान वह चौटिल हुए थे उस वजह से उन्हें बीच में हीं लौट आना पड़ा था. मैंने ईरानी होटल में उन्हें देखा था. हाथ पर प्लास्टर लगा था, फिर भी मैं चाहते हुए भी कुछ पूछ नहीं सका था. यह किस तरह का खिंचाव था, आकर्षण था. कुछ समझ नहीं आता था.
ऐसा हीं लगाव मुझे फ़िल्म इंडस्ट्रीज के निर्माता- दिग्दर्शक चोपडा बंधु से हो गया था.
बी आर चोपडा की धूल का फूल मुझे बेहद पसंद आई थी. इस फ़िल्म ने उन के छोटे भाई यश चोपड़ा ने बतौर दिग्दर्शक डेब्यू किया था.
ना जाने क्यों मैं मानो उन के प्यार में हीं पड़ गया था.
यश चोपड़ा ने अपने बडे भाई की अन्य फिल्मों का भी दिग्दर्शन संभाला था : धर्मपुत्र, वक़्त, इत्तेफ़ाक़ और आदमी और इंसान फिल्मो को उन्होंने दिगदर्शित किया था.
उस के बाद उन्होंने अपने बडे भाई से अलग होकर ' यश राज फिल्म्स' के बैनर तले फिल्मे बनाना शुरू किया था.
' दाग ' उन की पहली फिल्म थी, जिस में प्रणय त्रिकोण की कहानी थी. राजेश खन्ना और शर्मीला टैगोर के साथ राखी ने इस फ़िल्म में काम किया था.
यश चोपड़ा ने प्रेम की नई परिभाषा दर्शाई थी. दाग फ़िल्म में राजेश खन्ना दोनों के साथ रहता हैं ऐसा दर्शाया था.
उस के बाद उन की फिल्म ' कभी कभी' रिलीज हुई थी, जिस के गीतों ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया था. इस खुशी ने HMV ने ताज महल होटल में एक पार्टी आयोजित की थी. उस के पहले मैं एक दो बार यश चोपडा को उन की ओफिस और घर में मिला था.
इस पार्टी में काफी नामवर लोग शामिल थे, जिस में डिस्ट्रीब्यूटर गुलशन राय भी मौजूद थे. यश चोपड़ा ने मेरा उन से परिचय करवाया था.
" यह एक लेखक हैं. "
गुलशन राय ने त्रिमूर्ति फिल्म्स के बैनर तले ' जोनी मेरा नाम ' फिल्म बनाई थी जो देव आनंद के भाई विजय आनंद ने दिगदर्शित की थी.. फिर भी गुलशन राय ने उन की दूसरी फिल्म ' जोशीला का दिग्दर्शन यश चोपड़ा को सौंपा था. जो ज्यादा चली नहीं थी. वह फ्लोप साबित हुई थी. फिर भी ' दीवार' फ़िल्म का दिग्दर्शन उन्होंने यश चोपड़ा को हीं हुआ था जो ' जॉनी मेरा नाम ' से ज्यादा सुपर हिट हुई थी.
फिर एक और फ़िल्म दोनों ने साथ मिलकर बनाई थी. बाद में यश चोपड़ा ने अधिकतर अपनी फिल्मों के दिग्दर्शन का कार्य भर संभाला था. बाद में उन्होंने नये दिग्दर्शकों को मौका दिया था.
उन के दो पुत्र थे उदय और आदित्य.
उदय एक्टिंग करना चाहता था. लेकिन वह नहीं चल पाया था. लेकिन आदित्य में टैलेंट था. उस ने अपने पिता से बढ़कर अनेक फिल्मे बनाई थी. वह क्विक फिल्मे बनाने में माहिर था.
. उस की फ़िल्म ' दिल वाले दुल्हनिया ले जायेंगे' ने तमाम रिकार्ड्स तोड़ दिये थे. उस के बाद ' मोहब्बते दिल तो पागल हैं इत्यादि फिल्मों का निर्माण किया था.
यश चोपड़ा की पत्नी भी अच्छी गायिका थी उस ने अपने पति की फ़िल्म ' काला पत्थर ' ने अपनी आवाज़ दी थी.
पुत्र फिल्मे बनाता था. फिर भी पिता ने फ़िल्म बनाना जारी रखा था. उन्होंने आखिरी फ़िल्म ' ज़ब तक हैं जान' फ़िल्म बनाई थी, जिसका दिग्दर्शन खुद उन्होंने ने संभाला था.
000000000000 ( क्रमशः)