Inteqam - 26 in Hindi Love Stories by Mamta Meena books and stories PDF | इंतेक़ाम - भाग 26

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इंतेक़ाम - भाग 26

आज निशा के बच्चों के स्कूल में पेरेंट्स मीटिंग थी निशा अपने बच्चों के साथ स्कूल गई पेरेंट्स मीटिंग लगभग 11:00 बजे खत्म हो गई,,,,

तभी जैसे ही वह स्कूल से बाहर निकली सुनील दत्त का फोन आया, सुनील दत्त ने निशा से पूछा कि कहां हो,,,,

निशा ने कहा बस सर अभी बच्चों के स्कूल से निकली हूं आज पेरेंट्स मीटिंग थी,,,,

तब सुनील दत्त ने कहा कि ठीक है ऐसा करना तुम स्कूल से घर जाकर ऑफिस ना जाकर सीधे ही वह कल मैंने बताया था उस आश्रम के उद्घाटन में चले जाना क्योंकि आश्रम कमेटी अध्यक्ष का बार-बार फोन आ रहा है,,,,,

यह सुनकर निशा ने जी सर कहकर फोन काट दिया और वह सीधी घर आई और घर से फिर तैयार होकर उद्घाटन समारोह की तरफ निकल गई,,,,

उद्घाटन 12:00 बजे से था उद्घाटन में शहर के जाने-माने कई बिजनेसमैन आए थे जिन्होंने उस आश्रम को बनाने में अपना सहयोग दिया था,,,,

तभी उस उद्घाटन की कमेटी के अध्यक्ष ने आश्रम के उद्घाटन के बारे में सभी को बताया कि इस आश्रम को बनने में सबसे ज्यादा लगभग 50% हिस्सा निशा और सुनील दत्त की कंपनी का नाम लेकर कहां की उस कंपनी ने दिया है, इसलिए हम सब की है गुजारिश है कि आश्रम का उद्घाटन भी आज उसी कंपनी द्वारा भेजे गए किसी मेंबर के हाथ हो, लेकिन वहां उस समय कोई उपस्थित नहीं था क्योंकि निशा तो अभी रास्ते में ही थी,,,,,

कुछ देर इंतजार करने के बाद कमेटी के अध्यक्ष ने आश्रम का उद्घाटन करने के लिए निशा की कंपनी के बाद जिस कंपनी ने ज्यादा योगदान दिया था वह विजय के ससुर की कंपनी थी और उस तरफ से विजय और रोमी दोनों आए हुए थे तो कमेटी अध्यक्ष ने उन दोनों से आश्रम का उद्घाटन करने की गुजारिश की,,,,,,

वे दोनों रीबीन फिता काटने के लिए आगे बढ़ते, तभी निशा वहां आ पहुंची निशा को आए देखकर सभी कमेटी के लोग खुश हो गए और उन्होंने कहा कि आपका ही इंतजार था,,,

यह कहकर उन लोगों ने पहले निशा से सब लोगों ने अभिवादन किया, निशा ने अपनी देरी के लिए सब से क्षमा मांगी,,,,,

तब कमेटी अध्यक्ष ने एक लड़की की तरफ इशारा किया वह लड़की एक थाल में कैची लेकर निशा के सामने आई,,,,

तब कमेटी अध्यक्ष ने निशा से कहा कि हम सबकी इच्छा है कि आप अपने शुभ हाथों से इस आश्रम का उद्घाटन करें,,,,

यह सुनकर जैसे ही विजय और रोमी की नजर निशा पर पड़ी तो वे लोग हैरान हो गए, दोनों को ही अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था कि वे जिसे अपने सामने खड़ा देख रहे हैं वह निशा है या कोई और उन दोनों को तो लग रहा था जैसे बे कोई सपना देख रहे है,,,,

निशा हल्के गुलाबी रंग की प्लेन साड़ी आंखों पर काला चश्मा और खुले बालों में बहुत ही सुंदर लग रही थी सबकी निगाहें उस पर टिकी हुई थी जो भी उसे देखता बस देखता ही रह जाता, विजय तो जैसे निशा को देखकर उस में खो गया था,,,,

निशा के वहां आ जाने से रोमी और विजय को वापस अपनी जगह पर आना पड़ा, उन दोनों को बहुत शर्मिंदगी महसूस हो रही थी क्योंकि अब कमेटी अध्यक्ष ने निशा से ही उद्घाटन के बारे में जो बोल दिया था,,,,,

रोमी को तो निशा पर बहुत गुस्सा आ रहा था तो विजय इस सोच में डूबा हुआ था कि निशा आखिर यहां कैसे उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था,,,,

तभी निशा ने कैची लेकर फीता काटकर आश्रम का उद्घाटन किया चारों तरफ ताली की गड़गड़ाहट गूंज उठी,,,,,

तब कमेटी अध्यक्ष ने निशा का परिचय सबसे करवाया जब विजय और रोमी ने सुना कि जिस कंपनी ने इस आश्रम को 50% सहयोग दिया, निशा उस कंपनी की पार्टनर है तो उन लोगों को एक बड़ा सा ही झटका लगा,,,,

विजय यह सोचने लगा कि इतना यह सब कुछ कैसे उन दोनों को कुछ समझ में नहीं आ रहा था,,,,