विजय अब दिन-रात निशा के ही बारे में सोचा करता उसे निशा और अपने बच्चों की बहुत याद आती और अपने किए पर पछतावा होता,,,,
वह अकेले में अपने बच्चों और निशा को याद कर रो पढ़ता था जिस धन दौलत के नशे में चूर होकर उसने अपने बीवी बच्चों को छोड़ा था, आज उस धन दौलत का नशा उसके सिर से उतर चुका था वह बस अब शकुन से अपनी जिंदगी जीना चाहता था,,,,
वह चाहता था कि वह रोज ऑफिस जाए और उसकी निशा उसके लिए नाश्ता बनाए फिर वह नाश्ता कर निशा के हाथ से बना टिफिन लेकर ऑफिस जाए,,,,
वापस आकर अपने बच्चों के साथ खेले उनकी प्यारी-प्यारी बातें सुने उन्हें ढेर सारी बातें बताएं उनके लिए चॉकलेट खिलौना लेकर आए, फिर अपने परिवार के साथ खाना खा कर कुछ देर उनके साथ टीवी देख कर हंसी मजाक कर सो जाए,,,,
जब उसे टाइम मिले तो अपने परिवार को लेकर घूमने जाए , यह सोचकर विजय अपने आपको ही कौसने लगता कि क्यों उसने अपनी हंसती खेलती जिंदगी को उजाड़ दिया,,,,
क्यों उसने नहीं सोचा कि उसका अपना परिवार है खुद उसने ही अपनी हस्ती खेलती जिंदगी में जहर घोल दिया था अपनी हस्ती खेलती हरी-भरी बगिया में अपने हाथों से ही आग लगा दी थी,,,,
क्यों वह हमेशा यह सोचता था कि पैसे के बल पर किसी भी खुशी को खरीदा जा सकता है आज तो उसके पास कुछ भी नहीं है आज ना उसका परिवार है ना पैसा जिस कारोबार को वह दिन-रात बढ़ाने के लिए लगा रहता था वह कारोबार भी उसका नहीं है,रोमी ने उसे उसकी औकात दिखा दी थी,,,,,
आज विजय को एहसास हो रहा था कि उसने रोमी से कभी प्यार किया ही नहीं था वह तो सिर्फ उसकी दौलत से प्यार करता था जबकि उसने सच्चे दिल से प्यार तो निशा से किया था और आज भी वह उससे ही करता है,,,,
वही रोमी को भी इस बात का डर था कि कहीं अब विजय निशा की धन दौलत को देखकर उसे छोड़कर वापस निशा के पास ना चला जाए,,,,
वह अब विजय को अपनी मीठी मीठी बातों में उलझाए रखना चाहती थी वह कभी उसके लिए कोई सरप्राइज प्लान कर दी तो कभी उसके लिए महंगा सा गिफ्ट लेकर आती,,,,
वह अब हमेशा इस कोशिश में लगी रहती की विजय हमेशा खुश रहे और बस उस मैं ही बिजी रहे क्योंकि उसे अब चिंता सता रही थी कि कहीं विजय उसे छोड़कर निशा के पास चला जाएगा तो क्या होगा,,,,
विजय को अब जैसे कुछ नहीं चाहिए था वह बस अपनी बीवी बच्चों के साथ रहना चाहता था दूसरे दिन वह कहीं से निशा के ऑफिस का पता पूछ कर निशा के ऑफिस पहुंच गया,,,,
उसने निशा के ऑफिस जाकर बॉडीगार्ड को एक कागज में अपना नाम पता लिखकर निशा से मिलने की इच्छा जाहिर की,,,,
चौकीदार वह कागज लेकर अंदर निशा के पास चला गया निशा ने जैसे ही विजय की नाम की चिट्ठी देखी उसे गुस्से में एक तरफ फेंक दिया और अपने काम में बिजी हो गई,,,,
वही विजय बाहर उसका इंतजार करता रहा उसने कई बार चौकीदार से पूछा भी की निशा मैम से उसे कुछ जरूरी काम है और वह मिलना चाहता है, लेकिन चौकीदार ने उसे यह कहकर मिलने के लिए मना कर दिया कि अभी मैम कुछ जरूरी काम में बिजी है जब टाइम होगा वह उसे बुला लेगी,,,,
विजय इस उम्मीद में इंतजार करता रहा लेकिन शाम हो गई निशा ने उसे मिलने नहीं बुलाया विजय समझ चुका था कि निशा उसे से बहुत गुस्सा है,,,,
विजय जानता था कि उसने जो कुछ किया है वह उसके लिए बहुत बड़ा गुनाह है और निशा का उसके प्रति इस तरीके से नाराज रहना कोई गलत नहीं है, लेकिन विजय चाहता था कि बस निशा उसे एक बार मौका दे दे वह उसे इतना प्यार देगा कि उसे कभी किसी चीज की कमी महसूस नहीं होगी,,,,,
वह अपनी गलती को सुधारना चाहता था जो उसने की थी, शाम हो गई,,,,