अब सन्नो के जाने के बाद निशा ने अपने आंसू पोंछे और फिर अपने घर के कामों में लग गई,,,,
वही विजय की मां को जब निशा ने फोन कर विजय के एक्सीडेंट के बारे में सब बात बताई तो उसकी मां के होश उड़ गए वह हड़ बढ़ाते हुए घबराते हुए बोली लेकिन विजय मेरा बेटा अब कैसा है और रोमी कहां है,,,,,
यह सुनकर निशा ने कुछ सोचकर विजय की मां को बता दी,अब सारी बातें सुनकर विजय की मां रोने लग गई और हड़ बढ़ाते हुए बोली में मैं अभी आती हूं और वह जल्दी ही फिर निशा के बताए पते पर निशा के घर पहुंच गई,,,
अब विजय को देखकर उसका कलेजा मुंह को आ गया क्योंकि विजय उसकी हालत देखकर उसकी मां रो पड़ी और गले लगा कर कहने लगी मेरा बच्चा मेरे बच्चे को क्या हो गया तू कैसा है मेरा बेटा,,,,
तब निशा ने कहा घबराने की कोई बात नहीं है भगवान ने चाहा तो विजय पहले की तरह बिल्कुल ठीक हो जाएगा,,,,,
यह सुनकर विजय की मां निशा के पैरों में गिर पड़ी और कहने लगे तू देवी है मेरी बेटी हो सके तो मुझे माफ कर देना मैं जानती हूं हमने जो कुछ भी तुम्हारे साथ किया वह माफी लायक नहीं है लेकिन जो हमने किया वह बदला तो नहीं जा सकता ना, केवल सुधारा जा सकता है, उस वक्त पैसों के लालच में अंधे होकर मैंने और मेरे बेटे ने तुम पर और मासूम इन बच्चों पर कितना कुछ जुर्म किया शायद भगवान ने हमारी गुनाहों की हमें सजा दी है हो सके तो मुझे माफ कर देना बेटी, भगवान तो कभी हमारे गुनाहों को माफ नहीं करेगा लेकिन अगर तुम माफ कर दोगी तो,,,,,
यह कहते हुए विजय की मां रोने लग गई क्योंकि अपनी गलती का एहसास तो उसे बहुत पहले हो गया था लेकिन आज वह अपनी गुनाहों की सजा मांगना चाहती थी न जाने कब से वह इस दिन का इतजार कर रही थी जब वह निशा से अपनी गलतियों के लिए माफी मांग सके ।
उस वक्त उसकी आंखों में पश्चाताप के आंसू देख कर निशा ने कहा कि आपको माफी मांगने की कोई जरूरत नहीं है और हां कुछ समय में विजय बिल्कुल ठीक हो जाएगा आगे बिना कुछ बोले ही वहां से चली गई ,,,,,
वैसे निशा अब दिन-रात विजय की जी जान से सेवा कर दी उसके हाथ पैरों की मालिश समय-समय पर उसे अपने हाथों से बड़े प्यार से खाना खिलाना उसे दवाइयां देना और उसे हर वह खुशी देने की कोशिश करना जिसे विजय को खुशी मिले और वह जल्दी ही ठीक हो जाए,,,,,
वह विजय के साथ-साथ निशा अपने बच्चों का भी पूरी तरह ख्याल रखती और घर के कामकाज के साथ-साथ अपने ऑफिस का काम भी संभालती थी,,,
इतना कुछ करने के बाद भी निशा के चेहरे पर जरा सी भी थकान दिखाई नहीं देती,,,,,,
वह हमेशा मुस्कुराती रहती निशा की सेवा भक्ति को देखकर विजय को अपने आप पर बहुत पछतावा होता और उसकी आंखों से आंसू निकल पड़ते,,,,,
लेकिन अब भी विजय को एक बात सता रही थी वह यह कि आखिर सुनील दत्त के साथ निशा का क्या रिश्ता है यह बात अभी तक उसकी समझ में नहीं आई थी,,,,,