Tere Mere Darmiyaan - 47 in Hindi Love Stories by CHIRANJIT TEWARY books and stories PDF | तेरे मेरे दरमियान - 47

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तेरे मेरे दरमियान - 47

आदित्य तिरु से कहता है --

आदित्य :- मामा जी , पापा ने मेरे साथ ऐसा क्यू किया , क्या मैं इतना बुरा हूँ ।

 आदित्य की बात सुनकर तिरु उसके गाल पर हाथ फेरता है और कहता है --

तिरु :- नही मेरे बच्चे , तु बुरा नही है । बुरा तेरा गुस्सा और तेरी जिद्द है , जिसे कम करने के लिए तेरे पापा ने तुझे यहां पर भेजा था ।

आदित्य :- पर ये बात तो वो भी मुझसे बोल सकते ना । अगर वो ऐसा बोलते तो मैं कभी गुस्सा नही करता ।

आदित्य की बात को सुनकर तिरु हैरान हो जाता है , इतने छोटे बच्चे से इतनी बड़ी बात सुनकर तिरु हैरान भी था और उसके आखो मे पानी भी ।

आदित्य फिर कहता है --

आदित्य :- मामा , अगर मेरा गुस्सा ही पापा और माँ की प्रॉब्लेम है तो आज से मैं कभी गुस्सा नही करुगां और उनकी सारी बात मानूगां । मामा जी अब आप मुझे वही स्कुल पहुचां दिजिए ।

तिरु :- क्यो बेटा ।

आदित्य : - माँ और पापा ने मुझे एक अच्छा बच्चा बनने भेजा है ना तो अब मैं अच्छा बच्चा बनकर दिखाऊगां ।

तिरु आदित्य को फिर से उस स्कूल मे छोड़कर आता है , आदित्य इस खुश था पर उसके आंखो मे अपने माँ और पापा दुर होने के आंशु भी । आदित्य अपने मामा को बॉय बोलतर अपनी आखो की आंशु को छुपाता हूआ । वहां से चला जाता है ।

तिरु अपने इस पल मे वापस आ जाता है और अपनी आखो को पोंछते हूए जानवी से कहता है --

तिरु :- मेरा आदि बुरा नही है , वो तो हमेशा दुसरो के लिए जिता है , दुसरो की खुशी के लिए जिता है । 

तभी वहां पर रमेश और कृतिका आ जाती है , कृतिका कहती है --

कृतिका :- मामा जी सही बोल रहे है जानवी , आज हम दोनो भी जो कुछ भी है आदित्य के वजह से ही है । हम दोनो तो अनाथ थे । हम दोनो इसी स्कुल के बाहर लोगो से मांग कर खाते थे । तब आदित्य ने ही मामा जी से कहतक हमे भी अपने साछ स्कुल मे एडमिशन करा दिया और फिर कॉलेज तक साथ मे पड़े और नौकरी भी आदित्य ने दिया ।

ऑफिस मे प्रोजेक्ट वो अकेले बनाता था और नाम हं तिनो का होता है । वहां पर सब जानते है के हम तिनो एक टीम है और हर काम तिनो मिलकर ही करते है । पर सच तो यह है सारा काम आदित्य करता था । 

रमेश :- वो ऐसा ही है , जिसे अपना मानता है उसको लिए जान तक दे सकता है । धिरे - धिरे तुम भी उसे समझने लगोगी । उसके जैसा इंसान बहोत मुश्किल से मिलता है ।

जानवी उन लोगो से आदित्य के बारे मे सुनकर उसके (जानवी ) मन मे आदित्य लिए सम्मान और बड़ जाता है फिर जानवी को वो सब याद आता है जो आदित्य ने उसके लिए किया था । 

तिरु :- हमारा आदी बहोत हिम्मत वाला है , पर जब मोनिका ने उसे धोका दिया तब वो बिल्कुल टूट चुका था ।

जानवी :- आप मोनिका के बारे मे जानते थे ?

तिरु :- आदित्य मुझसे कुछ नही छुपाता , मुझसे क्या वो किसी से भी कुछ नही छुपाता । और फिर ये मेरा दोनो पंटर लोग है ना , मेरा खबरी । इन दोनो से मुझे सब पता चल जाता है ।

कृतिका :- जानती हो जानवी , मोनिका से ब्रेकअप के बाद आदित्य एकदम अंदर से टूट चुका था , वो मोनिका को भूला ही नही पा रहा था । पर थैंक गॉड उसके बाद तुम उसकी लाईफ मे आई , तुम्हारे आने के बाद तो जैसे वो बदल ही गया , जो मोनिका के कारण उदास और मायुस रहता था वो तुम्हारे आने से खुश रहने लगा । 

रमेश :- वो किसीको बताएगा नही के वो उदास है या टुट चुका है बस खुश रहने का नाटक करेगा । पर मैने उसके आखो मे तुम्हारे लिए प्यार दैखा है जानवी , उसे कभी अपने से अलग मत करना , उसका साहारा बनना ।

जानवी को अपने आप मे शर्मिंदा महसुस होने लगा था , तब तिरु कहता है --

तिरु :- हमारा आदि है ही ऐसा । वो सिर्फ दुसरो के लिए जीता है ।

जानवी :- मामा जी उनके ( आदित्य) के माँ , पापा कौन है और कहां है ।

तिरु :- धिरे - धिरे तुझे सब पता चल जाएगा बेटा ।

जानवी :- मामा जी , क्या अब भी उनके ( आदित्य ) माता पिता उनसे नाराज है ।

तिरु :- नही बेटा , वो अब नाराज नही है , जब उन्हें मैने सारी सच्चाई बताई थी तबसे आदि घर का लाडला बन गया है ।

जानवी :- तो फिर वो लोग इनसे ( आदित्य ) मिलने क्यो नही आते है ।

तिरु :- सब आएगें बेटा । बस अभी यू समझलो के आदित्य ही ऐसा नही चाहता ।

जानवी :- पर मामा जी ...!

तिरु :- चिंता मत करो बेटा । तुमने एक ऐसे इंसान से शादी की है , जिसके लिए गर्व होगा । 

इतना बोलकर तिरु और सभी वहां से चला जाता है । जानवी बैठकर सौचने लगती है ---

जानवी :- ये तुझे क्या हो रहा है जानवी , तु क्यो उस आदित्य के बारे मे इतना सौच रही है । तुने तो डिवोर्स पेपर पर साईन भी कर दिया है , 6 महिना बाद ही तुम दोनो अलग हो जाओगी । तुझे तो विकास से प्यार है तो फिर आज तु आदित्य के लिए क्यों इतना सैच रही हो ?

तभी अशोक का फोन आता है , जानवी फोन रिसिव करती है --

जानवी :- हां पापा ।

अशोक ( खुश होकर ) :- बेटा Guess करो के मैं तुम्हें क्या कहने वाला हूँ ।


जानवी :- महामाया का काम मिल गया है इसलिए ।

अशोक :- अरे वो पुरानी हो चुकी है । 

जानवी :- तो क्या कोई नया काम मिल गया है क्या पापा ।

अशोक :- तुम्हे याद है पार्टी मे आदित्य ने अनय से कहा था के हमारा बिडीगं रोट कम होने के बाद भी विकास को काम कैसे मिला । 

जानवी :- हां याद है ।

अशोक :- वही काम अनय जी ने हमे ऑफर किया है ।

जानवी :- क्या ? 
अशोक :- हां बेटा , पता नही ये आदित्य हमारे जिंदगी मे जैसे एक फरिश्ता बनकर आया है । ओके बेटी मुझे थोड़ा काम है मैं बाद मे करता हूँ ।

इतना बोलतर अशोक फोन काट देता है । जानवी कहती है --

जानवी :- आदित्य तुम आखिर हो कौन ।

तभी वहां पर आदित्य आ जाता है और कहता है --

आदित्य :- अरे जानवी तुम यहां हो और मैं तुम्हें घर पर ढुडं रहा था । 
जानवी चुप चाप खड़ी थी तो आदित्य कहता है--

आदित्य :- मुझे पता है तुम क्यों उदास हो । कोर्ट ने हमे 6 महिना समय दिया है इसलिए ना । तुम टेशंन मत लो विकास को मैं सब समझा दूगां । अब चलो चल कर खाना खाते है , पेट मे चुहे दौड़ रहे है ।

आदित्य जाने लगता है तो जानवी आदित्य को रौककर कहती है --

जानवी :- क्या तुम्हें पता है के हमे माहामया का कंट्रेक्ट और आज अमय सर ने भी अपनी कंट्रेक्ट विकास से वापस लेकर हमे दे दिया है ।

आदित्य :- हां पता है । अब चलो ।

इतना बोलतर आदित्य चला जाता है जानवी कहती है --

जानवी :- तुम किस तरह के इंसान हो आदित्य , मैं जानती हूँ के इन दोनो काम के मिलने के पिछे कही ना कही तुम्हारा भी हाथ है , पर तुम ये जताना भी नही चाहते । सभी सही कहते है तुम्हारे बारे मे । तुम सच मे अलग ही हो ।


दुसरे दिन जानवी और आदित्य घर से बाहर जानवी के काम से गया था । उस रात को हूई घटना के बाद जानवी को अकेले डर लगने लगा था । तभी जानवी को वहां पर विकास दिखाई देता है , जानवी विकास को दैखकर खुश हो जाती है और और पुराने लगती है --

जानवी :- विकास. . विकास. ..

विकास जानवी की और दैखता है और उसे अनदेखा करते वहां से कार लेकर चला जाता है । जानवी ये बहोत अजीब सा लगता है , जानवी अपना फोन निकालती है और विकास को फोन करने लगती है पर विकास हर बार जानवी का फोन कट कर देता है । जानवी ये बहोत बुरा लगता है और जानवी मायुस होकर कहती है --

जानवी :- ये विकास मेरा फोन क्यों नही उठा रहा है ?

विकास काली को फोन करता है और कहता है --

विकास :- भाई जैसा आपने कहा था के मैं जानवी को इंग्नौर करु और उसका फोन ना उठाऊ , मैने वैसा ही किया । पर भाई इससे क्या होगा ?

Note :- aap sabse ek baat kehna tha ke mei apna ek or love story la rha hu jiska naam hai ANJANE RISTEY ye ek love story hai jisme arjun or anika ki kahani hai . arjun ko ek bar mahadev ke mandir par ek latter milta hai , jisme anika ne apna problem likh kar mahadev ko batati hai or wo letter arjun ko mil jata hai , arjun paisa wala top business man hai , arjun anika ka sara problem dur kar deta hai wo bhi ye bataye bina , anika us insan se pyar kar beithi hai or arjun ko dhundti hai taki anika arjun se bata sake ke wo usse kitna pyar krti hai . ye kahani bahot jald apke pass aayegi . asha hai ke aap sab is kahani ko bhi isi tarah pyar denge . Dhanbad ❤️🙏


To be continue....427