तकरार से तकरार तक
खन्ना मेंशन में सुरक्षा के घेरे और कड़े कर दिए गए थे। देब ने राधिका के कॉलेज का ट्रांसफर मुंबई के सबसे सुरक्षित और महंगे कॉलेज में करवा दिया था। लेकिन राधिका के लिए सबसे बड़ी चुनौती कॉलेज नहीं, बल्कि घर में मौजूद आर्यन खन्ना था।
कॉलेज का पहला दिन और 'हीरो' की एंट्री
राधिका तैयार होकर नीचे आई। उसने सफेद रंग का चिकनकारी कुर्ता और जींस पहनी थी, सादगी में भी वह बेहद खूबसूरत लग रही थी। देब नाश्ते की टेबल पर था, उसने बस एक नज़र देखा और सिर हिला दिया।
तभी आर्यन सीढ़ियों से स्टाइल में नीचे उतरा। उसने लेदर जैकेट पहनी थी और बाल पूरी तरह सेट थे। "भाभी, आज इस 'आफत' को कॉलेज मैं छोड़ूँगा। भाई ने मुझे इसका बॉडीगार्ड नियुक्त किया है," आर्यन ने शरारत से कहा।
"मुझे किसी बॉडीगार्ड की ज़रूरत नहीं है, मिस्टर शो-ऑफ!" राधिका ने चिढ़ते हुए कहा।
"ओह, तो फिर उन गुंडों से खुद निपटोगी जो दिल्ली से तुम्हारा पीछा कर रहे हैं? चलो चुपचाप, वरना यहीं ज़मीन पर पटक कर ले जाऊँगा," आर्यन ने अपनी कार की चाबी घुमाते हुए कहा।
रास्ते की नोक-झोंक
आर्यन की लाल रंग की स्पोर्ट्स कार मुंबई की सड़कों पर दौड़ रही थी। राधिका चुपचाप बाहर देख रही थी, तभी आर्यन ने तेज़ म्यूज़िक बजा दिया।
"बंद करो इसे! मेरा सिर फट रहा है," राधिका चिल्लाई।
"मेरी कार, मेरा म्यूज़िक। अगर पसंद नहीं, तो पैराशूट से नीचे कूद जाओ," आर्यन ने मुस्कुराते हुए कहा।
"तुम इतने बदतमीज़ क्यों हो? देब जीजा जी कितने शांत हैं, और तुम... तुम तो बिल्कुल बंदर की तरह हो," राधिका ने गुस्से में कहा।
आर्यन ने अचानक गाड़ी के ब्रेक मारे। राधिका आगे की तरफ झुकी, और उसकी धड़कनें तेज़ हो गईं। आर्यन उसकी तरफ झुका, उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी। "बंदर? क्या तुम्हें पता भी है कि लड़कियां इस बंदर की एक मुस्कान के लिए पागल रहती हैं?"
दोनों की आँखें मिलीं। राधिका को पहली बार एहसास हुआ कि आर्यन की आँखें गहरी भूरी और बहुत गहरी थीं। उसने घबराकर अपनी नज़रें फेर लीं। "पागल ही होंगी वो सब।"
कॉलेज में 'प्रोटेक्टर' वाला अंदाज़
कॉलेज पहुँचते ही कुछ लड़कों ने राधिका को नोटिस किया। एक नया चेहरा और इतनी मासूमियत, कुछ लड़के कमेंट करने ही वाले थे कि आर्यन गाड़ी से उतरा। उसने अपना चश्मा उतारा और उन लड़कों की तरफ बस एक ठंडी नज़र डाली। आर्यन कॉलेज का एक्स-स्टूडेंट था और उसकी धाक आज भी वहाँ थी।
"ये मेरी ज़िम्मेदारी है। अगर इसके पास कोई दिखा, तो खन्ना मेंशन का रास्ता भूल जाओगे," आर्यन की आवाज़ में वैसी ही कड़क थी जैसी देब की आवाज़ में होती थी।
राधिका यह देख कर हैरान थी। जो लड़का अभी तक उसे तंग कर रहा था, वह अचानक उसके लिए एक ढाल बन गया था।
बारिश और बदलता रिश्ता
एक शाम, मुंबई में तेज़ बारिश शुरू हो गई। राधिका बालकनी में खड़ी भीग रही थी। उसे दिल्ली की याद आ रही थी, जहाँ उसकी ज़िंदगी कितनी साधारण थी। अचानक उसके कंधों पर किसी ने गर्म जैकेट डाल दी।
पीछे मुड़कर देखा तो आर्यन खड़ा था। "बीमार पड़ जाओगी तो भाई मेरी शामत ले लेंगे।"
"तुम हमेशा भाई की बात क्यों करते हो? खुद की कोई फिक्र नहीं?" राधिका ने धीरे से पूछा।
आर्यन उसके पास रेलिंग के सहारे खड़ा हो गया। "फिक्र तो है... पर मैं ये जताना नहीं चाहता। मुझे डर लगता है कि अगर मैं सीरियस हो गया, तो शायद तुम मुझसे डरने लगोगी।"
राधिका ने मुस्कुराते हुए कहा, "मैं तुमसे नहीं डरती आर्यन। तुम बस थोड़े... अजीब हो।"
"अजीब? अच्छा!" आर्यन ने अचानक एक हाथ से राधिका की कमर को घेरा और उसे अपनी तरफ खींचा। बारिश की बूंदें दोनों के चेहरों पर गिर रही थीं। "अब डर लग रहा है?"
राधिका की साँसें थम गईं। आर्यन का चेहरा उसके बहुत करीब था। उस पल में कोई नोक-झोंक नहीं थी, कोई लड़ाई नहीं थी। बस दो दिल थे जो पहली बार एक ही रफ़्तार से धड़क रहे थे।
"छोड़ो मुझे..." राधिका ने बहुत धीमी आवाज़ में कहा, लेकिन उसके पैर वहीं जमे रहे।
आर्यन ने मुस्कुराकर उसे छोड़ दिया। "जाओ, सो जाओ। कल फिर से मुझे तुम्हें परेशान करना है।"
देब और पाखी की मुस्कान
ऊपर की खिड़की से देब और पाखी यह सब देख रहे थे। पाखी के चेहरे पर एक राहत भरी मुस्कान थी।
"लगता है आर्यन ने अपनी मंज़िल ढूंढ ली है," पाखी ने कहा।
देब ने अपना हाथ पाखी के कंधे पर रखा—यह पहली बार था जब उसने पाखी को इतने अधिकार से छुआ था। "आर्यन को संभालने के लिए राधिका जैसी लड़की ही चाहिए थी। दोनों एक-दूसरे को पूरा करते हैं।"
पाखी ने देब की तरफ देखा। "और हम?"
देब ने पहली बार पाखी की आँखों में सीधे देखते हुए एक हल्की सी मुस्कान दी। "हम... हम एक नई शुरुआत कर रहे हैं, पाखी।"
कहानी में आगे का ट्विस्ट:
राधिका और आर्यन का रोमांस अब परवान चढ़ रहा था, लेकिन वह कातिल अभी भी मुंबई की गलियों में उन्हें ढूंढ रहा था। क्या आर्यन अपनी 'मिस तूफान' को बचा पाएगा