रात ढल गई थी, पर शहर की सडकें अभी भी थोडी- थोडी रोशनी से भरी थीं. ।
आदित्य घर की छत से नीचे उतरा और फोन को बंद कर दिया. अजीब फोन कॉल, केदारखंड” का नाम, और वो पुराना बॉक्स—सब कुछ एक क्षण को उसे अंदर तक हिला गया था
. लेकिन उसके भीतर एक आवाज और थी—“ अभी नहीं.आदित्य ने खुद को समझाया,मैं पापा के रास्ते में अभी नहीं कूदूँगा. अभी नहीं. जीवन अभी कुछ और मांग रहा है।
उसने बॉक्स वापस अलमारी में रख दिया.S- 91 की गुप्त बैठकदिल्ली के बाहरी इलाके की एक पुरानी सरकारी इमारत में रात के दस बजे तक भी रोशनी जल रही थी.
अंदर सम्मेलन कक्ष में S- 91 की टीम मौजूद थी—टेबल पर इंटेल रिपोर्ट्स, उपग्रह चित्र, और पुरानी फाइलें.समित चौहान ने फाइल खोलते हुए कहा,पंद्रह साल हो गए योगेश्वर को गायब हुए.।
लेकिन यह मामला बंद नहीं होता. उल्टा हर साल कोई नया संकेत आ जाता है। अगर वो जिंदा है तो पक्का उसको वो मिल गया होगादूसरे अधिकारी ने कहा,सर, क्या हमें वाकई उसकी फैमिली पर नजर बनाए रखनी चाहिए?
वह लडका आदित्य क्या अब भी मामला से जुडा है? या नहीं
समित ने कठोर आवाज में कहा
लडका कोई खतरा नहीं. पर उसके पास चाबी हो सकती है. योगेश्वर जैसा आदमी कोई काम अधूरा छोडकर नहीं गया होगा।
वो तेज दिमाग का आदमी था वो जो भी काम करता है उसके आगे की पहले सोच कर चलता है,
लेकिन समस्या ये है कि उसने क्या प्लान बनाया होगा.फिर उसने एक रिपोर्ट टेबल पर फेंकी
ये देखो, एक विदेशी संस्था Chronos Lab लगातार भारतीय पुराण- आधारित रिसर्च में घुसने की कोशिश कर रही है. और यह सब योगेश्वर के गायब होने के तुरंत बाद शुरू हुआ था।
हो ना हो वो लोग भी उसके पीछे है लेकिन हमें वो हर कीमत पर चाहिए अपने सारे आदमी इस काम में लगा दो कोई गलती की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए.कक्ष में तनाव फैल गया
.किसी ने धीमे से कहा—सर. यह सिर्फ एक वैज्ञानिक का मामला नहीं. देश की सुरक्षा का सवाल है।
समित की आँखों में चमक उभरी—और सबसे बडा खतरा यह है कि एक अमर प्राणी के अस्तित्व को वे लोग हथियार समझते हैं।
कमरे में सन्नाटा छा गया
.दूसरी तरफ, योगेश्वर का पुराना सहयोगी, हेमंत, अपने छोटे से क्वार्टर में बैठकर पुरानी तस्वीरें देख रहा था.
उसकी मेज पर योगेश्वर के साथ उसकी दो पुरानी फोटो थीं—एक वैज्ञानिक Meeting की, दूसरी उनकी किसी आउटडोर रिसर्च ट्रिप की.हमने जब पहली बार अश्वत्थामा पर रिसर्च शुरू की थी.हेमंत खुद से बडबडाया
,. किसे पता था कि ये सब इतना खतरनाक मोड ले लेगा।
ओर आज देखो मै अकेला हु लेकिन वादा है जिसने भी ये साजिश रची है उसका पता करके ही रहूंगा
.उसके जेहन में वो रात फिर उभर आई—जब योगेश्वर को आखिरी बार देखा था
वो रात जब योगेश्वर अग्निवंश Mission पर जाने वाला थाउसकी गाडी में फाइलें भरी थीं.उसने कहा था
हेमंत, अगर मैं लौटकर न आऊँ तो कहानियों पर मत जाना, सच खोजने की कोशिश करना. ओर हा अगर मै लौट कर ना भी आ पाऊं तो ये फाइल उसे दे देना(नाम तो नहीं बताया लेकिन हेमंत समझ गया किसको फाइल देनी है
वर्तमान समय
हेमंत का गला भारी हो गया.उसे लगा—अब समय आ गया है किसी को बात बताने का.और उसके दिमाग में सिर्फ एक चेहरा उभरा—नंदिनी झा. नंदिनी, वह पत्रकार जो सच की खोज में लगभग पागलपन की हद तक चली जाती थी
, अपने ऑफिस में फाइलें घूर रही थी. उसके सामने योगेश्वर केस की अधूरी रिपोर्ट थी—जहाँ“ कन्फिडेंशियल” की मोहर हर दो लाइन पर चमक रही थी.नंदिता वो लडकी थी जो कभी योगेश्वर अग्निवंश के साथ काम करती थी
लेकिन साजिशों के कारण उसको निकाल दिया गया ओर वो पत्रकार बन गई ।
नंदू का घर । रात्रि
कोई तो बात है जो इतने साल बाद भी छुपाई जा रही है.वह खुद से फुसफुसाई.अचानक उसके फोन पर एक अज्ञात संदेश आया
तुम्हें योगेश्वर केस पर बात करनी हो तो पुराने विज्ञान भवन के पीछे वाली पार्किंग में आओ. — नंदू
नंदिनी मुस्कुराई,नंदू (सोचती हुई )“ लगता है कोई पुराना साथी है.
उधर, केदारखंड की गहरी घाटियों में, जहाँ बर्फ और हवा की आवाजें ही संवाद करती थीं
अश्वत्थामा किसी अनदेखी शक्ति को महसूस कर रहा था.उसने बर्फ में अपने विशाल कदम रोके.आँखें बंद कीं.और कुछ क्षण के लिए वह स्थिर हो गया—जैसे समय उसके चारों ओर थम गया हो.उसने महसूस किया कहीं किसी जगह पर दो शक्तियाँ उठ रही थीं.एक वो जो ज्ञान चाहती है.दूसरी वो जो अमरता को हथियार बनाना चाहती है.अश्वत्थामा ने गहरी सांस ली.युग बदल रहा है
.उसकी आवाज हवा में घुली.उसने एक पथरीली चट्टान की ओर कदम बढाए—वही स्थान जहाँ उसने योगेश्वर को आखिरी बार देखा था.।
आदित्य की सामान्य- सी, पर अनजानी रातआदित्य अपने दोस्तों के साथ एक छोटे से रेस्टो में बैठा था—हंसी- मजाक, Collage की बातें, नई योजनाएँ.पर बीच- बीच में उसका ध्यान बार- बार फोन की ओर जा रहा था—कहीं फिर कोई ऐसी आवाज न आ जाए.अचानक रोहित ने कहा—यार, तू बहुत चुप लग रहा. ठीक तो है न? कई दिनों से तेरा व्यवहार कुछ बदला हुआ लग रहा है.
आदित्य ने हंसकर कहा,हाँ भाई. बस थोडा सा थका हूँ। आज कल कुछ ठीक नहीं चल रहा है मुझे खुद ही समझ नहीं आ रहा है.पर अंदर एक छोटा कंपन फिर से उठ रहा था.उसने पानी का गिलास उठाया, पर हाथ थोडा कांप गया.क्या था वो फोन. कौन था. और ‘केदारखंड’ क्यों?उसका मन चुपचाप पूछ रहा था.पर उसने इन सवालों को फिर दबा दिया.अभी नहीं.।
दूसरी तरफ
विज्ञान भवन के पीछे रात लगभग ग्यारह बजे, नंदिनी उस सूनी पार्किंग में पहुँची.लाइटें कम थीं, हवा ठंडी.अचानक एक छाया उसके पास आई.हेमंत.उसके चेहरे पर डर, पछतावा और सकुचाहट थी.नंदू जी. मुझे बहुत कुछ कहना है. पर आप ये बात कहीं लिखेंगी नहीं. अभी नहीं.नंदिनी ने गंभीर होकर कहा,तुम बस बोलो. सच कहीं न कहीं तो दर्ज होगा।
हेमंत ने काँपते हुए कहा—योगेश्वर. मरे नहीं थे।
नंदिनी की सांस रुक गई.
क्या?
हेमंत ने आगे कहा—और ये मत सोचना कि मामला सिर्फ वैज्ञानिकों का था. इस खेल के पीछे अंतरराष्ट्रीय एजेंसियाँ हैं, सरकारी छुपाव है
. और.वह एक पल रुका, चौकन्ना होकर चारों ओर देखने लगा.. और एक ऐसा अस्तित्व. जो आज भी जीवित है.
जिसके कारण सब ये खेल खेल रहे हैं। यहां तक कि उनके अपने साथी भी इस खेल में शामिल है
नंदिनी ने धीमे पर दृढ स्वर में पूछा—कौन?
हेमंत फुसफुसाया—अश्वत्थामा.यह कहते ही अचानक पास की सडक से तेज आवाज आई—जैसे किसी गाडी ने ब्रेक मारे हों.हेमंत डरा
वे हमें ढूँढ चुके हैं—भागो—” ओर ये फाइल रखो तुम्हे इसकी जरूरत होगी ये तुम्हे देने को बोला गया था.
नंदिनी स्तब्ध, पर तेज.दोनों अलग दिशाओं में भागे.पार्किंग में हवा भारी हो चुकी थी—मानो किसी अदृश्य ताकत ने एक और मोड लिख दिया हो. वहां पर कई गाडियों में दस बारह लोग थे जो शायद हेमंत पर नजर बनाए हुई थे.।
सवाल ये था कि आखिर वो लोग कौन थे?
writer Bhagwat Singh naruka