Pahli Nazar ka Ishq - 3 in Hindi Love Stories by Bikash parajuli books and stories PDF | पहली नज़र का इश्क - 3

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पहली नज़र का इश्क - 3

स्कूल का माहौल हमेशा की तरह हल्का-फुल्का और हँसी-मज़ाक से भरा हुआ था। लेकिन बिकाश और माया के लिए यह साल कुछ खास बन रहा था। उनकी दोस्ती अब सिर्फ़ दोस्ती नहीं रही – छोटे-छोटे पल, हँसी, मदद और एक-दूसरे की आदतें अब उनके दिल में एक ख़ास जगह बना चुकी थीं।विज्ञान प्रदर्शनी का रोमांचएक दिन स्कूल में वार्षिक विज्ञान प्रदर्शनी आयोजित हुई। सभी बच्चे अपने प्रोजेक्ट के साथ तैयार थे और हर कोई अपनी प्रस्तुति देने के लिए उत्साहित दिख रहा था। बिकाश और माया की टीम ने अपने प्रोजेक्ट “सोलर एनर्जी मॉडल” को बड़े प्यार और मेहनत से तैयार किया था।जैसे ही प्रदर्शनी शुरू हुई, माया ने देखा कि बिकाश अपने प्रोजेक्ट को सहज और आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत कर रहा है। उसकी आँखों में चमक, मुस्कान में शालीनता और शब्दों में सटीकता – माया को देखते ही महसूस हुआ कि यह लड़का सिर्फ़ अच्छा दोस्त नहीं, बल्कि उसके लिए कुछ और भी बहुत खास बन गया है।प्रदर्शनी के बाद, दोनों पार्क की ओर गए। हवा ठंडी और हल्की थी, पेड़ की पत्तियाँ धीरे-धीरे हिल रही थीं। माया ने धीरे से कहा,“बिकाश… तुम्हें देखकर मुझे गर्व महसूस होता है। तुम हर काम में कितने अच्छे हो।”बिकाश ने शर्माते हुए सिर झुकाया।“तुम भी कम नहीं हो माया। तुम्हारी हर बात मुझे प्रेरित करती है। तुम्हारे साथ सब आसान लगता है।”उस पल, दोनों के दिलों में एक-दूसरे के लिए आदर और प्यार की भावना और गहरी हो गई।पहली छोटी नोक-झोंकथोड़ी देर बाद, माया ने मज़ाक में कहा,“तुम हमेशा मेरी बातें सुनते हो, कभी अपने बारे में क्यों नहीं बताते?”बिकाश ने हँसते हुए उत्तर दिया,“क्योंकि तुम्हारी बातें सुनना मुझे ज्यादा अच्छा लगता है। और वैसे भी, तुम्हारे सामने मैं डर जाता हूँ।”माया ने उंगली से उसकी कोहनी थपथपाई।“तुम डरते हो? सच में?”“हाँ… लेकिन डर हमेशा तुम्हारे लिए अच्छा महसूस करने का भी है।”दोनों हँस पड़े। यह छोटी सी नोक-झोंक उनके रिश्ते को और मज़ेदार और हृदयस्पर्शी बना रही थी।पहली रोमांटिक घटना: बारिश में नज़दीकियाँकुछ दिन बाद, स्कूल के छुट्टी के समय, दोनों साथ में स्कूटर से घर लौट रहे थे। रास्ते में अचानक बारिश शुरू हो गई। माया ने डरते हुए कहा,“हम भीग जाएंगे!”बिकाश मुस्कुराया और कहा,“कोई बात नहीं, मैं तुम्हें सुरक्षित रखूँगा।”वह अपने बैग से छाता निकालकर माया के पास गया। दोनों एक ही छाते के नीचे खड़े थे। बारिश की बूँदें उनके चारों ओर गिर रही थीं।माया ने हल्की मुस्कान के साथ बिकाश की ओर देखा।“तुम मेरे लिए हमेशा ऐसे रहोगे न?”बिकाश ने उसकी आंखों में देखा और धीरे से कहा,“हमेशा माया… हमेशा।”बारिश की बूँदें, ठंडी हवा और उनके दिलों की धड़कन – सब कुछ एकदम परफेक्ट लग रहा था। उस पल दोनों ने महसूस किया कि यह सिर्फ दोस्ती नहीं, बल्कि पहला प्यार था।पहली डेट की योजनाकुछ दिनों बाद, माया ने हिम्मत करके कहा,“बिकाश… इस शनिवार को, क्या हम पार्क चलें? सिर्फ हम दोनों।”बिकाश का चेहरा खुशी से चमक उठा।“हाँ, बिल्कुल! मैं तुम्हारे लिए समय निकाल लूंगा।”शनिवार का दिन आया। पार्क में दोनों पहुंचे। घास पर बैठकर हँसी-मज़ाक, खेल और छोटी-छोटी नोक-झोंक – सब कुछ हुआ।माया ने बिकाश की टी-शर्ट खींचते हुए कहा,“तुम हमेशा इतने शर्मीले क्यों रहते हो?”बिकाश ने मुस्कुराते हुए कहा,“तुम्हारे सामने तो मैं शर्म महसूस ही नहीं करता।”उनकी हँसी, उनकी बातें और उनकी नज़दीकियाँ – सब कुछ उस दिन बहुत खास था।पहला प्यार का इजहारदिन ढलते-ढलते, सूरज के आखिरी किरणें पार्क के पेड़ों पर पड़ रही थीं। बिकाश ने गहरी सांस ली और माया की आँखों में देखा।“माया… मुझे तुम्हें कुछ कहना है। मैं… मैं तुम्हें सिर्फ दोस्त के रूप में नहीं देखता। मुझे… मुझे तुमसे प्यार हो गया है।”माया की आँखें चमक उठीं। उसके होंठों पर हल्की मुस्कान थी।“बिकाश… मुझे भी तुमसे यही एहसास हो रहा था। मैं भी तुम्हें पसंद करती हूँ।”दोनों एक-दूसरे के हाथों को कसकर थाम लिए।उस पल, समय जैसे थम गया। उनके लिए अब सिर्फ़ एक-दूसरे की हँसी, आँखों की चमक और दिल की धड़कन ही सबसे महत्वपूर्ण थी।Episode 3 का अंतघर लौटते समय, माया ने हाथ में हाथ डालते हुए कहा,“आज से हम सिर्फ दोस्त नहीं रहे, बिकाश।”बिकाश ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया,“हाँ माया… अब हम एक-दूसरे के पहले प्यार हैं।”स्कूल का यह साल उनके लिए यादगार बन चुका था। पहली दोस्ती, पहला रोमांच और अब पहला प्यार – सब कुछ उन्होंने साथ में अनुभव किया।बिकाश और माया ने तय किया कि चाहे कुछ भी हो, वे हमेशा एक-दूसरे के साथ रहेंगे। और इस तरह, उनका स्कूल का साल एक खूबसूरत प्यार की कहानी में बदल गया।