माया को अब सब समझ आ गया था। वह केवल नंदिनी की परछाईं नहीं थी, बल्कि उसकी अधूरी प्रतिज्ञा का हिस्सा थी। ताबीज, जो अब तक माया की मुट्ठी में था, अचानक तपने लगा। उसे याद आया कि नंदिनी ने मरते वक्त अपनी आत्मा का एक अंश उस ताबीज में कैद किया था, ताकि वह अपनी बेटी की रक्षा कर सके।
प्रतिशोध की ज्वाला
विमला का मंत्र तेज होता जा रहा था। तहखाने की दीवारों से रिसता हुआ खून जैसा तरल पदार्थ अब फर्श पर फैलने लगा था। "माया, वह ताबीज मुझे दे दो! वरना तुम दोनों यहीं दफन हो जाओगे!" विमला चिल्लाई।
माया खड़ी हुई, उसकी आँखों में अब डर नहीं, बल्कि एक दिव्य चमक थी। उसने ताबीज को हवा में ऊपर उठाया और चिल्लाकर कहा, "अधर्म की नींव पर खड़ी इस अमरता का अंत आज होगा!"
जैसे ही माया ने ताबीज को फर्श पर पटका, वह नीली रोशनी के साथ टूट गया। उस रोशनी ने तहखाने के काले धुएं को चीर दिया। आर्यन की रूह और अन्य साये विमला की ओर लपके। विमला ने मशाल से उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन सायों की शक्ति अब बेकाबू थी। उन्होंने विमला को चारों ओर से घेर लिया। उसकी चीखें सराय की सिसकियों में मिल गईं और देखते ही देखते वह उन सायों के साथ अंधेरे में विलीन हो गई।
मुक्ति का मार्ग
विमला के गायब होते ही कंपन रुक गया। पिंजरे के अंदर बैठी वह बच्ची, जो 50 साल से समय के जाल में फंसी थी, धीरे-धीरे बड़ी होने लगी। उसका शरीर, जो एक प्रयोग की वस्तु बन चुका था, अब प्राकृतिक रूप से अपनी उम्र पाने लगा। कुछ ही पलों में वह एक मासूम बच्ची से एक शांत वृद्ध महिला की छवि में बदली और फिर धीरे-धीरे रोशनी के कणों में बिखरने लगी।
आर्यन की रूह माया के करीब आई। उसने कोई शब्द नहीं कहे, लेकिन उसकी आँखों में माया के लिए आभार था। माया को महसूस हुआ कि उसके कंधे से एक बहुत भारी बोझ उतर गया है। मोगरे की वही पुरानी खुशबू एक आखिरी बार हवा में तैरी और फिर सब कुछ शांत हो गया।
राख और अवशेष
इशान ने माया को संभाला। "हमें यहाँ से निकलना होगा माया। यह सराय अब और नहीं टिकेगी।"
जैसे ही वे सराय की दहलीज से बाहर निकले, पूरी इमारत एक ताश के घर की तरह ढह गई। 1974 का वह काला अध्याय हमेशा के लिए मिट्टी में दब गया। सुबह की पहली किरण आसमान में दिखाई दे रही थी।
गाड़ी की ओर बढ़ते हुए माया ने इशान की तरफ देखा। "इशान, तुम्हें यह सब कैसे पता था? तुम कौन हो?"
इशान थोड़ा मुस्कुराया और अपनी जेब से एक पुरानी काली-सफेद तस्वीर निकाली। तस्वीर में एक छोटा लड़का नंदिनी और आर्यन के साथ खड़ा था। "आर्यन मेरा बड़ा भाई था माया। मैं सालों से इस सराय का रहस्य सुलझाने और विमला के परिवार को बेनकाब करने की कोशिश कर रहा था। मुझे बस एक ऐसे इंसान की तलाश थी जिसका संबंध सीधे उस अतीत से हो।"
माया ने गहरी सांस ली। शहर की ओर लौटते हुए उसे लगा कि वह अब 'माया' नहीं रही। उसके अंदर नंदिनी की शांति और आर्यन का साहस बस चुका था।
अंतिम सत्य
नीलकमल सराय अब केवल एक खंडहर था, लेकिन शहर की फाइलें अब भी अधूरी थीं। माया ने तय किया कि वह उन फाइलों को कभी बंद नहीं होने देगी। वह उन सभी बेगुनाहों की आवाज़ बनेगी जिन्हें इतिहास के पन्नों में दबा दिया गया था।
सूरज की रोशनी ने अंधेरी रात के खौफ को मिटा दिया था, लेकिन माया जानती थी कि कुछ सफर कभी खत्म नहीं होते—वे बस एक नई शक्ल अख्तियार कर लेते हैं।