एपिसोड 3: वफादारी की अग्निपरीक्षा
तालाब के किनारे सन्नाटा था, बस सनाया की तेज चलती सांसों की आवाज सुनाई दे रही थी। पृथ्वी का कंधा खून से लथपथ था, लेकिन उसकी नजरें सनाया के चेहरे पर टिकी थीं।
"तुमने मुझे क्यों बचाया, सनाया?" पृथ्वी ने दबी आवाज में पूछा।
सनाया ने बिना कोई जवाब दिए अपने दुपट्टे का एक हिस्सा फाड़ा और मजबूती से पृथ्वी के जख्म पर बांध दिया। उसकी आंखों में खौफ और गुस्सा एक साथ था। "ये मत समझना कि मैंने तुम्हें माफ कर दिया है। मैं बस नहीं चाहती कि मेरे शहर की बदनामी हो कि ठाकुरों ने किसी निहत्थे पर पीछे से वार किया।"
तभी झाड़ियों से भानु प्रताप का वफादार गुंडा, कालिया, बाहर निकला। उसके हाथ में बंदूक थी। "मालकिन, हट जाइए! ये सांप का बच्चा है, आज इसे खत्म करने का सबसे सही मौका है।"
सनाया बिजली की तेजी से उठी और कालिया के सामने जाकर खड़ी हो गई। उसकी आवाज में वो कड़क थी जिससे पूरी हवेली थर्राती थी। "बंदूक नीचे करो, कालिया! ठाकुरों के फैसले हवेली में होते हैं, अंधेरे में छिपकर नहीं। अगर दोबारा बिना मेरे हुक्म के गोली चलाई, तो अगली गोली तुम्हारे सीने में होगी।"
कालिया बड़बड़ाता हुआ पीछे हट गया, लेकिन उसकी आंखों में शक के बीज बो दिए गए थे।
हवेली में तूफान
जब सनाया हवेली लौटी, तो उसके कपड़ों पर खून के दाग देखकर भानु प्रताप का पारा चढ़ गया। उन्हें खबर मिल चुकी थी कि सनाया ने पुलिस ऑफिसर को बचाया है।
"सुना है आज हमारी शेरनी ने अपने शिकार की जान बचाई?" भानु प्रताप ने अपनी मूछों को ताव देते हुए पूछा। उनकी आवाज में एक अजीब सी ठंडक थी।
सनाया बिना डरे उनके सामने खड़ी हो गई। "पापा, वो हमारा बचपन का दुश्मन हो सकता है, लेकिन वो शहर का एसपी (SP) है। अगर उसे कुछ हुआ, तो पूरा पटना पुलिस बल यहां उतर आएगा और फिर न आपकी मील बचेगी, न आपकी सियासत।"
भानु प्रताप ने मेज पर हाथ पटका। "सियासत की फिक्र मुझे है, तू अपनी फिक्र कर! कहीं उस पुराने पत्थर को देखकर तेरा दिल तो नहीं पिघल रहा?"
सनाया की पलकें झपकीं, पर उसने खुद को संभाल लिया। "मेरा दिल पत्थर का हो चुका है, पापा। और पत्थर पिघला नहीं करते।"
पृथ्वी की नई चाल
अगले दिन, पृथ्वी घायल होने के बावजूद अपनी ड्यूटी पर तैनात था। उसके पास सनाया का फटा हुआ दुपट्टा था, जिसे उसने संभाल कर रख लिया था। उसे समझ आ गया था कि सनाया पूरी तरह वैसी नहीं है जैसा वो खुद को दिखा रही है।
उसने एक नई फाइल खोली— 'ठाकुर मिल्स बेनामी संपत्ति'।
पृथ्वी ने अपने कॉन्स्टेबल से कहा, "ठाकुरों को लगता है कि वो सिर्फ बाहुबल से जीतेंगे। उन्हें नहीं पता कि इस बार लड़ाई कागजों और कानून की है। उस जमीन पर स्टेशन का काम कल से फिर शुरू होगा, और इस बार सुरक्षा मैं खुद संभालूंगा।"
एक गुप्त मुलाकात
उसी रात, पृथ्वी ने सनाया को एक मैसेज भेजा— "उस पुरानी ईंट के पास आओ जहां तुम 25 साल पहले गिरी थी। कुछ दिखाना है।"
सनाया खुद को रोक नहीं पाई। वो छिपते-छिपाते हवेली के पिछले हिस्से वाले उसी पुराने बगीचे में पहुंची। वहां पृथ्वी खड़ा था, हाथ में कुछ पुराने सरकारी दस्तावेज थे।
"क्या दिखाने लाए हो? अपनी बहादुरी?" सनाया ने तंज कसा।
"नहीं, सच्चाई," पृथ्वी ने वो फाइल उसकी तरफ बढ़ाई। "तुम्हें लगता है कि तुम्हारे पिता वो जमीन सिर्फ अपनी मील के लिए चाहते हैं? इस फाइल को पढ़ो। उस जमीन के नीचे अवैध हथियारों का एक बहुत बड़ा गोदाम है, जिसका इस्तेमाल तुम्हारे पिता पूरे बिहार में दहशत फैलाने के लिए करना चाहते हैं। सनाया, वो सिर्फ एक बिजनेस नहीं, एक गुनाह है।"
सनाया ने कागज पढ़े और उसके पैर तले जमीन खिसक गई। उसके पिता ने उससे इतना बड़ा सच छिपाया था?
"मैं तुम्हें ये बताने आया हूं कि अगली बार जब हम आमने-सामने होंगे, तो शायद मेरे हाथ में हथकड़ी होगी और तुम्हारे हाथ में बंदूक। फैसला तुम्हें करना है कि तुम 'ठाकुरों की रानी' बनकर रहना चाहती हो या 'राजवीर की वो दोस्त' जिसे सच से प्यार था।"
पृथ्वी वहां से चला गया, सनाया को एक बड़े धर्मसंकट में छोड़कर। तभी अंधेरे से एक परछाईं बाहर निकली। वो भानु प्रताप का आदमी था, जिसने सब कुछ सुन लिया था।
अगले एपिसोड में: क्या सनाया अपने पिता के खिलाफ जाकर पृथ्वी का साथ देगी? और जब भानु प्रताप को पता चलेगा कि उसकी बेटी गद्दारी कर रही है, तो वो क्या कदम उठाएगा?