कृतिका :- कैसे चितां ना करु । अंकल ( अशोक ) आप उसे कल अपने घर लेकर आईएगा । हम आपकी बेटी को नही संभाल सकते । आदित्य ऐसे ही बहोत परेशान है उसे और परेशान मत किजिये ।
,आदित्य: - कृतिका ..!
कृतिका :- क्या कृतिका हा , क्या कृतिका । कब तक दुसरो के लिए जिओगे । अरे तुम भी इंसान हो भगवान नही , मैं जानती हूँ मोनिका से तुं कितना प्यार करते हो , पर कभी जताया ही नही , सबके सामने ऐसे दिखाया जैसे तुम्हें कोई फर्क ही नही पड़ता । मुझे लगा था जानवी समझदार होगी , वो तुम्हें समझेगी । पर नही उसने तो शादी की रात ही तुझसे तलाक मांग लिया ।
रमेश :- कृतिका , छोड़ चल ।
कृतिका:- नही रमेश बोलने दे मुझे । ये ( आदित्य ) खुद को क्या समझता है । मोनिका अपने बारे सोची और इससे अलग हो गया , जानवी अपने बारे मे सोची और इससे पहली रात को ही तलाक मांग लिया , हम दोनो सुरु से ही तुम पर. बोझ बव कर है , और ये अंकल ( अशोक ) इन्होने ने भी आज अपने बारे मे ही सोचा और फायदा इन्ही को हूआ पर इन सबके बिच पिस कौन रहा है , कौन पिस रहा है , हमारा दोस्त , हमारा भाई जैसा आदित्य ।
कृतिका की बात को सुनकर सब चुप थे कृतिका अपनी बात को जारी रखते हूए कहती है ।
कृतिका :- हमने कभी मां बाप को नही दैखा , पर आदित्य मे हमे सब कुछ नजर आता है , वो हमारा भगवान है , भाई है , दोस्त है । अंकल आपसे से रिक्वेस्ट है , आप इसे अब चेन से जिने दो , और इसे भी अपने बारे मे सौचने दो ।
अशोक :- बेटा मैं कभी नही चाहता के आदित्य के साथ कुछ भी बुरा हो ।
कृतिका :- आप कल आईए और अपनी बेटी को लेकर जाईए । चलो आदित्य ।
कृतिका आदित्य को लेकर वहां से चली जाती है । कार मे सभी सांत बैठे थे , रागिनी अपनी कार से आदित्य और उसके दोस्तो को उसके घर तक छोड़ देती है और कार लेकर रागिनी चली जाती है ।
सभी घर के अंदर जा ही रहे थे के तभी वहां पर जानवी की कार रुकती है जानवी कार से उतरती है और आदित्य को गुस्से से दैखकर घरके अंदर चली जाती है ।
आदित्य और उसके दोस्त भी घरके अंदर चले जाता है । इधर पुलिस स्टेशन पर इंस्पेक्टर ने विकास के पिछवाड़े पर बहोत डंडे बरसाये थे । विकास लगंड़ाते हूए आता है तो इंस्पेक्टर कहता है --
इंस्पेक्टर :- तुम्हें आज छोड़ रहा हूँ पर ध्यान रहे आगे से कभी भी शादी शुदा लड़की के साथ शादी करने मत जाना । और हां एक बात और है , हमे जानवी और उसके किडनेपिंग मे कुछ सबूत भी मिले है । हमे तुम पर भी शक हो रहा है , बस काली एक बार मिल जाए तो उसके अपने मुह से सब कबूल करवाऊंगा । और अगर तेरा नाम आया ना तो समझ लेना बच्चु । तुझे फिर मेरे से कोई नही बचा सकता ।
विकास ये सब सुनकर डर जाता है और कहता है --
विकास :- नही नही मैं किसी काली वाली को नही जानता हूँ । और ये जो आपने मुझपर टार्चर किया है ना ये अच्छा नही किया ।
इंस्पेक्टर विकास की बात पर गुस्सा होकर कहता है --
इंस्पेक्टर: - अरे कोई है , पकड़ इसे और जाल फिर से अंदर , लगता है मोरी बात इसे समझ मे नही आया है ।
इंस्पेक्टर की बात को सुनकर विकास डर जाता है और वहां से लंगड़ाते हूए भाग जाता है ।
दुसरे दिन सुबह आदित्य उठती है तो दैखता है के घर मे दो नए नौकर थे जिसमे से एक लड़का है और एक लड़की जो टेबल पर बहोत तरह के ब्रेकफास्ट लगा रहा था । तभी वहां पर तिरु , रमेश , रश्मि और कृतिका भी आ जाती है । दौ नए लोगो को दैखकर सभी हैरान थे तभी तिरु उन दोनो से पूछता है --
तिरु :- तुम लोग , तुम लोग कौन हो और किसने बुलाया है तुम्हें ।
तभी वहां जानवी आती है और कहती है --
जानवी :- इन्हें मैने बुलाया है , जब मुझे अपने ससुराल मे रहना ही है तो मैने अपने लिए अपने घर दौ लोगो बुला लिया , ये दोनो मेरे सारे काम कर देगें । पर ये सिर्फ मेरे लिए ही काम करेगें तुम लोग अपना दैख लेना । तुमलोगो को क्या लगा था के तुम लोग चाल बाजी करके मुझे यहां पर रख लोगे ताकी तुम लोगो का खर्चा भी मैं ही उठाउ ।
तभी कृतिका कहती है --
कृतिका :- हमे तुम्हारे पैसे की कोई जरुरत भी नही है । अगर तुम्हें कुछ चाहिए होगा तो हमे बोल सकती हो ।
जानवी :- तुम कौन होती हो मुझे ये सब कहने वाली । जब तक हमारा डायवोर्स नही हो जाता तब तक ये घर मेरा है और मैं अपने घर किसी गैर मोजुदगी और बोलना पंसद नही करती ।
रमेश :- तुम नई नई आई हो इसिलिए तुम्हें शायद पता नही होगा के हम सब मे एक ही है ।
जानवी :- पर अब नही होगा । मैं अपने घर मे किसी गैर को नही दैख सकती । हां कभी कभार चाय पिने आ जाना पर ये मत समझना के खाना पिना रहना भी यही करोगे , आज से अपना अलग ठिकाना दैख लेना ।
आदित्य: - ये लोग कही नही जा रहे है , अगर इनका रहना किसीको पंसद नही है तो वो यहां से खुशी खुशी जा सकता है ।
जानवी :- ये शादी रोकने से पहले सोचना चाहिये था । तुमने मुझे कानून दिखाया ना अब मैं भी तुम्हें कानुन दिखाउगां ।
अगर तुम लोगो के कारण मुझे या मेरे किसी भी लोगो को परेशानी हूई तो मैं महिला थाने पर तुम सबके नाम पर हरासमेंट का केस दर्द करा दूगीं ।
इतना बोलकर जानवी ब्रेकफास्ट करने बैठ जाती है और अपनो दोनो नोकरो से कहती है --
जानवी :- दैखो यहां पर जितने भी तुम्हें किसी से भी डरने की जरुरत नही है , अगर मैं घर पर ना भी रहूँ तो भी डरना नही और अगर किसीने कुछ कहा तो सिधा तुम मुझे कॉल करोगी और हां सबसे Important बात , तुम्हें किसीका भी बात सुनने की जरुरत नही है सिवाय मेरे ।
दोनो नौकर :- येस मेम ।
जानवी के इस हरकत से सभी हैरान थे पर आदित्य के चेहरे पर जरा सी भी सिकायत नही थी । तिरु आदित्य से कहता है --
तिरु :- ये क्या भांजे , इसका तो रुप ही बदल गया , पहले कितना सांत थी और अब रण चंडी बन गई है । अब हमारा क्या होगा ।
आदित्य: - कुछ नही होगा मामा । घर मेरा है और चलेगा भी मेरा । पर ये कुछ दिनो की मेहमान है करने दिजिए इसे इसकी मन की ।
तिरु :- पर भांजे , कुछ दिन नही 5 महिना और बाकी है ।
कृतिका :- आदित्य ये कुछ ज्यादा नही हो रहा है ।
आदित्य :- ओहो , तुम लोग इतना गुस्सा क्यों कर रही हो । वो तो यही चाहती है के हम उसके बातो से गुस्सा हो , पर हमे उसका उल्टा करना है । वो जो बोलेगी , जो चाहेगी , हम सब खुशी खुशी उसका बात मानेगें । दैखना वो खुद ये सब करना बंद कर देगी ।
आदित्य की बात पर सब राजी हो जाते है ।
2 दिन बाद शाम को जानवी घर पर कुछ ऑफिस के लोगो को बुलाया था और नया टेंडर मिलने की खुशी मे पार्टी कर रही थी , तभी आदित्य और बाकी सभी घर पर आए तो दैखा घर पर सौर हो रहा था , सभी सामान इधर उधर थे । जानवी आदित्य को दैखकर गाने का वाल्युम और बड़ा देती है आदित्य समझ जाता है के जानवी ये सब उसे परेशान करने के लिए कर रही है ।
आदित्य तिरु और रमेश से कहता है --
आदित्य :- कंश मामा ।
तिरु :- हां भांजे ।
आदित्य :- बहोत दिन हो गए हमने पार्टी नही किया ।
तिरु :- हां भांजे ।
आदित्य :- आज तो घर पर ही पार्टी हो रही है , तो क्यों ना हम भी थोड़ा मजा कर ले । ताकी बाहर का थकान और टेशन भी गायब हो जाए ।
तिरु :- पर भांजे , ऐसे रुखी सुखी पार्टी अच्छा नही लगेगा ।
आदित्य: - बस 10 मिनट समय दिजिए ।
आदित्य अपना फोन उठाता है और एक होटल पर फोन करता है और बहोत सारा खाना ऑडर करता है । होटल वाले कहता है----
" सर बस 15 मिनट मे खाना पहूँच जाएगा ।"
15 मिनट बाद खाना पहूँच जाता है , सभी पार्टी और म्यूजिक का मजा ले लेकर खाना खा रहे था , जानवी ये सब दैखकर सौचती है --
जानवी :- ये क्या , ये लोग परेशान होने के बजाए उल्टा मजे कर रहे है । उफ मैं भी कितना वेवकुफ हूँ , ये लोग कभी पार्टी किया ही नही होगा । इसिलिए इन्हें ये पार्टी का माहोल मिल गया और इंज्वाय करने लगे ।
इतना बोलकर जानवी म्युजिक बंद कर देती है और कहती है ---
जानवी :- ओके , पार्टी इज ओवर । आप सब लोग जाईए अब ।
सभी वहां से चले जाते है । तो आदित्य जान बूझकर जानवी को जलाने के लिए कहता है --
आदित्य :- कंश मामा ..!
तिरु :- येस भांजे ।
To be continue....425