हड्डियों से बने उस शहर के बीच खड़े अमन और रिया की साँसें बेकाबू थीं, दिल इतनी तेज़ धड़क रहा था कि लगता था अभी सीना फाड़कर बाहर आ जाएगा, चारों तरफ़ इंसानी खोपड़ियों से बने खंभे थे जिन पर सूखे खून की परत जमी हुई थी, हवा में सड़ांध और जलते मांस की गंध मिली हुई थी, जैसे यहाँ मौत रोज़ सांस लेती हो, शहर की गलियाँ पत्थर की नहीं बल्कि हड्डियों की थीं जो हर कदम पर चरमराती थीं, जैसे किसी ज़िंदा चीज़ पर चल रहे हों, रिया ने अमन का हाथ कसकर पकड़ लिया, उसकी उँगलियाँ ठंडी थीं और काँप रही थीं, सामने पत्थर के सिंहासन पर बैठा वह साया अब धीरे-धीरे साफ़ होने लगा, उसका शरीर इंसानी था लेकिन आकार असंभव रूप से बड़ा, चमड़ी जगह-जगह से फटी हुई, भीतर से काली नसें धड़कती हुई दिख रही थीं, उसकी आँखें पूरी तरह काली थीं, बिना पुतलियों के, जैसे दो गहरे गड्ढे जो आत्मा खींच लेते हों, उसके चारों तरफ़ दर्जनों राक्षस खड़े थे, कुछ के चेहरे अधजले थे, कुछ के हाथों में इंसानी हड्डियों से बने हथियार, कुछ की जीभ ज़मीन तक लटक रही थी और हर साँस के साथ टपकता हुआ खून नीचे गिर रहा था, राजा की भारी आवाज़ पूरे शहर में गूँजने लगी, उसने कहा यह जंगल रास्ता नहीं है, यह परीक्षा है, जो डर गया वह मर गया, जो बच गया वह हमारा हो गया, अमन ने हिम्मत जुटाकर चिल्लाया तुम लोग क्या हो, राजा हँसा, उसकी हँसी में हड्डियाँ काँप उठीं, उसने कहा हम वही हैं जो कभी तुम थे, लालच, घमंड और मज़ाक में चेतावनी को ठुकराने वाले, जंगल ने हमें खाया नहीं, हमें बदल दिया, तभी राजा ने हाथ उठाया और ज़मीन फटने लगी, नीचे से लोहे की जंजीरों जैसी काली बेलें निकलीं और रिया को जकड़ लिया, रिया चीखी, अमन ने उसे पकड़ने की कोशिश की लेकिन एक ज़ोरदार झटके से वह दूर जा गिरा, राजा बोला लड़की अभी ज़िंदा रहेगी, फैसला तुम्हारा है, या तो तुम जंगल का हिस्सा बनो या इसे अपने सामने मरते देखो, अमन की आँखों के सामने रोहन की चीख, पूजा और नेहा की मौत, साहिल की चीखें घूम गईं, उसके अंदर कुछ टूट गया, तभी शहर की गलियों से चीखों की आवाज़ें आने लगीं, राक्षस नए शिकारों को घसीटते हुए ला रहे थे, कुछ अब भी ज़िंदा थे, कोई मदद की भीख माँग रहा था, किसी की टाँग आधी कटी हुई थी, एक आदमी को उल्टा लटकाकर उसकी खाल धीरे-धीरे उतारी जा रही थी, उसकी चीखें हवा को चीर रही थीं लेकिन कोई रोकने वाला नहीं था, रिया की आँखों से आँसू बहते रहे, उसने अमन को देखा, जैसे आख़िरी बार देख रही हो, अमन ने दाँत भींच लिए, तभी राजा ने कहा रात पूरी होने से पहले फैसला करो, जैसे ही राजा ने इशारा किया, एक राक्षस ने एक ज़िंदा आदमी का सिर पत्थर पर दे मारा, खोपड़ी फट गई, दिमाग़ ज़मीन पर फैल गया, खून की धार बहने लगी और हड्डियों का शहर जैसे खुशी से काँप उठा, अमन के कानों में अब सिर्फ़ दिल की आवाज़ थी, तभी उसके भीतर कुछ अजीब सा जागा, जैसे डर के नीचे दबी कोई पुरानी ताकत, उसने चारों तरफ़ देखा और पास पड़ी एक टूटी हुई हड्डी उठाई, जैसे ही उसने उसे पकड़ा, उसकी हथेली जलने लगी, आँखों के सामने अजीब दृश्य आने लगे, वही बूढ़ा आदमी, वही ढाबा, वही चेतावनी, उसे समझ आ गया कि यह जंगल सिर्फ़ राक्षस नहीं बनाता, यह पहरेदार भी चुनता है, अमन ने ज़ोर से चिल्लाया और राजा की तरफ़ दौड़ पड़ा, राक्षस उस पर टूट पड़े लेकिन जैसे ही अमन ने पहले राक्षस को हड्डी से मारा, उसका शरीर धुएँ में बदल गया, रिया की जंजीरें ढीली पड़ गईं, अमन के हर वार के साथ जंगल चीख रहा था, राक्षस गिरते जा रहे थे, खून की बारिश होने लगी, राजा पहली बार खड़ा हुआ, उसका पूरा शरीर आग जैसी रोशनी से भर गया, उसने अमन को पकड़कर ज़मीन पर पटका, अमन की पसलियाँ चटक गईं, मुँह से खून निकला, राजा बोला तुम मेरे जैसे हो सकते थे, अमन हँसा, खून से सना चेहरा उठाकर बोला मैं इंसान रहना पसंद करूँगा, उसने आख़िरी ताकत जुटाकर राजा की छाती में हड्डी घोंप दी, राजा चीखा, उसकी चीख में पूरा जंगल काँप उठा, सिंहासन टूट गया, ज़मीन फटने लगी, राजा का शरीर सड़ने लगा, राक्षस आग में जलने लगे, शहर ढहने लगा, अमन ने रिया का हाथ पकड़ा और दोनों भागे, पीछे से चीखें, टूटती हड्डियाँ और जलते शरीरों की आवाज़ आती रही, जैसे-तैसे वे जंगल के किनारे पहुँचे, सुबह की हल्की रोशनी दिखी, रिया रोते हुए बाहर निकल आई, लेकिन अमन रुक गया, उसने रिया की तरफ़ देखा, उसकी आँखें अब वैसी नहीं थीं, उनमें कुछ काला तैर रहा था, उसने धीमी आवाज़ में कहा भागो, रिया ने पीछे मुड़कर देखा तो अमन की परछाईं इंसानी नहीं थी, उसकी पीठ से काले साए निकल रहे थे, जंगल शांत हो गया, जैसे संतुष्ट हो, रिया अकेली सड़क पर गिर पड़ी, रोती रही, पीछे जंगल में एक नई हलचल शुरू हो चुकी थी, अगली रात उसी रास्ते पर एक आदमी खड़ा था, चेहरे पर हल्की मुस्कान, आँखों में गहराई, वह नए यात्रियों से कह रहा था यही शॉर्टकट है, और जंगल फिर से जाग चुका था, पहले से ज़्यादा भूखा, पहले से ज़्यादा खूंखार।
(Part 2 समाप्त)