🌲 भुतहा पेड़ की कहानी
गाँवों में अक्सर कहा जाता है कि कुछ पेड़ सिर्फ छाया नहीं देते, बल्कि अपने भीतर रहस्य भी छुपाए रहते हैं। बरगद, पीपल या पुराने नीम के पेड़ को लोग रात में देखने से डरते हैं। यह कहानी भी ऐसे ही एक पेड़ की है, जो देखने में साधारण था, लेकिन उसके पास जाने वाले लोग कभी पहले जैसे नहीं लौटे।
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: गाँव और पेड़
बरुन गाँव के बाहर एक पुराना बरगद का पेड़ था। उसकी जड़ें ज़मीन से बाहर निकलकर साँप जैसी लिपटी हुई थीं। दिन में लोग वहाँ से गुजरते तो बस छाया देखते, लेकिन रात होते ही पेड़ का रूप बदल जाता।
गाँव के बुज़ुर्ग कहते थे कि उस पेड़ पर कोई आत्मा रहती है। कई बार रात में वहाँ से अजीब आवाज़ें आतीं—जैसे कोई फुसफुसा रहा हो, या किसी ने रोने की कोशिश की हो।
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चेतावनी
गाँव के पंडित ने सबको चेतावनी दी थी—
“जो भी रात में उस पेड़ के पास जाएगा, उसकी आत्मा कभी चैन नहीं पाएगी।”
लेकिन चेतावनी को अक्सर लोग मज़ाक समझते थे।
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: साहस या मूर्खता
एक बार गाँव के तीन लड़के—रवि, सुरेश और अमन—ने तय किया कि वे रात में उस पेड़ के पास जाकर देखेंगे कि आखिर वहाँ है क्या।
रात का समय था। चाँद बादलों में छिपा हुआ था। हवा में अजीब सी ठंडक थी। तीनों ने लालटेन उठाई और पेड़ की ओर चल पड़े।
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पेड़ का रहस्य
जैसे ही वे पेड़ के पास पहुँचे, लालटेन की लौ काँपने लगी। अचानक हवा तेज़ हो गई। पेड़ की शाखाएँ ऐसे हिलने लगीं जैसे किसी ने उन्हें पकड़कर झकझोरा हो।
रवि ने कहा, “देखो, यह तो बस हवा है।”
लेकिन तभी सुरेश ने देखा कि पेड़ की जड़ों के बीच कोई आकृति खड़ी है।
वह आकृति धीरे-धीरे बाहर आई। उसका चेहरा धुंधला था, आँखें लाल चमक रही थीं।
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: आत्मा का प्रकट होना
आकृति ने धीमी आवाज़ में कहा—
“क्यों आए हो मेरे पास? यह पेड़ मेरा घर है। जो भी यहाँ आता है, उसकी आत्मा मैं ले लेता हूँ।”
तीनों डर से काँपने लगे। अमन ने भागने की कोशिश की, लेकिन उसकी टाँगें जैसे ज़मीन में धँस गईं।
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: श्राप
आत्मा ने बताया कि वह एक साधु था, जिसे गाँव वालों ने धोखा देकर मार दिया था। उसकी लाश इसी पेड़ के नीचे दफनाई गई थी। तब से उसकी आत्मा वहीं भटक रही थी।
“जब तक कोई मेरी सच्चाई दुनिया को नहीं बताएगा, मैं हर आने वाले को श्राप दूँगा।”
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: भागने की कोशिश
रवि ने हिम्मत जुटाई और बोला, “हम तुम्हारी कहानी सबको बताएँगे।”
लेकिन आत्मा हँस पड़ी। उसकी हँसी इतनी डरावनी थी कि पेड़ की शाखाएँ टूटने लगीं।
सुरेश ने लालटेन फेंकी और भागने लगा। अमन किसी तरह ज़मीन से बाहर निकला। तीनों दौड़ते हुए गाँव पहुँचे।
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: गाँव में डर
अगले दिन गाँव में सबने देखा कि सुरेश का चेहरा बदल गया है। उसकी आँखें लाल थीं, और वह अजीब बातें करने लगा।
गाँव वाले समझ गए कि पेड़ की आत्मा ने उसे पकड़ लिया है।
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: समाधान की तलाश
गाँव के पंडित ने कहा कि उस आत्मा को शांति दिलाने के लिए उसी पेड़ के नीचे पूजा करनी होगी। लेकिन पूजा करने वाला व्यक्ति अपनी जान जोखिम में डालेगा।
रवि ने तय किया कि वह यह काम करेगा।
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रात को रवि अकेला पेड़ के पास गया। उसने मंत्र पढ़ना शुरू किया। पेड़ की शाखाएँ फिर से हिलने लगीं। आत्मा प्रकट हुई।
“तुम मुझे मुक्त नहीं कर सकते,” आत्मा गरजी।
लेकिन रवि ने मंत्र जारी रखा। धीरे-धीरे पेड़ की जड़ों से धुआँ निकलने लगा।
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मुक्ति
आत्मा चीखने लगी। उसकी आवाज़ पूरे गाँव में गूँज गई। अचानक पेड़ की शाखाएँ शांत हो गईं। आत्मा धीरे-धीरे धुंध में बदलकर गायब हो गई।
रवि बेहोश होकर ज़मीन पर गिर पड़ा।
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सुबह गाँव वाले वहाँ पहुँचे। पेड़ अब शांत था। उसकी शाखाएँ स्थिर थीं। लेकिन लोग अब भी डरते थे।
क्योंकि कहा जाता है कि आत्मा पूरी तरह मुक्त नहीं हुई। कभी-कभी रात में पेड़ से फिर वही फुसफुसाहट सुनाई देती है।
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बरुन गाँव का वह पेड़ आज भी खड़ा है। लोग दिन में उसके पास जाते हैं, लेकिन रात में कोई भी वहाँ जाने की हिम्मत नहीं करता।
कहानी यही सिखाती है कि हर पेड़ सिर्फ छाया नहीं देता—कुछ पेड़ अपने भीतर अंधेरे रहस्य भी छुपाए रहते हैं।
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