Bade Dil Wala - Part - 9 in Hindi Motivational Stories by Ratna Pandey books and stories PDF | बड़े दिल वाला - भाग - 9

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बड़े दिल वाला - भाग - 9

अभी तक आपने पढ़ा कि अनन्या वीर से मिलने गई लेकिन उसके उतावलेपन से नाराज़ होकर उसे समझाया कि वह अभी केवल अनुराग की गलतियाँ ढूँढने और सही समय पर उससे अलग होने की योजना बना रही है। घर लौटकर उसने अपने माता-पिता को बताया कि ससुराल में वह खुश नहीं है, परंतु कारण स्पष्ट नहीं किया। इससे उसके पिता योगेश को संदेह हुआ कि कहीं अनुराग में कोई कमी या समस्या तो नहीं है। अब इसके आगे-

रात को जब सब सो गए, तब वीर और अनन्या बहुत रात तक मैसेज पर एक दूसरे से जुड़े रहे, बातें करते रहे और अपने मिलन के सुंदर सपने बुनते रहे।

अनन्या ने कहा, "वीर, बस मैंने यहाँ रायता फ़ैलाना शुरू कर दिया है। अब तुम्हारी अधूरे प्यार को पूरा करने की ख़्वाहिश जल्दी ही पूरी हो जाएगी।"

"पर अनु, मुझे तो तुम गंगा जल जैसी पवित्र चाहिए, छूने मत देना उसे समझीं।"

"अरे हाँ बाबा, तुम चिंता मत करो। मैं तुम्हें जैसी छोड़ कर गई थी, वैसी ही मिलूंगी। वह मेरी मर्जी के बिना मुझे कभी हाथ नहीं लगाएगा।"

"अच्छा, नहीं लगाएगा या लगाने की औक़ात ही नहीं। तुम्हारे जैसी खूबसूरत बला को देखकर भला कौन-सा मर्द ऐसा होगा, जो पत्नी बनने के बाद भी छूने की कोशिश ना करे। मुझे लगता है यही सच होगा ...अरे लगता क्या है यही सच है अनु।"

अनन्या ने कहा, "छोड़ो ना वीर, हमें क्या करना है, बस किसी भी तरह छुटकारा मिल जाए।"

धीरे-धीरे सुबह की लालिमा ने धरती पर प्रवेश कर लिया। अनन्या देर तक सोती रही। सुबह के नौ बज रहे थे। अनन्या सोकर उठी ही थी कि उनके घर के दरवाजे पर दस्तक हुई। अनन्या दरवाज़ा खोलने गई। जैसे ही उसने दरवाज़ा खोला, सामने अनुराग खड़ा था। उसे देखते ही वह घबरा गई। तब तक संगीता भी वहाँ पर आ गई।

अपने दामाद को देखते ही खुश होते हुए उन्होंने कहा, "आओ अनुराग बेटा, आओ। अरे अनु, तू क्या दरवाजे पर खड़ी होकर रास्ता रोक रही है, अंदर आने दे अनुराग को।"

अनन्या होश में आई, उसने कहा, "मम्मी, मैं कहाँ मना कर रही हूँ।"

अनुराग ने कहा, "नमस्ते मम्मी जी।"

"नमस्ते बेटा।"

"मम्मी, रोज़ सुबह अनु को देखकर उठने की ऐसी आदत पड़ गई है कि आज वह नहीं दिखी तो बहुत बेचैनी होने लगी। पता नहीं कैसे मेरी कार को मैं इस तरफ़ ले आया। घर के सामने आने के बाद थोड़ा अजीब भी लगा कि सब क्या सोचेंगे; पर तभी मैंने सोचा सब अपने ही तो हैं, उनसे क्या शरमाना, क्या घबराना? बस इसीलिए अंदर आ गया।"

इसके बाद उसने अनन्या की तरफ़ देखते हुए पूछा, "अनु, घर कब आ रही हो? ऑफिस से आते समय मैं तुम्हें लेते हुए घर जाऊंगा। मम्मी ने एक छोटी-सी पार्टी रखी है, फिर पापा-मम्मी दोनों घूमने जा रहे हैं थोड़ा रिलैक्स होने। शादी में वे बहुत थक गए या फिर शायद हम दोनों अकेले समय बिता सकें इसलिए। शहर से बाहर जाने के लिए अभी मेरे पास छुट्टी नहीं है, वरना हम हनीमून पर चलते।"

अनुराग की बातों से अनन्या की पूरी योजना पर पानी फिर गया। संगीता के सामने हनीमून की बातें इतनी ख़ुशी से करके अनुराग ने यह तो सिद्ध कर ही दिया कि वह बिल्कुल ठीक है। उसके पापा-मम्मी उन्हें एकांत देने के लिए जा रहे हैं। यह बात भी अनु के प्लान के विरुद्ध ही थी। योगेश ने भी यह सारी बातें सुन लीं और उन्हें अपनी बेटी की नीयत पर शक होने लगा। वह सोच रहे थे कि कहीं यह अनु की वीर के जीवन में जाने के लिए बनाई हुई कोई चाल तो नहीं। इसलिए इसमें उन्हें सच्चाई का पुट ज़्यादा लग रहा था।

उन्होंने सामने आते हुए कहा, "अनुराग बेटा, तुम बिल्कुल ठीक कह रहे हो। शाम को अनु को लेकर जाना।"

अनुराग ने झुक कर योगेश के पांव छूते हुए कहा, "थैंक यू पापा, बस अभी मैं चलता हूँ, फिर शाम को मिलते हैं। अनु, तुम तैयार रहना।"

रत्ना पांडे, वडोदरा (गुजरात)
स्वरचित और मौलिक 
क्रमशः