the Last room of floor 7 part 2 shadow in Hindi Horror Stories by Yuvraj Chouhan books and stories PDF | The Last Room of Floor 7 - भाग 2

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The Last Room of Floor 7 - भाग 2

भाग 1 अनजान बुलावा जरूर देखे।

Vansh ने देखा कि सीढ़ियों के पास एक बड़ा सा ताला जड़ा हुआ है।
उसी पल उसके दिमाग़ में एक बात बिजली की तरह कौंध गई — Viju bhaiya की कही हुई।
जब वो hostel आया था, तब उन्होंने बताया था…
Room No. 710 में एक लड़के ने आत्महत्या कर ली थी।
उसके बाद से वहाँ अजीब-अजीब घटनाएँ होने लगीं,
और तभी से 7th floor बंद कर दिया गया।
यह याद आते ही Vansh का गला सूख गया।
वो अभी इस खयाल से उबर ही रहा था कि
अचानक उसके पीछे से ऐसा लगा जैसे कोई गुज़र गया हो।
उसने झट से पीछे मुड़कर देखा—
पर वहाँ कोई नहीं था।
710 नंबर कमरे का बोर्ड जंग खाया हुआ था,
कोनों में मोटे-मोटे मकड़ी के जाले लटके थे।
Room का gate आधा खुला हुआ था,
मानो किसी ने जानबूझकर उसे बुलाया हो।
उसी पल 7th floor की lights blink करने लगीं।
पूरी मंज़िल अंधेरे में डूबी हुई थी—
सिर्फ Room 710 की light जल रही थी।
कोई और रास्ता नहीं था।
डरते-डरते Vansh अंदर गया।
जैसे ही उसने कमरे में पहला कदम रखा,
तेज़ ठंडी हवा का झोंका आया
और एक पुराने tape recorder से अचानक गाना बजने लगा—
ऐसा लगा जैसे कोई उसका स्वागत कर रहा हो।
अचानक धड़ाम!
Gate अपने-आप बंद हो गया।
Lights तेज़ी से blink करने लगीं…
फिर एक झटके में सब normal।
उसी वक्त Vansh की नज़र कमरे के एक अंधेरे कोने पर पड़ी।
वहाँ…
एक परछाईं खड़ी थी।
उसके बाल बिखरे हुए थे,
चेहरे को पूरी तरह ढँक रहे थे।
और ऐसा लग रहा था मानो
वो बिना पलक झपकाए सिर्फ Vansh को ही घूर रही हो।
Vansh डर के मारे पीछे हटने लगा।
उसने घबराकर पलटकर देखा—
पलंग पर काई और धूल जम चुकी थी,
दीवारें उखड़ी हुई थीं,
पूरा कमरा तहस-नहस था।
लेकिन एक चीज़ ने उसे रोक दिया।
Study table और chair।
इतनी गंदगी के बीच भी
वो दोनों बिल्कुल साफ-सुथरे थे—
जैसे कोई अब भी उन्हें संभाल कर रखता हो,
जैसे कोई आज भी वहाँ बैठकर पढ़ता हो।
Vansh का दिमाग़ सुन्न हो गया।
ये इतने साफ क्यों हैं?
और किसके लिए?
वो फिर उसी ओर मुड़ा जहाँ परछाईं खड़ी थी।
वो अब भी वहीं थी।
और अब…
ऐसा लग रहा था जैसे
वो Vansh का इंतज़ार ही कर रही हो।
तेज़ हवा चलने लगी।
अजीब-अजीब आवाज़ें गूँजने लगीं—
मानो कई लोग एक साथ कुछ फुसफुसा रहे हों।
तभी Vansh ने देखा…
वो परछाईं उसकी ओर बढ़ रही थी।
उसके हाथ-पाँव ठंडे पड़ गए।
काँपती आवाज़ में वो बोला—
“दूर रहो मुझसे… तुम कौन हो?
क्या चाहते हो?”
कमरे में गूँजती हुई एक आवाज़ आई—
“आ ही गए तुम…
अब मैं तुम्हें भी नहीं छोड़ूँगा।
सब मरेंगे…
सब मेरे हाथों मरेंगे।”
कभी ज़ोर-ज़ोर से हँसी,
तो कभी सिसकियों में बदल जाती आवाज़।
Vansh ने रोते हुए कहा—
“मैंने कुछ नहीं किया…
मुझे छोड़ दो।”
पर जवाब आया—
“तुम सब की गलती है।
तुम सब एक जैसे हो।
Pressure डालते हो,
judge करते हो,
हँसते हो किसी की नाकामी पर।
ना जीने देते हो,
ना मरने के बाद चैन।”
“सबको मार दूँगा…
किसी को नहीं छोड़ूँगा।”
Intermission
Vansh (emotionally):
“तुम्हारे साथ क्या हुआ था?
तुम हो कौन?”
परछाईं (भावुक आवाज़ में):
“मेरा नाम… Mehul है।”
(कुछ पल की खामोशी)
“मैं बड़े सपने लेकर यहाँ आया था।
पढ़ाई में अच्छा था,
घरवालों के कहने पर
UPSC की तैयारी शुरू की।
जब मैं यहाँ पहुँचा,
तो देखा—
मेरे जैसे बहुत लोग थे।
कोई बड़े घर से,
कोई मेरे जैसे middle-class से।
पर एक बात common थी—
Pressure।
कोई दो साल से,
तो कोई पाँच-छह साल से
खुद को घिस रहा था…”
(To be continued…)

Written by- 
Yuvraj Singh Chouhan