Whisper in The Dark - 7 in Hindi Thriller by priyanka jha books and stories PDF | Whisper in The Dark - 7

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Whisper in The Dark - 7

अब आगे।।
फ्लैशबैक।।
नियति अपने पेरेंट्स के साथ वापस शिमला आ चुकी थी,,उन्हें शिमला पहुंचते पहुंचते शाम हो चुकी थी,,
नियति अपने कमरे में थी,,उसने अपने कपड़े चेंज कर लिए थे,वो इस वक्त ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़ी थी,,उसके हाथ में वहीं वेलवेट का बॉक्स था जो रिहान ने उसे दिया था,
उसने उस बॉक्स को ओपन किया,उस बॉक्स में एक सुंदर सा हार्ट के शेप का पेंडेंट था,,जो लैवेंडर कलर का था,,पेंडेंट देखकर नियति के चेहरे पर एक मुस्कान आ गई,,
उसने तुरंत उस पेंडेंट को बॉक्स से निकाला ओर उसे पहन कर देखने लगी,,वहीं अचानक उसकी नजर उस बॉक्स में रखे एक नोट पर गई,,उसने पेंडेंट वहीं रखा ओर उस नोट को खोला,,
डियर किट्टू,
आईं हॉप तुम्हे ये गिफ्ट पसंद आया होगा,,वैसे मुझे नहीं पता कि तुम्हे क्या पसंद है,,वेल ये मेरी तरफ से पहला गिफ्ट है,तुम्हे,, मुझे नहीं पता कि अब हम कब मिलेंगे पर जब मिलेंगे,,तब बहुत कुछ कहना है 
आई हॉप हम जल्दी ही किसी खूबसूरत और यादगार जगह पर मिलेंगे।।
बाय,अपना ध्यान रखना 
योर फ्रेंड
रिहान 
वहीं ये नोट पर नियति के चेहरे पर जो मुस्कान थी,उसने धीरे धीरे शर्मीली मुस्कान की जगह बना ली थी,,ओर उसके गाल भी हल्के लाल हो गए थे।।।
उसने वो नोट हल्का सा अपने होठों से टच किया,,ओर खुद से कहा,, आई हॉप हम जल्दी ही मिलेंगे,, 
कहकर उसने वो नोट अपनी डायरी में रख दिया,,

अगले दिन।।।
देवांश इस वक्त पुलिस स्टेशन में थे,,वहीं उनके साथी इंस्पेक्टर ने कहा,,सर उस बॉडी के पास से जो वॉच मिली है,वो काफी एक्सपेंसिव ब्रांड की है,,मुझे नहीं लगता कि सब ऐसी वॉच अफोर्ड कर सकते हैं,,ओर शायद इस ब्रांड के ज्यादा स्टोर्स भी शहर में नहीं होंगे,,
इस पर देवांश ने कहा,,हा शायद तुम सही कह रहे हो,,
खैर में इस मामले को ऐसे ही नहीं छोड़ सकता हु।

दूसरी तरफ स्कूल में।।।
रिवांश इस वक्त स्कूल के पीछे वाले ग्राउंड में बैठा था,,जहां कोई भी आया जाया नहीं करता था,,
रिवांश इस वक्त वहीं एक पत्थर पर बैठा सिगरेट पी रहा था,,
अचानक उसकी नजर अपने हाथ की कलाई पर गई,,
जहां पर उसकी एक्सपेंसिव वॉच नहीं थी,,
अचानक उसके पास एक लड़का आया,
उस लड़के ने रिवांश के तरफ देखते हुए कहा,अब तू क्या करेगा,,तेरी घड़ी नियति के डैड के हाथों लग गई हैं,,
वहीं रिवांश ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं की,,उसने कहा,तो
तो,,तुझे कोई फर्क पड़ रहा है,अगर उन्हें तेरे बारे में पता चल गया,,वो तुझे मर्डर के इल्ज़ाम में जेल में डलवा देंगे।।ओर नियति वो तुझ से नफरत करेगी,,
वहीं रिवांश ने उसकी तरफ देखते हुए कहा,,तुझे ये किसने कहा,कि मुझे नियति के मुझ से नफरत करने से या उसके मेरे लिए किसी भी भावना से मुझे फर्क पड़ता है,,मेरे लिए बस उसे अपने पास रखना मैटर करता है,,उसके लिए चाए मुझे कुछ भी क्यों न करना पड़े।।
ओर रही बात मिस्टर शर्मा की तो 
चेहरे पर एक इविल स्माइल के साथ ,,बेशक उन्हें पता चल जाए,,,
उन्हें तो में अपने हिसाब से हैंडल कर लूंगा,,
वहीं उसकी ऐसी बाते सुनकर उस लड़के के सर पर पसीने की हल्की बूंद उभर आई थी।
वो लड़का तुरंत वहां से चला गया।।
वहीं रिवांश आराम से वहां बैठा सिगरेट पी रहा था।।

रात के समय ।।
पुलिस स्टेशन।।।
देवांश इस वक्त अपने केबिन में चेयर पर बैठे थे,,वहीं विक्रम जो उनके साथ काम करता है उसकी बातों को सोच रहे थे।।
उनके हाथ में वहीं घड़ी थी,, ,,वो उस घड़ी को देख ही रहे थे कि तभी उनकी नजर उस वॉच के बैंड पर गई जिस पर आर का इनिशियल बना हुआ था,,
जिसे देखकर उनकी आंखों में चमक आ गई,,इसका मतलब उसका नाम आर से शुरू होता है,,
अचानक उनका फोन रिंग करने लगा,,उन्होंने स्क्रीन पर देखा तो उनकी वाइफ का कॉल आ रहा था,,
उन्होंने तुरंत कॉल पिक किया,,
हेलो,आप कब घर आ रहे है  सामने से आवाज आई,
दिशा,मुझे आने में थोड़ा समय लगेगा,,देवांश ने कहा।।
प्लीज आप जल्दी घर आ जाईए,,मुझे घबराहट हो रही है,,दिशा ने चिंतित स्वर में कहा।।
दिशा,घबराओ मत,,ओर प्लीज अपनी बीपी की मेडिसिन ले लो,,में जल्दी ही घर आ जाऊंगा।।
देवांश ने उन्हें हिम्मत देते हुए कहा,,
ठीक है,अपना ख्याल रखिएगा,,,दिशा ने कहा।।
कुछ समय बाद देवांश पुलिस स्टेशन से निकल कर सीधा अपने जीप में बैठे ओर वहां से चले गए।
वो एक सुनसान पर अपनी कार चला रहे थे,,अचानक उन्होंने अपनी कार रोक दी,,
उन्होंने सामने देखा तो कोई शक्श जमीन पर पड़ा हुआ था,
ये कौन है,देवांश ने कहा,ओर अपनी कार से वो बाहर आए,,
उन्होंने उसके पास जाकर कहा,,कौन हो तुम,
कहकर वो उसके पास बैठ गए और उसका चेहरा अपने तरफ किया,,
उस शक्श को देखकर वो चोक गए क्यूंकि यह कोई ओर नहीं बल्कि रिवांश था,जिसके सर पर चोट लगी थी।
वहीं देवांश नियति के वजह से रिवांश को जानते थे इसलिए उन्होंने तुरंत उसका सर अपने गोद में रखा ओर कहा,
रिवांश,बेटा उठो,,
वहीं रिवांश ने अपनी आँखें खोली,ओर कहा,अंकल आप।
बेटा तुम इस समय यहां पर,ओर तुम्हारी ये हालत किसने की,,
अंकल ,रिवांश ने अपनी भारी आवाज में कहा,,
वहीं देवांश ने उसकी हालत देख ये सब छोड़ कहा,चलो पहले तुम मेरे साथ हॉस्पिटल चलो,,कहकर उन्होंने रिवांश को सहारा दिया,,ओर उसे अपनी जीप में बैठाया।।
ओर उन्होंने अपनी जीप स्टार्ट की,,वो अभी थोड़ी दूर ही गए थे
की अचानक रिवांश ने स्टेयरिंग वील को अपनी ओर मोड़ लिया,,
वहीं उसकी इस हरकत पर देवांश ने कहा,,ये क्या कर रहे हो तुम।
वहीं उनकी बात पर रिवांश ने इविल स्माइल के साथ कहा,,आपको इस दुनिया से विदा।।
जब तक देवांश कुछ सोच पाते।। इतनी देर में
रिवांश ने अपनी पेंट की पॉकेट से नाइफ निकाला,,ओर उनकी गर्दन में घुसा दिया।।
ओर उनकी चीख कोई सुन न पाए इसलिए उसने एक रुमाल उनके मुंह में घुसा दिया,,
वहीं खून बहने से कुछ ही पल में उनकी आँखें बंद हो गई,,
वहीं रिवांश ने तुरंत उनकी पॉकेट से वो वॉच निकाल ली,,
ओर सामने देखा जहां एक बड़ा सा पत्थर था,,
उसने तुरंत जीप का गेट खोला ओर उसमें से कूद गया,,
वहीं देवांश की जीप सीधा उस पत्थर से टकराई,,जिससे कार का एक्सीडेंट हो गया,,ओर कार में आग लग गई,,
वहीं जिसे देख रिवांश के चेहरे पर एक तिरछी मुस्कान आ गई,,,
अगले दिन,,,
नियति का घर।।।।

दिशा अपने पति देवांश का इंतेज़ार करते करते वहीं सोफे पर सो गई थी,,
वहीं नियति जब नीचे आई,तो उसने देखा कि उसके पापा अभी तक नहीं आए है,उसने तुरंत अपनी मम्मा को जगाया,,
वहीं अपनी बेटी की आवाज सुन दिशा उठी,उन्होंने नियति कहा,क्या हुआ,,
मम्मी देखो न पापा अभी तक नहीं आए है,,नियति ने उदास होते हुए कहा,,
अचानक उनके गेट पर नॉक किया,,
शायद पापा होंगे,,कहकर नियति ने तुरंत जाकर गेट खोला,
वहीं सामने 2 पुलिस ऑफिसर खड़े थे,,
उन्होंने नियति को देखकर कहा,,बेटा आपकी मम्मी कहा है,,
नियति कुछ कहती उससे पहले उसकी मम्मा वहां आ गई।।
कहिए क्या हुआ,,दिशा ने कहा।
वहीं उन दोनों ऑफिसर्स ने एक दूसरे को देखा।।
वहीं कुछ समय बाद 
नियति ओर दिशा इस वक्त मार्गे में थे,,
वहीं नियति की मम्मा बस रोए जा रही थी,,वहीं नियति भी खड़ी रो रही थी।।
वहीं उनके पास खड़े पुलिस वाले ने कहा,कल रात  उनकी जीप का बहुत भयानक एक्सीडेंट हुआ था,जिस वजह से मौके पर ही उनकी मौत हो गई,,
वहीं यह सुन कर नियति की मम्मा दिशा सामने अपने पति की बॉडी देखकर पागलों की तरह रोने लग गई,,
वहीं अचानक वो रोते रोते वहीं गिर कर बेहोश हो गई,,
वहीं अपनी मम्मा को बेहोश देखकर नियति ने चीखकर कहा,,मम्मी,कहकर वो उनके पास आई,,
मम्मा प्लीज उठो न,प्लीज मम्मा,,कहकर वो रोने लग गई
वहीं एक डॉक्टर उनके पास आई,उसने कहा,,बेटा संभालो खुद को।।
कहकर उन्होंने उसे गले से लगा लिया।।
वहीं एक डॉक्टर ने दिशा की पल्स चेक की,,वहीं डॉक्टर ने  अपने सामने उस लेडी डॉक्टर को देखकर सर न में हिला दिया,,
जिसे देख उस डॉक्टर ने अपनी आंखे बंद कर ली।।। 
चार साल बाद।। 
नियति इस वक्त एक रूम में मौजूद थी,,जहां एक साइकाइट्रिस्ट उसका इलाज कर रहा था,,वहीं नियति चुपचाप उसके सवालों का जवाब दे रही थी,,,
डॉक्टर ने कहा, नियति तुम्हे सबसे ज्यादा किस चीज से डर लगता है,,
नियति जो अब 18 साल की हो चुकी थी,उसने धीमी आवाज में कहा,,
आग से।।।
प्रेजेंट।।।
अचानक नियति की आंख खुली,,उसकी आँखें इस वक्त लाल रखी थी,,
उसने चिल्लाते हुए कहा,,मम्मी,पापा।
कहकर वो रोने लग गई।।।।।।