Car के अंदर, रात का समय, हल्की हल्की हवा चल रही है।
Kabir ड्राइव कर रहा है। Karan अब भी स्टेयरिंग पर है, और Shreya पीछे Kabir की बाँहों में सिर रखकर सो चुकी है।
Shreya का चेहरा बहुत मासूम लग रहा है। Kabir उसकी पीठ को हल्के-हल्के सहला रहा है ताकि उसे आराम मिले।
Kabir (धीरे से, Karan से) बोला -
भैया… काफी देर हो गई आपको ड्राइव करते हुए। आप थोड़ा पीछे आ जाइए… मैं चला लेता हूँ।
Karan, हल्का सा खिंचाव महसूस करते हुए—
हां…सही कह रहा है तू। काफी देर हो गई।
Kabir कार एक तरफ रोकता है। दोनों सीटें बदलने लगते हैं।
अब Kabir फ्रंट सीट पर है और Karan पीछे आता है
जैसे ही Karan पीछे वाली सीट पर आता है, वह Shreya को Kabir की बाहों में गहरी नींद में देखता है।
उसके चेहरे पर एक हल्की थकान और मासूमियत है।
Karan, धीरे से मुस्कुराते हुए बोली -
सो गई क्या?
Kabir, रियर मिरर में देखते हुए बोला -
हां… बहुत थक गई थी। और ठंड भी लग रही थी।
Karan धीरे‐धीरे बैठता है और बहुत कोमलता से Shreya को अपने पास खींच लेता है, ताकि उसे आराम मिले।
Shreya, बिना जागे, अपने आप Karan की छाती पर सिर रख देती है, जैसे उसका शरीर दोनों पर खुद को भरोसे से छोड़ता हो।
Kabir (मुस्कुराते हुए, मजाक में) बोला -
बस… अभी कुछ देर पहले मेरी बाहों में थी… । अब आपकी में आ गई। Competition चल रहा है क्या?
Karan हँसते हुए बोला -
अरे नहीं रे… ये हम दोनों की ही तो है। जिसकी गोद में आए, वो lucky।
Kabir मुस्कुराकर फिर सड़क पर ध्यान देता है।
कार फिर से चल पड़ती है।
Karan Shreya को देखते हुए
Karan धीरे से Shreya के बाल कान के पीछे करता है और उसकी नाक को हल्के से छुता है।
Karan (धीरे से फुसफुसाते हुए) बोला -
सो जाओ… हम दोनों यहीं हैं।
Shreya हल्का सा मुस्कुराती है। शायद सपना देख रही थी, लेकिन चेहरे पर सुकून था।
Kabir अब भी पीछे मुड़-मुड़ कर Shreya और Karan को देख रहा है।
उसके चेहरे पर भी संतोष की मुस्कान है।
Kabir मन में बोला -
कितनी आसानी से दोनों को अपना लेती है…।
और हम दोनों इसे इतना प्यार करते हैं।
Car की अंदरूनी हवा, शांत संगीत और प्यार की गरमाहट…।
तीनों एक perfect आराम और भरोसे के पल में थे।
होटल का कमरा, रात का समय
कार होटल के बाहर रुकती है। बाहर हल्की ठंडी हवा और सड़क पर हल्की लाइटें जल रही हैं।
Shreya अब भी Karan की गोद में गहरी नींद में है।
Kabir (धीरे से, दरवाज़ा खोलते हुए बोला -
भैया… मैं इसे गोद में उठा लेता हूं। जग जाएगी तो फिर परेशान होगी।
Karan सिर हिलाता है।
Kabir आगे बढ़कर बहुत नरमी से Shreya को अपनी बाँहों में उठा लेता है।
उसका सिर Kabir के कंधे पर टिक जाता है। Shreya ने हल्की सी सिसकारी ली—पर नींद नहीं टूटी।
होटल के अंदर
दोनों भाई धीरे-धीरे कदम रखते हुए कमरे में आते हैं।
Shreya की नींद न टूट जाए, इसलिए एक भी आवाज़ नहीं करते।
Kabir उसे बेड तक लाता है और बहुत प्यार से लेटा देता है।
Kabir धीरे से उसके माथे से बाल हटाता है।
Karan उसके पैरों पर कंबल ठीक करता है।
Kabir (धीरे से, मुस्कुराते हुए) बोला -
कितनी बच्ची जैसी है …थोड़ी सी ठंड लगती है, थोड़ी सी परेशान होती है बस....हम दोनों की गोद में सिमट जाती है ।
Karan उसकी तरफ देखते हुए बोला -
हां… और हम दोनों को spoil कर रही है।
Kabir हल्का हँसता है।
दोनों भाई उसके दोनों तरफ लेट जाते हैं
Shreya बीच में, और दोनों भाई उसकी तरफ मुंह करके।
Kabir अपनी कोहनी पर टिककर उसे देख रहा है।
Karan भी उसके चेहरे को गौर से देख रहा है।
Karan (धीरे से फुसफुसाकर) बोला -
तू notice करता है…जब ताकि हुई होती है, तो बच्चों जैसी हो जाती है। देखा कैसे पकड़ के सो रही थी
Kabir, मजाक में बोला -
और मुझे छोड़कर आपकी बाहों में आ गई थी!
Karan मुस्कुराकर बोला -
आज… आज की turn मेरी थी।
दोनों हँसी दबाते हैं ताकि Shreya जाग न जाए।
Kabir (धीरे से) बोला -
भगवान का शुक्र है कि ये हम दोनों के साथ खुश है...ये कम ही होता है कि किसी एक को ....दो लोग प्यार से संभालें।
Karan सहमति में सिर हिलाता है।
उनकी आवाज़ें बहुत धीमी हैं, जैसे हवा में घुल रही हों।
Kabir धीरे से Shreya के हाथ पर हाथ रखता है।
Karan दूसरी तरफ से उसके माथे को हल्के से सहलाता है।
Kabir (धीरे से) बोला -
थक गई होगी… सुबह से काम,फिर हम दोनों की बकबक…।
Karan बोला -
कल इसे मस्त घुमाएंगे। पर आज…इसे आराम करने देते हैं।
दोनों कुछ पल चुपचाप उसे देखते रहते हैं।
Shreya की साँसे हल्की-हल्की चल रही हों… बिल्कुल मासूम।
कमरे में dim light जल रही है।
Shreya गहरी नींद में है।
और दोनों पति उसके दोनों तरफ लेटकर, उसकी साँसों की शांति सुनते हुए बातें करते हैं।
रात के दो बजे
कमरा शांत है। हल्की पीली लाइट जल रही है।
Karan और Kabir तो सो चुके हैं, पर Shreya की साँसें अचानक तेज़ होने लगती हैं।
वो करवट बदलती है… उसके माथे पर पसीना है।
कुछ देर बाद—
Shreya (धीरे-धीरे कराहते हुए) बोला -
उह्ह… सर घुम रहा है…।
उसकी आवाज़ सुनकर Karan की नींद खुल जाती है।
Karan फट से उठता है
Karan बोला -
"Kabir… Kabir उठ! Shreya को कुछ हो रहा है।
Kabir भी घबरा कर उठता है।
Kabir आगे झुककर उसका माथा छूता है।
Kabir (चौंककर) बोला -
भाई… तेज़ बुखार है…बिल्कुल तप रही है।
Karan के चेहरे पर घबराहट आ जाती है।
Karan (Shreya का हाथ पकड़ते हुए) बोला -
Shreya… आँखें खोलो… क्या हुआ baby? कहीं दर्द हो रहा है?
Shreya धीमी आवाज़ में बोली -
सर… बहुत भारी लग रहा है… ठंड भी…।
Kabir तुरंत कंबल हटाता है और उसे अपनी तरफ खींचकर पकड़ लेता है।
Kabir बोला -
अरे ये तो कांप रही है…भैया warm water ले आओ। जल्दी!
Karan बाथरूम में भागता है
वो गर्म पानी, तौलिया, और दवा लेकर आता है।
Kabir Shreya को गोद में लिए बैठा है, जैसे कोई बीमार बच्ची हो।
Kabir (बहुत नरमी से) बोला -
Shreya…हम दिनों यहीं हैं…कुछ नहीं होगा आराम से…।
Karan तौलिया गर्म पानी में भिगोकर निचोड़ता है और Kabir के हाथ पर रखकर बोला -
Forehead पर रख… fever कम होगा।
Kabir तौलिया Shreya के माथे पर रखता है।
Shreya आँखें बंद करके हल्की सिसकी लेती है।
Shreya (कमज़ोर आवाज़ में) बोली -
Kabir ji…मत जाइए… please…”
Kabir के चेहरे पर नरमी आ जाती है।
वो उसका हाथ पकड़ लेता है।
Kabir (धीरे से) बोला -
मैं कहीं नहीं जा रहा है … बस यहीं हूं।
Karan उसके दूसरी तरफ बैठकर पीठ सहलाता है।
Karan बोला -
ऐसे ही sensitive हो ना तुम… हल्का सा climate change और बस…
Shreya गुस्से से आँखें खोलकर बोली -
तो मैं क्या करूं… मेरी body ही ऐसी है।
Kabir मुस्कुराकर बोला -
अच्छा babu… गुस्सा मत करो… बस ठीक हो जाओ।
दोनों भाई मिलकर उसकी पूरी देखभाल करते हैं
Kabir उसकी पीठ और सिर को सहला रहा है
Karan उसका तापमान चेक कर रहा है
Kabir पानी पिलाता है
Karan दवा देता है
Shreya कभी Karan की तरफ लिपट जाती है, कभी Kabir के कंधे पर सिर रख देती है।
दोनों एक-दूसरे की तरफ देखते हैं।
Karan (धीमे से) बोला -
भगवान करें इसका दर्द हम दोनों में बांट दें...बस इसे तकलीफ ना दें।
कुछ देर बाद दवा असर दिखाती है।
Shreya Kabir के सीने पर सिर रखकर सो जाती है।
उसकी साँसे सामान्य होने लगती हैं।
Karan धीरे से चादर ठीक करता है।
Kabir (फुसफुसाकर) बोला -
यार…ये लड़की हम दोनों की जान है
Karan बोला -
हां…इसकी मुस्कान ही तो हमारी life है।
दोनों उसके बीच में बैठकर पूरी रात उसकी देखभाल करते रहते हैं।
कभी Kabir उसके माथे पर पट्टी रखता है…
कभी Karan उसका हाथ पकड़कर उसे शांत करता है।