Back for Revenge - 3 in Hindi Drama by Radhika books and stories PDF | Back for Revenge - 3

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Back for Revenge - 3

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बेटी होने की खबर सुनकर दोनों ने हैरानी से एक दूसरे को देखा फिर दादी मां कि तरफ, और अचानक जोर से चिल्ला उठें।

"मैं पापा बन गया! और भगवान का लाख लाख शुक्र है कि मुझे दुनिया का सबसे खूबसूरत रत्न दे दिया।" जिन्दल साहब ने खुश होते हुए कहा और उनके आंखों में पानी आ गया उनकी खुशी देखकर सबके आंखों में आंसू आ गये।

"आखिरकार हमारी फैमिली का श्राप टूट ही गया। आज बरसों बाद इस घर में लड़की कि किलकारी गूंजी हैं।" दादी मां ने कहा।

"हां मां, भगवान ने भले ही देर से हमें संतान सुख दिया लेकिन अब उनसे कोई शिकायत नहीं रहीं।" जिन्दल साहब ने अपनी बेटी को गोद में लेकर कहा। 

"सच कहूं तो आज जिंदल फैमिली से ज्यादा खुशनसीब कोई नहीं होगा, बरसों का श्राप जो टूट गया है।" दादी मां ने कहा। उनकी आंखों में आंसू थे।

"ओह! यह कितनी प्यारी है।" सायसा ने कहा और उसे प्यार करने लगी।

 सब बच्ची की मां यानी सुनंदा जिन्दल से मिलने आ गये। यह रूम घर पर ही था जो हॉस्पिटल के जैसा डिजाइन किया गया था क्योंकि सुनंदा को पहले से ही हॉस्पिटल पसंद नहीं था और जिन्दल साहब तो ठहरे बीवी के भक्त। अपनी बीवी को खुश करने के लिए घर पर ही हॉस्पिटल लिवा लायें। इस वक्त यहां अलग-अलग देशों के सबसे प्रसिद्ध डॉक्टर मौजूद थे।

"दीदी! तुम ठीक हो न? और कंग्रॅचुलेशन फाइनली मुझे मासी बनने का मौका मिल ही गया। सच दीदी आज मैं आप दोनों के लिए बहुत खुश हूं।" शायसा ने खुश होते हुए कहा और सुनंदा मुस्कुरा दी।

आपको पता है! जब डिलीवरी हो रहा था तब जीजू ने तो घूम घूम कर मुझे चक्कर दिला दिया था। अगर आप उन्हें ऐसा करते हुए देखते तो आप भी बिना मुस्कुराएं नहीं रहती। सायसा ने कहा। 

"अब मुझे embarrass फील मत करवाओ।" जिन्दल साहब ने अपनी बीवी को गले लगाते हुए कहा।

"अच्छा ऐसा हुआ था क्या? मुझे भी देखना था कि ये किस तरह अपने बच्चे का इंतजार कर रहे थे। मुझे उनकी आंखों की चमक देखना था।" सुनंदा ने कहा।

"नहीं सुनंदा, ऐसा मत कहों, वैसे भी तुम दोनों ने अपने शादी के सोलह साल बाद अपने बच्चे का चेहरा देखा है। अब तुम्हारा इंतज़ार खत्म हो गया है।" दादी मां ने कहा तो सायसा ने उन्हें गले लगा लिया। 

"मां आप इमोशनल मत करो, देखो तो हम कब से रो रहें हैं।" सायसा ने कहा।

"हां जानती हूं कि तुम रोती हुई अच्छी नहीं लगती लेकिन मैं हमेशा ही तुझे रुलाउगीं ताकि हमारी फैमिली खुश रहे और तुम खुशी कि आंसू रोती रहो।" दादी मां ने कहा तो सब मुस्कुरा दिए।

         सुनंदा ने अपने बेटी की ओर नजर डाला। पालने में मखमली कपड़े में लिपटी हुई एक अबोध शिशु इस वक्त गहरी नींद में थी। 

"चलो हमारे घर के तीन बदमाशों को आखिरकार बहन मिल ही गई।" सुनंदा ने मुस्कुरा कर कहा तो सभी खुश हो गये।

दरअसल जिन्दल फैमिली में पिछले पांच पीढ़ियों से कोई लड़की का जन्म नहीं हुआ था इसलिए इस बार लड़की होने पर उनकी खुशियां दुगुनी हो गई थी क्योंकि उनके परिवार का श्राप टूट गया था।

"यह बच्ची कितनी भाग्यशाली हैं हमारे लिए, यह नहीं जानती कि हम कितने खुश हैं इसे पाकर।" दादी मां ने कहा ।

"हां मां, लेकिन दुनिया में आज भी कई लोग हैं जिन्हें बेटियां बोझ लगती हैं। पर हम अपनी नन्ही परी को कभी बोझ नहीं समझेंगे क्योंकि यह हमारी लकी चार्म हैं।" जिन्दल साहब ने कहा और तभी जिंदल साहब ने अपने पौकेट में से पैसे निकाले और सारे नौकरों में बांट दिये।  

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      नन्ही नित्या ने एक गहरी नींद के बाद अपनी आंखें खोली और खुद को जिंदा पाकर उसने एक गहरी सांस ली। उसने उठने की कोशिश कि मगर इसके लिए वह अभी बहुत छोटी थी। फिलहाल तो उससे अपने सिर का वजन भी नहीं सम्हाला जा रहा था।

"क्या मुझे लकवा मार गया है? मेरा सिर मुझे दस गुना बड़ा क्यों लग रहा है।" उसने अभी मन में कहा ही था कि तभी उसे सुसु आई और बहुत कंट्रोल करने के बावजूद उसने सुसु कर दी।

"हे भगवान! यह मैंने क्या किया? अब कौन साफ करेगा इसे? बच्चा होना भी बड़ा कठिन है। सारा दिन पड़े रहना कितना बोरिंग है और उस पर यह सु-सु, पोट्टी! छी! छी! छी! मुझे तो खुद पर ही तरस आ रहा है। यह कितना गीला गीला महसूस हो रहा है।" उसने मन में कहा और जोर से रोने लगी और तभी एक दाईमां (आया) जो बड़ी ही प्यारी लग रही थी वह आई और उसे पुचकारते हुए कपड़ा बदलने लगीं। इस वक्त उसे डायपर पहनाने से साफ़ मना किया था क्योंकि जिन्दल साहब नहीं चाहते थे कि उसकी प्रिंसेस को किसी भी तरह से कोई चोट पहुंचें।

      उन्होंने खुद डायपर चेक किया था जो उन्हें थोड़ा सा खुरदरा महसूस हुआ, इसलिए डायपर पहनाने पर उन्होंने सख्त मनाही कर रखी थी। साथ ही उन्होंने तुरंत एक फैसला लिया कि अब वो खुद का बेबी प्रॉडक्ट लॉन्च करेगे जो बेबी को एक कन्फर्ट जॉन देगा।

नित्या ने दाईमां को बड़े गौर से देखा और खिलखिला उठी। जिस पर वह हैरान थी न्यू बोर्न बेबी भला कैसे इतनी जल्दी मुस्कुराना सीख गया लेकिन नित्या की हंसी बड़ी प्यारी थी जो दाईमां को उससे प्यार करने पर मजबूर कर दिया।

"ओह! लिटिल प्रिंसेस, तुम तो बहुत प्यारी हो। और तुम्हारी मुस्कान की तो बात ही अलग है, काश मेरी भी इतनी प्यारी बेटी होती। वैसे तुम कुछ समझ तो नहीं सकती लेकिन याद रखना मैं अब हर पल तुम्हारे पास रहुंगी, तुम्हारी मां से भी ज्यादा इसलिए मेरी शक्ल को अच्छी तरह याद कर लो।" वह मुस्कराते हुए बोली और तभी एक सुरीली आवाज उसके कानों में पड़ी।

"ताई! बेबी को मेरे पास ले आओ, मैं उसे अपने पास ही रखूंगी ताकि मेरी बेबी को किसी भी तरह की परेशानी न हो।" सुनंदा ने मुस्कुराते हुए कहा और सुनिता ताई ने भी नित्या को उठा कर सुनंदा के पास रख दिया।

  सभी उसे निहारते न थकते, वो थी भी तो बड़ी ही प्यारी बिल्कुल गुड़िया की तरह।

"यह कितनी खूबसूरत है। सच मेमसाब आप बहुत खुशकिस्मत हों। आपको इतनी प्यारी गुड़िया मिली है।" सुनिता ताई ने कहा तो सुनंदा ने भी हां में सिर हिलाया मानो कह रही हो, सो तो है।

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इतने में नित्या को फिर नींद आने लगी। और वह मन में कह उठी — "आह! मेरे शरीर पर मेरा कोई बस नहीं चल रहा। अब तो सोने के इलावा कोई काम ही नहीं रहा।" वह बस जम्हाई लेती हुई फिर सो गई।

रात काफ़ी हो चुकी थी, सबको अब नींद आने लगी थी और नित्या इस वक्त नींद से पूरी तरह जाग चुकी थी, पर अब भी वह आलस से सबको निहार रहीं थी। उस कमरे में इस वक्त भी काफी हलचल थी। वे सभी इसी रूम में थे और बेबी का नाम डिस्कस कर रहे थे। 

   "मुझे लगता है इसका नाम ऐसा होना चाहिये जो हमारी संस्कृति से जुड़ा हो, जैसे - परम्परा, संहिता और सांस्कृता।" दादी ने कहा तो किसी को भी यह नाम पसंद नहीं आया।

"ओ, हो मां! इस तरह के नाम आजकल कौन रखता है?" आनन्द ने कहा तो दादी मां ने उसे झिड़कते हुए कहा — "ऐसा है तो तुम ही कोई अच्छा सा नाम सजेस्ट करों।"

"नहीं मां! मैं इसकी मासी हूं तो नाम तो मैं ही रखूंगी।" इस बात पर सबने शायसा को घूरा कि क्या मतलब हम बच्ची के कुछ नहीं लगते। 

काफी देर सोचने के बाद उनको एक नाम पसंद आया। मगर यह तो बाद में ही रखा जाना था इसलिए फिलहाल उन्होंने सुनंदा को गुड नाईट कहा और अपने अपने कमरे में चले गए और सुनंदा ने अपनी बेबी को देखा जो एक बार फिर उनकी बातों से ऊबती हुई सो गई थी।

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 दोस्तों आज का एपिसोड यहीं समाप्त होता है। पढ़ने के लिए शुक्रिया और मिलते हैं अगले एपिसोड में तब तक के लिए बाय बाय 👋