behind the black glass in Hindi Drama by ziya books and stories PDF | काले शीशे के पीछे

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काले शीशे के पीछे


भाग 1 — अजनबी जो सब जानता था

शहर का नाम रूद्रनगर था।

एक ऐसा शहर जहाँ रातें ज़्यादा सच बोलती थीं और दिन सिर्फ़ झूठ ढोते थे।

बारिश हो रही थी।

तेज़ नहीं—बस इतनी कि सड़कें चमकने लगें और हर परछाईं दोहरी दिखे।

ज़ोया रहमान बस स्टॉप पर खड़ी थी।

कंधे पर पुराना सा बैग, आँखों में थकान और चेहरे पर वो ख़ामोशी… जो सिर्फ़ मजबूरी से पैदा होती है।

ज़ोया 22 साल की थी।

माँ बचपन में मर चुकी थी।

बाप शराब में डूबा हुआ।

और ज़िंदगी—उसे रोज़ थोड़ा-थोड़ा मारती थी।

वो एक छोटे से न्यूज़पेपर में इंटर्न थी।

काम का नाम था “रिसर्च”, लेकिन असल में वो सस्ते कॉफ़ी और टूटे सपनों के बीच जीती थी।

आज उसे देर हो गई थी।

ऑफिस से निकलते-निकलते रात के 11 बज चुके थे।

बस स्टॉप सुनसान था।

तभी—

एक काली गाड़ी आकर उसके सामने रुकी।

इतनी महँगी गाड़ी ज़ोया ने सिर्फ़ फिल्मों में देखी थी।

शीशा धीरे से नीचे हुआ।

अंदर से एक आवाज़ आई—

गहरी, ठंडी, और हुक्म जैसी।

“ज़ोया रहमान… तुम हमेशा ऐसे ही देर से निकलती हो?”

ज़ोया के पैरों तले ज़मीन खिसक गई।

उसने चौंककर अंदर देखा।

अंधेरे में एक चेहरा था—

तेज़ नैन-नक्श, गहरी आँखें, हल्की दाढ़ी

और वो निगाह…

जैसे वो उसकी रग-रग पढ़ सकता हो।

“आप… आप मुझे कैसे जानते हैं?”

ज़ोया की आवाज़ काँप रही थी।

वो मुस्कुराया नहीं।

बस बोला—

“क्योंकि मैं वो जानता हूँ… जो तुम खुद नहीं जानती।”

वो कौन था?

उसका नाम था आयान मलिक।

शहर उसे बस एक नाम की तरह जानता था—

एक रहस्यमयी बिज़नेसमैन, जो कभी इंटरव्यू नहीं देता था,

जिसकी तस्वीरें इंटरनेट से गायब थीं,

और जिसके बारे में कहा जाता था—

“या तो वो भगवान है…

या शैतान।”

अयान मलिक 28 साल का था।

अरबों की संपत्ति,

दर्जनों कंपनियाँ,

और अंडरवर्ल्ड से लेकर पॉलिटिक्स तक… हर जगह उसका साया।

लेकिन सच्चाई?

वो सच्चाई कोई नहीं जानता था।

ज़ोया की मजबूरी

“मुझे घर जाना है,”

ज़ोया ने खुद को संभालते हुए कहा।

अयान ने गाड़ी का दरवाज़ा खोला।

“बारिश तेज़ हो रही है।

और तुम्हारे रास्ते में वो गली आती है…

जहाँ पिछले हफ्ते एक लड़की ग़ायब हुई थी।”

ज़ोया सिहर गई।

“आप मुझे डरा रहे हैं,”

“नहीं,”

अयान ने ठंडी आवाज़ में कहा,

“मैं तुम्हें सच बता रहा हूँ।”

कुछ पल की चुप्पी।

फिर ज़ोया बैठ गई।

उसे नहीं पता था क्यों—

पर उस आदमी के सामने ना कहना मुश्किल था।

गाड़ी के अंदर

अंदर की खुशबू अलग थी।

लकड़ी, लेदर और किसी अनजान ख़तरे की।

अयान ड्राइव नहीं कर रहा था।

ड्राइवर था—लेकिन वो ऐसे चुप था जैसे इंसान नहीं, कोई मशीन हो।

“आप मुझसे क्या चाहते हैं?”

ज़ोया ने पूछा।

अयान ने जेब से एक फ़ाइल निकाली।

“मैं चाहता हूँ…

कि तुम मेरे लिए एक कहानी लिखो।”

“कहानी?”

“हाँ।

एक लड़की की…

जिसे सच की तलाश थी।”

उसने फ़ाइल खोली।

अंदर—

ज़ोया की तस्वीरें थीं।

बचपन से लेकर आज तक।

उसकी माँ की मौत की रिपोर्ट।

उसके बाप के कर्ज़।

उसकी बैंक स्टेटमेंट।

ज़ोया का दम घुटने लगा।

“ये सब… ये सब गैरकानूनी है!”

अयान पहली बार मुस्कुराया।

“मेरी दुनिया में

कानून…

सिर्फ़ काग़ज़ होते हैं।”

पहला रहस्य

“तुम्हारी माँ की मौत एक्सीडेंट नहीं थी,”

अयान ने अचानक कहा।

ज़ोया ने झटके से उसकी तरफ देखा।

“आप झूठ बोल रहे हैं।”

“तुम्हारी माँ एक फ़ाइल पर काम कर रही थी।

उसी फ़ाइल पर…

जिस पर अब तुम काम कर रही हो।”

ज़ोया के हाथ काँपने लगे।

“मुझे कुछ नहीं पता…”

“पता चल जाएगा,”

अयान ने धीमे से कहा,

“क्योंकि अब तुम मेरी कहानी का हिस्सा हो।”

डील

गाड़ी एक ऊँची इमारत के सामने रुकी।

अयान ने कहा—

“तुम मेरे साथ काम करोगी।

बदले में—

तुम्हारे बाप के सारे कर्ज़ खत्म।

तुम्हारी नौकरी पक्की।

और वो सच…

जो तुम्हारी माँ ले गई थी।”

“और अगर मैं मना कर दूँ?”

अयान की आँखें ठंडी हो गईं।

“तो तुम बस एक और लड़की हो जाओगी…

जिसे शहर भूल जाएगा।”

चुप्पी।

बारिश।

ज़ोया ने गहरी साँस ली।

“मैं… सोच सकती हूँ?”

“नहीं,”

अयान बोला,

“तुम पहले ही हाँ कह चुकी हो।”

भाग 1 का अंत (क्लिफहैंगर)

जब ज़ोया गाड़ी से उतरी,

उसने शीशे में खुद को देखा—

वो वही लड़की नहीं थी

जो कुछ घंटे पहले बस स्टॉप पर खड़ी थी।

और ऊपर,

इमारत की सबसे ऊँची मंज़िल पर

एक परछाईं खड़ी थी—

जो मुस्कुरा रही थी।

क्योंकि खेल शुरू हो चुका था।