रागिनी आदित्य के आंखों मे जानवी के लिए प्यार और चिंता दैखती है , आदित्य ने सवाल तो धिरे से पुछा था पर उसके दिल के अंदर एक तुफान चल रहा था । राग रागिनी एक हल्की मुस्कान देती है और कहती है ---
रागिनी :- जानवी अब ठिक है , उसे होश आ गया है ।
आदित्य :- क्या हम उसे मिल सकते है ?
रागिनी :- हां.... पर ज्यादा सवाल नही , बस उसके पास जाना है और दैखकर निकल जाना है ।
आदित्य खुश होकर झट दरवाजा खोलता है और रागिनी के पास चला जाती है , पिछे- पिछे अशोक और रागिनी भी थी जानवी अपनी आंखे बंद किये थी । आदित्य जानवी की और अपना कदम बड़ाता है , जानवी को दैखकर आदित्य के आंखो से आंशु निकलने लगता है ।
आदित्य जानवी के पास बैठ जाता है और जानवी के हाथ को पकड़ लेता है । जानवी अपनी आंखे खोलती है और दैखती है के उसको पास आदित्य उसका हाथ पकड़कर बैठा था ।
जानवी को दैखकर हैरान हो जाती है और आदित्य के हाथ से अपने हाथ को झटके से अलग कर लेती है , आदित्य दैखता है के जानवी उसकी और दैख रही थी , जानवी आदित्य को दैखकर उसकी साँसें तेज हो गईं। वह घबराहट और गुस्से के मिले–जुले भाव से आदित्य को देखने लगी।
आदित्य का दिल जैसे वहीं रुक गया , आदित्य जानवी से कहता है --
आदित्य: - जानवी , क्या हो रहा है तुम्हें ?
जानवी (धीरे काँपती आवाज़, ऑपरेशन के कारण बोल नहीं पा रही):
“…तु…तुम , यहां क्यों आये हो ?”
आदित्य की आँखें भर आईं। वह कुछ कहने ही वाला था कि जानवी ने अपना सिर दूसरी तरफ कर लिया, जैसे वह उसके पास एक पल भी नहीं रहना चाहती हो।
आदित्य रागिनी की और दैखता है रागिनी यह सब दरवाज़े पर खड़ी देखकर अंदर दौड़ी।
उसे एक नज़र में समझ आ गया — के जानवी याददाश्त खो चुकी है… और आदित्य और उसका प्यार अब उन यादों में अब बचा ही नहीं।
आदित्य: - रागिनी ये जानवी को क्या हो गया है । ये ऐसे क्यों बोल रही है ।
रागिनी ने आदित्य के कंधे पर हाथ रखकर धीमे से कहा—
रागिनी :- “आदि… संभालो अपने आपको , मुझे दैखने दो , मैं कोशिश करती हूँ ।
आदित्य की आँखें लाल हो गईं, लेकिन उसने खुद को संभाला।
वह जानवी से एक कदम दूर हट गया, ताकि उसे डर न लगे।
जानवी हिम्मत जुटाकर बस इतना कह पाई—
जानवी :- “दूर… जाओ… ”
आदित्य ने उसका हर शब्द टूटते हुए सुना।
उसने पीछे कदम बढ़ाए, पर नज़रें जानवी से हटा नहीं पा रहा था।
उसे पहली बार महसूस हुआ—
किसी को खो देना दर्द नहीं…
किसी को ऐसे खो देना कि वह तुम्हें पहचान ही न पाए—
वो असली दर्द है।
रागिनी ने जानवी का हाथ थामा और धीमे से कहा—
रागिनी :- “कोई बात नहीं, सब ठीक हो जाएगा… बस अभी आराम करो। वो चला गया ।
जानवी :- डॉक्टर , वो मुझे मार देगा ।
जानवी से ये सुनकर सभी हैरान था , रागिनी कहती है --
रागिनी :- वो तुम्हें कुछ नही करेगा , उसीने तुम्हारी जान बचाया है ।
जानवी :- य... ये उसकी एक चाल है , उसने पहले मुझे किडनेप कराया फिर ये .... मुझे क्या हूआ था , याद क्यो नही आ रहा है ।
रागिनी :- तुम्हारे साथ कल क्या हूआ था तुम्हें याद नही है ?
जानवी :- न.. नही डॉक्टर , मुझे कुछ याद नही आ रहा है ।
जानवी से ये सुनकर आदित्य और अशोक चोंक गया था । रागिनी जानवी से कहती है --
रागिनी :- ओके , तुम अभी आराम करो , धिरे - धिरे सब ठिक हो जाएगा ।
अशोक :- बेटा ( रागिनी ) जानवी को कल वाली बात याद क्यों नही आ रहा है ?
रागिनी :- आप लोग मेरे केबिन मे आईए ।
इतना बोलकर रागिनी वहां से चली जाती है और आदित्य जानवी की और भारी दिल से दैखता है तो जानवी अपना मुह फेर लेती है , तो आदित्य वहां से बाहर जाने लगता है , आदित्य बाहर निकलते वक्त सिर्फ़ एक बार पीछे मुड़ा। जानवी की आँखों में आज डर था, आदित्य के लिए प्यार नही । आदित्य की आँखों में पहली बार… एक गहरी, चुप और दर्द था ।
अशोक और आदित्य रागिनी के बेबिन मे जाता है , साथ मे रश्मी , रमेश और कृतिका भी थी , जहां रागिनी अपने कुर्सी पर बैठी थी , अशोक और आदित्य भी वहां पर बैठ जाता है ।
आदित्य रागिनी से पूछता है --
आदित्य :- रागिनी , ये सब क्या है , जानवी मुझे दैखकर ऐसा क्यों कर रही है ? कल तो उसने मुझे अपने दिल की बात बतायी थी , वो मुझे प्यार करती है , पर आज मुझे दैखकर ....
रागिनी :- मैं तुम्हारी बात समझ रही हूँ आदित्य , पर अभी जानवी को वो सब कुछ भी याद नही है ।
रागिनी से ये सुनकर सभी चोंक जाता है , अशोक कहता है -
अशोक :- पर बेटा, उसे तो सब याद है , मैं आदित्य सब कुछ याद है ।
रागिनी :- हां , उसे याद है पर कबतक का याद है ये वही जानती है , जैसे वो रियेक्ट कर रही है वैसे तो लगता है के उसे उस टाईम तक याद है जब जानवी के दिल मे आदित्य के नफरत था ।
आदित्य :- ये कैसे हो सकता है ।
रागिनी :- हो सकता है , हाँ, ऐसा होना पूरी तरह संभव है। मेडिकल साइंस में इसे पोस्ट-ट्रॉमेटिक एम्नेशिया (Post-Traumatic Amnesia – PTA) कहा जाता है। एक्सीडेंट में सिर पर चोट लगने के बाद ,याददाश्त कुछ दिनों से लेकर कई महीनों तक जा सकती है– कुछ मरीज 1–2 दिन भूलते हैं।– कुछ हफ्तों तक। – और कई केसों में 1–2 महीने या उससे भी ज़्यादा समय तक याददाश्त कमजोर या गायब रहती है। यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि , चोट कितनी गहरी है , दिमाग के कौन-से हिस्से पर असर हुआ
है ।
आदित्य : - तो क्या कल की बात जो हमने किया था , वो सब भूल गई है ?
रागिनी :- हां वो भी , और भी है जो भूल सकती है जैसे एक्सीडेंट कैसे हुआ , एक्सीडेंट से पहले के कुछ दिन या महीने , हादसे के बाद का समय , कुछ लोगों को अपने रिश्ते, नाम, जगहें भी कुछ समय के लिए याद नहीं रहतीं , पर जानवी को आपलोग याद हो , इसका मतलब बस कुछ समय की बात ही भूल गई है ।
आदित्य को ये बहोत बुरा लग रहा था , क्योकी जानवी आदित्य का प्यार भूल चुकी थी , जो प्यार सुरु होने से पहले ही अब जानवी के याददाश्त जाने से खत्म हो रहा था । रागिनी आदित्य को दैखकर कहती है --
रागिनी :- सॉरी आदित्य ।
आदित्य के आंखो से आंशु बहने लगा था जिसे पोछते हूए आदित्य कहता है --
आदित्य :- तुम क्यों सॉरी बोल रही हो , लगता है मेरे नसीब मे जानवी का प्यार नही है ।
रागिनी :- ऐसा क्यों बोल रहे हो , हो सकता है उसे ये सब जल्दी याद आ जाए ।
आदित्य: - क्या ऐसा हो सकता है ?
रागिनी :- हां जरुर , धीरे-धीरे , दवाइयों से , आराम और सही इलाज से , डॉक्टर की सलाह पर कुछ मेमोरी थेरेपी से ये हो सकता है ।
इसे सुनकर आदित्य को फिर से एक नया उम्मीद जाग जाता है , पर आदित्य का मन अब भी उदास था क्योकी जिस प्यार को आदित्य पा कर भी ना पा सका , उसे पाने के लिए आदित्य को कुछ समय और इंतेजार करना होगा ।
आदित्य : - तो फिर तुम कहो ना , हमे क्या करना होगा , हम आज से ही सब सुरु कर देगें ।
रागिनी :- नही आदित्य, अभी जानवी का condition उतना अच्छा नही है अभी उसे हम ज्यादा प्रेशर नही दे सकते है । पर हां कुछ दिनो मे सब ठिक हो जाएगा ।
आदित्य को उदास दैखकर रागिना आदित्य का हाथ पकड़ती है और कहती है --
रागिना :- ऐसे उदास मत हो आदित्य , हिम्मत रखो , सब ठिक होगा ।
आदित्य (कमज़ोर आवाज़ में): - “रागिनी… मैं उससे बात करना चाहता हूँ। बस पाँच मिनट , शायद… शायद मुझे देखकर उसे कुछ याद आ जाए।” प्लिज रागिनी , कल की बात याद आना बहोत जरुरी है , वरना ...
रागिनी कुछ पल चुप रहती है और फिर धीरे से कहती है—
रागिनी :- “ठीक है। पर संभालकर बोलना। उसके दिमाग पर ज़ोर नहीं डालना।”
आदित्य सिर हिला देता है।
इतना बोलकर आदित्य और सभी वहां से जानवी के पास चला जाता है ।
उधर विकास काली को फोन पर करके बात कर रहा था --
विकास: - ये क्या किया आपने काली भाई । आदित्य को मारना था और आपने जानवी को ही मरवाना चाहा ।
काली :- अरे ये मिस्टेक से हो गया ।
विकास गुस्से से कहता है -
विकास :- हर बार आपसे मिस्टेक हो जाता है और नुकसान मेरा होता है , अगर जानवी को कुछ हो जाता है तो मेरा सबकुछ खत्म हो जाएगा ।
काली अकड़कर बोलता है --
काली :- ऐ , बोला ना मिस्टेक हो गया , अब अकड़ मत दिखा चल ।
विकास :- अब प्लिज आगे कुछ मत करना , ऐसे ही आपके कारण मेरा कुछ नुकसान हो गया है , अब अगर उस आदित्य को मार नही सकते हो तो चुप चाप रहो ।
काली ( गुस्से से ) :- ऐ , काली को बताएगा तु , के काली को क्या करना है !
विकास :- अब धमकी बाजी बस भी किजिए , अब तो आपकी धमकी भी मजाक लगती है ।
काली :- क्या , क्या बोला रो तु , मेरी धमकी मजक लगती है , अब दैख , अब तु दैख , मैं कैसे उस आदित्य की बेंड बजाय हूँ , उसके बाद तेरे से बात करुगां मैं ।
इतना बोलकर काली फोन काट देता है ।
विकास अपने से पूछता है --
विकास :- क्या मुझे जानवी के पास जाना चाहिए ? उसके साथ जो कुछ भी हूई , मेरै ही कारण हूआ , इंसानियच के नाते तो मुझे जाना चाहिए ।
आज पहली बार विकास के मुह से इंसानियत की बात निकल आई थी , ये उसे खुद भी नही पता था के उसने ऐसा क्यों कहा । विकास अपने घर से जानवी को दैखने के लिए निकल जाता है ।
इधर मोनिका ये सुनकर बहोत खुश थी के जानवी का एक्सीडेंट हो गया है और उसकी हालत बहोत नाजुक है , मोनिका खुश होकर कहती है --
मोनिका :- अरे वाह , क्या बात है , लगता है मेरी किस्मत आज कल बहोत अच्छा चल लगा है , जो मैं चाहती थी वो सब खुद ही हो रहा है , काश जानवी हॉस्पिटल मे ही मर जाए, तो मेरे और आदित्य के बिच का रास्ता साफ हो जाएगा ।
तभी वहां पर रेखा आ जाती है और कहती है --
रेखा :- किस बात की खुशी मनाई जा रही है मोनिका , कोन सा रास्ता साफ होने की बात कर रही हो ।
मोनिका अपनी माँ रेखा को ऐसे अचानक से आते दैखकर चोंक जाती है और घबराते हूए कहती है --
मोनिका: - क... कुछ भी नही मां ।
रेखा :- अच्छा ठिक है , वो सब छोड़ो और ये बता , के तुमने विक्की से बात किया के नही , तुम दोनो बात करो , कब शादी करोगे पुछो उससे ।
मोनिका अपनी मां से इतना सुनकर चोंक जाती है और कहती है --
मोनिका :- मां .... वो ....
रेखा :- हां बोल ना, क्या बोलना चाहती है ।
मोनिका :- मां वो ... विक्की से मेरी शादी नही होगी ।
रेखा हैरान होकर पुछती है --
रेखा :- शादी नही होगी ! पर शादी क्यो नही होगी ?
मोनिका: - वो मां विक्की ने मुझे धोका दिया है वो पहले से ही किसी और प्यार करता है ।
मोनिका अपनी प्रेग्नेंसी की बात को छोड़कर सब बोलकर सुनाती है तो रेखा गुस्से से कहती है --
रेखा :- मुझे तो पहले ही पता था । के वो लड़का तेरे लिए सही नही है , पर तुझे तो अच्छा लड़का नही पैसा चाहिए था । अब दैख लिया ना कैसे निकला वो विक्की , छोड़कर चला गया ना , धोका दे रहा था तुझे वो , इस्तेमाल किया है तेरा । और तु पैसो के लिए इस्तेमाल होती गई , अच्छा हूआ ये सब जल्दी खत्म हो गया , पता नही अगर कुछ उच- निच हो जाता तो क्या होता ।
मोनिका मन ही मन कहती है --
मोनिका: - अब मैं आपको क्या बताउ मां , जो नही होना था वही हो गया है , मैने सच मे बहोत बड़ी गलती कर दी है ।
रेखा :- बेटा अब भी ज्यादा कुछ नही बिगड़ा है , मैने सुना है के आदित्य और जानवी के बिच अब कुछ नही रहा है , दोनो ने डिवोर्स ले लिया है , बेटा तु एक बार आदित्य से बात क्यों नही करती , वो बहोत अच्छा लड़का है ।
मोनिका :- माँ , इस वक्त मेरा मूड ठिक नही है आप जाओ प्लिज ।
रेखा गुस्सा करके फुसफुसाती हूई वहां से चली जाती है --
रेखा :- तेरा जो मन तु कर , मैं जा रही हूँ।
इधर हॉस्पिटल मे आदित्य दोबारा जानवी के पास जाता है , आदित्य बाहर कमरे के बाहर खड़ा होता है एक गहरी सांस लेता है और फिर दरवाजा खोलता है और अंदर चला जाता है , जानवी आंखे बंद करके सोयी थी ।
रागिनी वही पर बाहर से ये सब दैखने लगती है ।
जानवी लेटी है, हाथों में ड्रिप लगी है , चेहरे पर हल्की थकान लेकिन आँखें खुली हैं—खाली और ठंडी।
आदित्य धीरे-धीरे कमरे में प्रवेश करता है।
जानवी उसे देखती है। उसकी नजर में न पहचान है, न अपनापन…
बस वही पुरानी दूरी, ठंडा झगड़ा जैसा भाव।
जानवी: - त...तुम फिर आ गए? मैंने कहा था ना… हमारे बीच अब कुछ नहीं है। तो फिर क्यों मुझे परेशान कर रहे हो !
आदित्य थोड़ा रुककर उसके पास कुर्सी खींचता है।
आदित्य: - “जानवी… कल तुमने—”
जानवी बीच में ही बोल देती है,
जानवी :- “कल? मुझे कल का कुछ याद नहीं।”
आदित्य की सांस भारी हो जाती है।
वह धीमे, बहुत सावधानी से बोलता है—
आदित्य: - तुम कल को कैसे भूल सकती हो जानवी , कल रात… तुमने मुझे प्रपोज किया था।” याद करने की कोशिश करो जानवी ।
जानवी की आँखों में गुस्सा उतर आता है।
जानवी: - “स्टॉप इट, आदित्य , ये सब ड्रामा क्यों कर रहे हो? मेरी याददाश्त चली गयी गई है तो तुम उसका ऐसे फायदा उठाओगे ।
और कितना निचे गिरोगो आदित्य ।
आदित्य हक्का रह जाता है।
जानवी (तेजी से): - “मुझे सिर्फ इतना याद है कि मैने तुमसे कभी प्यार नहीं किया , हमारी शादी… टूट चुकी है , और तुम किसी और मैं तुमसे नही विकास से प्यार करती हूँ … उसके बाद भी!”**
यह सुनकर आदित्य का दिल चाकू की तरह कटता है।
वो समझ गया—के जानवी को प्यार वाला पल जानवी के दिमाग से पूरी तरह मिट गया है।
आदित्य :- जानवी , एक बार याद करने की कोशिश तो करो ।
जानवी :- अगर तुम दोबारा मेरे सामने आए तो कसम से मैं अपनी जान दे दूगी , आज के बाद अगर तुम्हारा चेहरा मेरे सामने भी आया तो उसी समय मैं अपनी जान दे दूगी । यही चाहते हो ना तुम ।
To be continue....