Adhura Pyar - 2 in Hindi Horror Stories by Pooja Singh books and stories PDF | अधूरा प्यार - 2

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अधूरा प्यार - 2

बहुत बढ़िया 👏
अब कहानी और गहरी होगी — इमोशन + फैमिली ड्रामा + हॉरर शैडो…
और जैसा आपने कहा — ऋषभ की मौत का राज अभी नहीं खुलेगा।
चैप्टर 2 : घर की दीवारों में छुपा साया
नव्या मल्होत्रा।
दुनिया के लिए वो एक ताकत थी।
लेकिन घर के अंदर…
वो अभी भी किसी की बेटी थी।
मल्होत्रा हाउस — मुंबई के जुहू इलाके में फैला हुआ एक भव्य बंगला।
सफेद संगमरमर की सीढ़ियाँ, दीवारों पर महंगे पेंटिंग्स…
लेकिन इस घर में सबसे ज्यादा भारी था — सन्नाटा।
डाइनिंग टेबल पर आज पूरा परिवार बैठा था।
उसके पिता — राजीव मल्होत्रा।
सख्त चेहरे वाले, बिजनेस माइंडेड, लेकिन दिल से अपनी बेटी के लिए कमजोर।
माँ — मीरा मल्होत्रा।
शांत, भावुक… और हमेशा नव्या की आँखों में छुपे दर्द को पढ़ लेने वाली।
और उसका छोटा भाई — आरव।
जो हमेशा कोशिश करता था कि घर में थोड़ी हंसी बची रहे।
“नव्या, तुम फिर लेट आई,” माँ ने हल्की नाराज़गी से कहा।
“मीटिंग थी, माँ,” नव्या ने बिना ऊपर देखे जवाब दिया।
राजीव ने अखबार मोड़ा।
“विक्रम अरोड़ा फिर से मार्केट में हमारे खिलाफ प्रोपेगैंडा फैला रहा है।”
नव्या की आँखें ठंडी हो गईं।
“उसे जितना खेलना है खेलने दो। मैं उसे खत्म कर दूँगी।”
उसकी आवाज़ में कुछ ऐसा था…
जिससे आरव भी चुप हो गया।
माँ ने धीरे से कहा,
“बेटा… बदला लेने से जिंदगी आसान नहीं होती।”
नव्या के हाथ एक पल को रुक गए।
“माँ, मैंने दो साल पहले सीखा था…
प्यार, भरोसा, भावनाएँ — ये सब कमजोरी होती हैं।”
मीरा की आँखों में एक छाया सी आई।
वो नाम किसी ने नहीं लिया…
लेकिन सब जानते थे — बात किसकी हो रही है।
रात…
मल्होत्रा हाउस के गलियारे में हवा अजीब तरह से बह रही थी।
मीरा अपने कमरे में पूजा की थाली सजा रही थीं।
अचानक दीवार पर टंगी एक पुरानी तस्वीर जमीन पर गिर गई।
फ्रेम का कांच टूट गया।
मीरा घबरा कर झुकीं।
तस्वीर में नव्या मुस्कुरा रही थी…
और उसके साथ खड़ा था — ऋषभ।
मीरा का दिल धक से रह गया।
“हे भगवान…”
उसी पल कमरे का दरवाज़ा अपने आप बंद हो गया।
हवा ठंडी हो गई।
मीरा को लगा जैसे किसी ने पीछे से बहुत हल्के से कहा —
“आंटी… मैं हूँ।”
वो तेजी से मुड़ीं।
कोई नहीं।
लेकिन उनकी आँखों में डर नहीं था।
अजीब सी शांति थी।
“अगर तुम हो… तो मेरी बच्ची को तकलीफ मत देना,” उन्होंने धीरे से कहा।
कमरे की हवा अचानक शांत हो गई।
दीया की लौ जो अभी तक कांप रही थी… सीधी हो गई।
उधर…
नव्या अपने कमरे में लैपटॉप पर काम कर रही थी।
उसकी स्क्रीन पर अचानक विक्रम की फोटो उभरी।
साथ में एक मैसेज —
“आज रात 11 बजे… तुम्हारा नंबर है।”
नव्या ने तुरंत सिक्योरिटी को कॉल किया।
“घर की सुरक्षा डबल कर दो। कोई अंदर नहीं आना चाहिए।”
लेकिन उसे क्या पता था…
खतरा बाहर से नहीं था।
रात 11 बजे।
घर के बाहर अचानक बिजली चली गई।
पूरा इलाका अंधेरे में डूब गया।
आरव नीचे हॉल में था।
“दीदी!” उसने आवाज लगाई।
अचानक कांच टूटने की आवाज आई।
चार नकाबपोश आदमी अंदर घुस आए।
“नव्या मल्होत्रा कहाँ है?”
आरव ने उनका रास्ता रोक लिया।
“पहले मुझसे गुजरना होगा।”
एक आदमी ने उसे धक्का दिया।
मीरा चीख पड़ीं।
तभी…
हवा का दबाव बदल गया।
दरवाज़े अपने आप बंद हो गए।
नकाबपोश लोग घबरा गए।
“ये क्या—?”
सीढ़ियों के ऊपर एक साया खड़ा था।
लंबा… शांत… लेकिन उसकी मौजूदगी ही डर पैदा कर रही थी।
नव्या ऊपर से ये सब देख रही थी।
उसकी साँस अटक गई।
वो चेहरा साफ नहीं दिख रहा था…
लेकिन वो अहसास…
वो पहचानती थी।
एक आदमी ने पिस्तौल उठाई।
ट्रिगर दबाने से पहले ही उसका हाथ जैसे जम गया।
हथियार जमीन पर गिर गया।
दूसरे आदमी को किसी अदृश्य ताकत ने पीछे फेंक दिया।
तीसरे की आवाज जैसे बंद हो गई।
कुछ ही सेकंड में चारों जमीन पर बेहोश पड़े थे।
पूरा घर सन्नाटे में डूब गया।
नव्या धीरे-धीरे सीढ़ियाँ उतरकर नीचे आई।
“किसने किया ये?”
सिक्योरिटी गार्ड बाहर से भागते हुए अंदर आए।
“मैम, हमने कुछ नहीं किया। दरवाज़े खुद बंद हो गए थे।”
नव्या ने चारों तरफ देखा।
हवा में हल्की सी खुशबू थी।
वही…
जो ऋषभ इस्तेमाल करता था।
उसकी आँखों में पहली बार डर नहीं…
बल्कि उलझन थी।
“तुम हो क्या?” उसने बहुत धीमे से फुसफुसाया।
पीछे से हवा का झोंका आया।
जैसे किसी ने उसके बालों को हल्के से छुआ हो।
उस रात…
नव्या अपने कमरे में अकेली बैठी थी।
“अगर ये कोई गेम है… तो सामने आओ,” उसने कहा।
आईने में उसकी परछाईं दिख रही थी।
लेकिन…
एक पल के लिए उसे लगा…
उसकी परछाईं के पीछे कोई और खड़ा है।
वो तेजी से मुड़ी।
कोई नहीं।
लेकिन आईने में हल्का सा धुंधला शब्द उभरा —
“ट्रस्ट मी।”
नव्या का दिल तेज़ धड़कने लगा।
“मैं अब किसी पर भरोसा नहीं करती,” उसने कठोर आवाज़ में कहा।
आईने की धुंध धीरे-धीरे गायब हो गई।
लेकिन कमरे की हवा में एक फुसफुसाहट रह गई —
“फिर भी… मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ।”
उधर…
शहर के दूसरे कोने में विक्रम अरोड़ा अपने ऑफिस में बैठा था।
उसके सामने स्क्रीन पर मल्होत्रा हाउस का फुटेज चल रहा था।
उसने दाँत भींचे।
“ये कैसे हो रहा है? मेरे आदमी बिना चोट के गिर कैसे जाते हैं?”
उसके पीछे अंधेरे में एक छाया हिली।
लेकिन विक्रम को पता नहीं चला।
छाया की आँखों में नीली चमक थी।
“तुम्हारा खेल खत्म होने वाला है…”
एक बेहद धीमी आवाज़ गूँजी।
लेकिन अभी…
राज नहीं खुलेगा।
नव्या को अभी नहीं पता चलेगा कि उसके आसपास क्या चल रहा है।
बस इतना तय है —
कोई है…
जो उसकी हर साँस पर नज़र रखे हुए है।
और जो उसके परिवार तक पहुँचेगा…
वो जिंदा नहीं बचेगा।