Shaadi, Saazish aur Teen Dil - 5 in Hindi Love Stories by InkImagination books and stories PDF | Shaadi, Saazish aur Teen Dil - 5

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Shaadi, Saazish aur Teen Dil - 5

💎 Shaadi, Saazish aur Teen Dil
Part 5 – Sindoor Ki Laali aur Dil Ki Pehli Dhadkan


मंडप की रोशनी अब और भी तेज़ लग रही थी।
जलते दीये, फूलों की महक, पंडित जी के मंत्रों की गूँज – सब कुछ वैसा ही था, लेकिन अब हवा में एक अलग सा तनाव था।
मीरा तैयार होकर आई।
लाल लहंगा, भारी दुपट्टा, गले में मंगलसूत्र की तैयारी, मांग में सिंदूर की डिबिया।
उसके बाल जूड़े में बंधे थे, लेकिन कुछ लटें छुपकर माथे पर आ रही थीं।
चेहरा शांत, लेकिन आँखों में वो चमक – जैसे कोई जंग लड़ने जा रही हो।
आरव पहले से मंडप पर बैठे थे।
काली शेरवानी में, पगड़ी सिर पर, चेहरा बिल्कुल पत्थर।
उनकी नज़र मीरा पर पड़ी।
एक सेकंड के लिए उनकी आँखें रुकीं – जैसे वो पहली बार सच में उसे देख रहे हों।
न सिर्फ एक लड़की के तौर पर… बल्कि एक चुनौती के तौर पर।
पंडित जी थोड़े घबराए हुए थे।
“बेटा… सब ठीक है ना? इतनी जल्दी… कोई मंत्र दोबारा पढ़ना पड़ेगा?”
आरव ने शांत स्वर में कहा,
“नहीं पंडित जी।
जो होना है, वो हो चुका है।
फेरे शुरू कीजिए।”
मीरा धीरे से मंडप पर बैठ गई।
उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था, लेकिन चेहरा बिल्कुल शांत।
वो जानती थी – ये सिर्फ एक रस्म है।
एक डील है।
फिर भी… जब आरव ने उसकी तरफ देखा, तो कुछ सेकंड के लिए उसकी साँस रुक गई।
पंडित जी ने मंत्र पढ़ना शुरू किया।
“ॐ तत्सत्… विवाह कर्म प्रारम्भम्…”
आरव ने धीरे से मीरा से पूछा,
“तैयार हो?”
मीरा ने बिना नज़र हटाए कहा,
“हाँ।
लेकिन याद रखना… ये सिर्फ नाम की शादी है।
६ महीने।
उसके बाद… अलग।”
आरव ने हल्की सी मुस्कान दी – वो मुस्कान जो डराती भी है और आकर्षित भी करती है।
“मुझे याद है।
तुम्हें भी याद रखना… इस दौरान तुम मेरी पत्नी हो।
बाहर दुनिया के सामने।
अंदर… मेरे रूल्स।”
पहला फेरा।
दोनों ने साथ में कदम बढ़ाया।
मीरा का पल्लू हल्का सा आरव के कंधे पर लहराया।
दूसरा फेरा।
तीसरा।
राघव बाहर हॉल के कोने में खड़ा था।
उसकी आँखें लाल, हाथ मुट्ठी में।
वो बार-बार सिर हिला रहा था – जैसे यकीन नहीं हो रहा हो।
प्रिया माल्होत्रा पास बैठी थीं, आँसू पोछ रही थीं।
विक्रम चुप थे – बस घड़ी देख रहे थे।
राजेश चाचा दूर से देख रहे थे, चेहरा सफेद, जैसे कुछ सोच रहे हों।
चौथा फेरा।
पंडित जी बोले,
“अब पाँचवाँ फेरा… संतान और सुख का फेरा।”
मीरा ने अचानक रुककर आरव की तरफ देखा।
“एक मिनट।”
सब चौंके।
आरव ने भौंहें चढ़ाईं।
“क्या हुआ?”
मीरा ने सबकी तरफ देखा – फैमिली, पंडित, स्टाफ।
फिर पूरी आवाज़ में बोली,
“मैं ये फेरे लेने से पहले सबके सामने एक बात कहना चाहती हूँ।
ताकि बाद में कोई इल्ज़ाम न लगे।
मैं मीरा शर्मा… आज आरव माल्होत्रा से शादी कर रही हूँ।
ये शादी मजबूरी में नहीं… बल्कि एक फैसले से हो रही है।
आज रात जो स्कैंडल हुआ… वो सिर्फ शुरुआत है।
मुझे पता है कि इसके पीछे कोई बड़ा राज़ है।
और मैं वो राज़ ढूँढूँगी।
चाहे इसके लिए मुझे कितना भी दर्द सहना पड़े।
ये शादी… मेरी हिम्मत है।
न कि कोई समझौता।”
पूरा मंडप सन्न।
आरव ने धीरे से कहा,
“खत्म?”
मीरा ने कहा,
“हाँ।
अब फेरे पूरा करो।”
पाँचवाँ, छठा, और सातवाँ फेरा।
सातवाँ फेरा पूरा होते ही पंडित जी बोले,
“अब तुम पति-पत्नी हो।
सिंदूर डालो।”
आरव ने सिंदूर की डिबिया उठाई।
मीरा ने आँखें बंद कर लीं।
उसके होंठ हल्के से काँप रहे थे।
आरव ने धीरे से उसकी मांग में सिंदूर भरा।
लाल लकीर।
मीरा की साँस एक पल के लिए रुक गई।
उसने आँखें खोलीं।
आरव अभी भी उसके इतने करीब थे कि उसकी साँस मीरा के चेहरे पर पड़ रही थी।
फिर मंगलसूत्र।
आरव ने उसे मीरा के गले में पहनाया।
मंगलसूत्र की छोटी-छोटी घंटियाँ बज उठीं।
मीरा ने गले को छुआ।
ठंडा सोना… गर्म दिल।
पंडित जी ने कहा,
“विवाह संपन्न।
अब दंपति को आशीर्वाद दीजिए।”
विक्रम और प्रिया ने आगे बढ़कर आशीर्वाद दिया।
प्रिया ने मीरा के माथे पर हाथ रखा।
“बेटी… तुम्हारी हिम्मत देखकर… मुझे गर्व हो रहा है।
भगवान तुम दोनों को खुश रखे।”
मीरा ने सिर्फ सिर झुकाया।
राघव ने कुछ नहीं कहा।
वो बस बाहर निकल गया।
आरव ने मीरा का हाथ पकड़ा।
“चलो।
अब घर।”
मीरा ने हाथ नहीं छुड़ाया।
लेकिन उसकी उँगलियाँ सख्त थीं।
बाहर मीडिया का तूफान।
फ्लैश, चीखें, सवाल।
“आरव सर! ये अचानक शादी क्यों?”
“मीरा जी कौन हैं?”
“राघव की शादी टूटने के बाद… क्या ये प्लान था?”
आरव ने मीरा को अपनी तरफ खींचा – protective अंदाज़ में।
फिर माइक पर बोले,
“सुनिए सब।
आज रात एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई।
मेरे भाई की शादी नहीं हो पाई।
लेकिन माल्होत्रा फैमिली कभी हार नहीं मानती।
मैंने फैसला लिया कि इज्ज़त बचानी है।
मीरा – एक बहादुर और ईमानदार लड़की – आज रात हमारे साथ खड़ी रही।
इसलिए… इसी मंडप में… मैंने उससे शादी कर ली।
ये हमारी नई शुरुआत है।
अब कोई सवाल नहीं।
धन्यवाद।”
फ्लैश और तेज़।
मीरा ने आरव से फुसफुसाकर कहा,
“तुमने बहुत अच्छे से झूठ बोला।”
आरव ने जवाब दिया,
“झूठ नहीं।
सच का एक हिस्सा।
और यही सबसे खतरनाक होता है।”
ब्लैक मर्सिडीज तैयार थी।
आरव ने मीरा को अंदर बिठाया।
खुद ड्राइविंग सीट पर।
सिक्योरिटी आगे-पीछे।
कार चल पड़ी।
मीरा ने खिड़की से बाहर देखा।
“कहाँ ले जा रहे हो?”
आरव ने कहा,
“माल्होत्रा हाउस।
तुम्हारा नया घर।
या… नया मैदान-ए-जंग।
जैसा तुम देखना चाहो।”
मीरा ने मुस्कुराकर कहा,
“जंग में भी जीत होती है।
बस सही हथियार चाहिए।”
आरव ने स्पीड बढ़ाई।
“तुम बहुत बोल्ड हो।
लेकिन याद रखना… इस घर में मेरे रूल्स हैं।
पहला रूल – तुम कभी मुझसे झूठ नहीं बोलोगी।
दूसरा – तुम कभी अकेले कहीं नहीं जाओगी।
तीसरा – तुम मेरी बात मानोगी… जब तक मैं तुम्हें न छोड़ दूँ।”
मीरा ने कहा,
“और अगर मैं न मानूँ?”
आरव ने कार रोकी – हाईवे के किनारे।
रात गहरी थी।
सिर्फ हाईवे की लाइट्स।
वो मीरा की तरफ मुड़े।
“तो फिर… खेल और रोचक हो जाएगा।
लेकिन याद रखना… मैं हार नहीं मानता।
कभी नहीं।”
मीरा ने उसकी आँखों में देखा।
“देखते हैं।”
तभी आरव का फोन बजा।
Private Number।
आरव ने स्पीकर पर रखा।
Distorted आवाज़:
“Congratulations, Mr. Malhotra.
Nayi biwi… bahut khoobsurat.
Lekin yaad rakhna… yeh sirf shuruaat hai.
Ab asli khel shuru hoga.
Aur is baar… jeet meri hogi.”
लाइन कट गई।
मीरा ने कहा,
“वही आदमी।
जिसने मेरा नाम लिया था।”
आरव ने फोन नीचे रखा।
मुट्ठी स्टीयरिंग पर सख्त।
“हाँ।
और अब वो जानता है कि तुम मेरे साथ हो।
तो अब… खतरा दोगुना हो गया है।”
मीरा ने कहा,
“तो अब क्या?”
आरव ने कार फिर चलाई।
“अब हम इंतज़ार करेंगे।
वो खुद आएगा।
और जब आएगा… हम तैयार रहेंगे।
तुम और मैं… साथ।”
मीरा ने बाहर देखा।
“साथ… लेकिन सिर्फ डील के लिए।
याद रखना।”
आरव ने कुछ नहीं कहा।
बस हल्का सा सिर हिलाया।
कार माल्होत्रा हाउस के गेट पर रुकी।
बड़ा लोहे का गेट खुला।
अंदर विशाल बंगला – लाइट्स जल रही थीं।
मीरा ने गहरी साँस ली।
“ये मेरा नया घर है?”
आरव ने दरवाज़ा खोलते हुए कहा,
“हाँ।
लेकिन याद रखना…
यहाँ हर दीवार सुनती है।
हर आँख देखती है।
और हर कदम… गिना जा रहा है।”
मीरा ने कदम बढ़ाया।
“तो फिर… चलो शुरू करते हैं।
सच का खेल।”
दोनों ने साथ में घर में कदम रखा –
नई दुल्हन… नया पति…
और एक पुराना दुश्मन… जो अभी छुपा हुआ था।

पार्ट ५ खत्म।
दोस्तों… अब शादी पूरी हो गई! 🔥
सिंदूर, मंगलसूत्र, वो mysterious कॉल, और आरव-मीरा की पहली टेंशन वाली बात… कैसी लगी?
कमेंट में बताओ:
“पार्ट ६ में माल्होत्रा हाउस का पहला दिन और सुहागरात वाला सीन चाहिए!”
या “अब कौन सा ट्विस्ट आएगा?”
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