Shahad ki Gudiya - 2 in Hindi Fiction Stories by Ramesh Desai books and stories PDF | शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (2)

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शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (2)


        आर्यन ने साबित कर दिया था. वह नामर्द था. मर्द की तरह हरकते कर नहीं सकता था.मैंने उसे बता दिया था. मुझे बेकाबू करने को कोई मिल गया हैं.

       आर्यन ने मुझे यह मानने को विवश किया था. उस की तरह हर मर्द डरपोक होता है.

        उस के बाद मेरी जिंदगी में एक सीनियर ने जगह ली थी. उस का नाम करण था.

        वह सीनियर भी आर्यन जैसा था. लाइब्रेरी के पीछे छिपकर मुझे घूरता था.

        एक दिन हिम्मत जुटाकर उस ने मुझे केंटीन में जाते हुए रोक लिया था. उस की आवाज में कंपन थी.

        उस ने कांपते हुए मुझे कोफी के लिये ओफर किया था. उस पर मैंने उसे घूरकर देखा था. उस की आँखों में आर्यन जैसा हीं डर था.

        उस ने मेरे कंधो को छूने की कोशिश की लेकिन डर के मारे पीछे हट गया.

        मैंने उस के सामने मेरी झूल्फ़े हटाई और ब्लाउज की डोरी ढीली कर दी  तो उसे पसीना छूट गया.

        उस ने डोरी तो पकड़ ली पर उसे खींचने की हिम्मत जूटा नहीं पाया.

        मैंने करण को वही छोड़ दिया.

        उस के बाद मैंने तय किया था मैं किसी डरपोक से दिल नहीं लगाउंगी. 

        फिर एक दिन शाम मेरी मुलाक़ात समीर से हुई. वह ट्रैनर था. उस में आर्यन और करण जैसा डर नहीं था.

        एक दिन वर्क आउट करते वक़्त उस ने मेरी कमर को पीछे से कसकर पकड़ लिया. उस की गर्मी उन दोनों से बिल्कुल अलग थी.

        समीर ने अपनी पकड़ मजबूत कर ली. उस का सीना मेरी पीठ से बिल्कुल चिपक गया था.

         मैंने पलटकर देखा तो वह मुस्कुरा रहा था. सोचो उस वक़्त मेरी धड़कने कितनी तेज हो गई होगी.

         समीर ने मेरे कानो के पास मुंह ले जाकर धीमी आवाज में कहां : " आज तुम काफ़ी बेचैन लग रही हो "

          उस का हाथ धीरे से मेरी टी शर्ट के भीतर सरक ने लगा. उस की हिम्मत देखकर मुझे बहुत ताजुब हुआ.

          समीर का गर्म हाथ मेरी नंगी छाती पर टिक गया तो मानो मेरी सांसे रुक सी गई. 

          उस ने हक से मेरी स्पोर्ट ब्रा के हूक्स को टटोलना शुरू किया. उस ने धीरे से ब्रा के हूक्स खोल दिये. मेरी छाती बिल्कुल आज़ाद हो गई और उस की नजर वहाँ टिक गई.

         उस का स्पर्श इतना गरम था की मैं सब कुछ भूल गई. मैं उस वक़्त मेरे बारे में सोचती थी.  

         समीर ने मेरी  छाती को अपने गर्म हाथो में कैद कर लिया और कसकर दबाने लगा. उस की नजरो में एक अजीब सी भूख थी. जिम के कोने में हम दोनों अकेले थे.

         मैंने अपनी आंखे बंद कर ली और उस की गर्मी महसूस करने लगी..

          उस ने होठो की तरफ झुककर धीरे से कहां. " तुम्हारी यह गर्मी मुझे पागल कर देगी. "

         उस ने मुझे अपनी आगोश में कैद कर लिया और मेरी स्पोर्ट्स ब्रा को नीचे सरका दिया. वह आग आर्यन की आग से भी बड़ी तेज थी.

          समीर ने मेरे निप्पल्स को अपने होठो में भर लिया और उसे कसकर चूस लिया. वह आग मेरे बदन को बुरी तरह जला रही थी.

         उस ने मुझे दीवार से सटाकर मेरी टी शर्ट पूरी तरह उतार दी.

         समीर ने हिम्मत की थी. उस के हाथ कमर के नीचे सरकने लगे. उस की आंखे मेरी ग़र्दन को आग लगा रही थी. उस ने मुझे अपनी बाहों में इतनी जोर से कसकर दबोच लिया था जिस से उस की धड़कन मेरे सीने में महसूस हो रही थी.

         समीर ने दीवार से सटाकर मेरे होठो पर कब्जा कर लिया था. वह आग हमारे दिल में ऐसी फेल गई थी की हम दोनों सब कुछ  भूलकर बेकाबू हो गये थे 

        समीर ने उस की टाइट जिम लेगिंग की डोर पर हाथ रखा और धीरे से उसे खींचने लगा. मैंने उसे नहीं रोका बस उस की आँखों में देखती रही.

        उस का हाथ मेरी नंगी पीठ पर सरक रहा था और मेरी सांसे बिल्कुल थम सी गई थी. वहाँ कोई भी आ सकता था. पर हमें कोई होंश नहीं था.

        समीर ने धीरे से मेरी लेगिंग नीचे सरका दी और वही जिम के कोने में मैं आज़ाद ख़डी थी.

        उस की नजरो की वह गर्मी मेरे जिस्म को जला रही थी. बेबसी महसूस करना मुश्किल था.

        समीर ने मुझे बिना कपड़ो में देखा तो उस की भी सांसे थम सी गई. वह बेबस होकर मुझे निहारता रहा.

         उस ने मुझे अपनी तरफ खिंचा और मेरी आँखों में देखा. उस के हाथो की गर्मी मेरी नंगी कमर को आग लगा रही थी.

         उस ने धीरे से अपने होठ मेरी गर्दन पर टिका दिये. मैंने आँखे बंद कर ली और उस पल में खो सी गई.

         समीर के होठ धीरे से मेरी छाती की तरफ सरकने लगे. उस का स्पर्श उतना गर्म था जिस से मैं पूर्णतः पिघल गई..

         उस ने मेरे बूब्स को अपने हाथो में भर लिया और उसे कसकर दबाने लगा. उस का स्पर्श इतना गर्म था की मैं पुरी तरह पिघल गई. मैंने कसकर उस के बाल पकड़ लिये. इतना झनून मैंने कभी  महसूस नहीं किया था.

          समीर ने मुझे अपनी बाहों में जोर से कस लिया जिस से मेरी सांसे अटकने लगी. उस ने धीरे से मेरे कानो को अपने होठों से छू लिया.

          उस ने मुझे उठाकर जिम की बेंच पर बिठा दिया. उस के गर्म हाथ अछूत अंगों पर फिरने लगे  जिस ने मेरी धड़कन को बेकाबू कर दिया.

          समीर ने अपने दोनों पैर मेरी कमर पर लपेट लिये और मुझे अपनी तरफ खिंच लिया. उस की हरकतों का अंत नहीं था. वह मुझे पटाने के लिये अजीबो गरीब खेल खेल रहा था.

        बड़ी मुश्किल से उस से पीछा छूटा था.

        और उस के बाद एक और लड़का मेरी जिंदगी में आया था.

                       0000000000  ( क्रमशः)