अर्जुन की बाहों में खुद को सुरक्षित महसूस कर रही थी… लेकिन फोन पर लिखे दो शब्द मेरे दिमाग में हथौड़े की तरह बज रहे थे —
“Next Target.”
“अब क्या होगा?” मेरी आवाज़ बहुत धीमी थी।
अर्जुन की आँखें सख्त हो चुकी थीं।
“अब खेल शुरू होगा,” उसने ठंडे स्वर में कहा।
उसने तुरंत अपने किसी खास आदमी को कॉल किया—
“सिक्योरिटी डबल कर दो। मीरा पर एक भी खरोंच नहीं आनी चाहिए।”
मैं उसे देखती रह गई।
जो आदमी मुझसे दूरी बनाकर रखता था… वही आज मेरी ढाल बन चुका था।
लेकिन किस्मत को शायद यह मंजूर नहीं था।
दो दिन सब शांत रहा।
मगर तीसरी रात…
मैं अपने कमरे में थी। बाहर तेज़ बारिश हो रही थी।
अचानक लाइट चली गई।
पूरा कमरा अंधेरे में डूब गया।
“अर्जुन?” मैंने पुकारा।
कोई जवाब नहीं।
दिल की धड़कन तेज़ हो गई।
तभी पीछे से किसी ने मेरे मुंह पर हाथ रख दिया।
मैं चीख भी नहीं पाई।
सब कुछ धुंधला हो गया…
जब मेरी आँख खुली, मैं एक अजनबी कमरे में थी।
हाथ बंधे हुए।
आँखों पर पट्टी।
दिल डर से काँप रहा था।
किसी की भारी आवाज़ गूंजी—
“तो यही है अर्जुन सिंह राठौड़ की कमजोरी?”
मेरी सांस रुक गई।
“उसे कॉल करो,” वही आवाज़ फिर बोली।
कुछ सेकंड बाद फोन स्पीकर पर लगाया गया।
“अर्जुन…” उस आदमी ने हँसते हुए कहा,
“अपनी बीवी की आवाज़ सुनना चाहोगे?”
“मीरा!” अर्जुन की घबराई हुई आवाज़ सुनाई दी।
पहली बार उसमें इतना डर था।
मेरी आँखों से आँसू बहने लगे।
“मैं ठीक हूँ…” मैंने किसी तरह कहा।
“अगर उसे जिंदा देखना है,” वह आदमी बोला,
“तो जो फाइल तुम्हारे पास है, वह हमें दे दो।”
फोन कट गया।
उधर…
अर्जुन ने दीवार पर घूंसा मार दिया।
“मैंने कहा था उसे दूर रखो…” वह खुद से बड़बड़ाया।
उसका सबसे भरोसेमंद आदमी बोला—
“सर, यह ‘शैडो ग्रुप’ के अंदर का ही कोई गद्दार है।”
अर्जुन की आँखों में आग थी।
“जो भी है… उसे जिंदा नहीं छोड़ूँगा।”
इधर…
मैंने खुद को संभालने की कोशिश की।
डर रही थी… लेकिन टूटना नहीं चाहती थी।
“तुम्हें पता भी है तुम्हारा पति कौन है?” वही भारी आवाज़ फिर गूंजी।
मैंने हिम्मत करके कहा—
“मुझे इतना पता है कि वह मुझे बचाने आएगा।”
कमरे में हँसी गूँज उठी।
“वह खुद को नहीं बचा पाएगा।”
तभी किसी ने मेरे चेहरे से पट्टी हटाई।
मेरे सामने तीन आदमी थे।
उनमें से एक को मैं पहचानती थी।
वह अर्जुन के ऑफिस में काम करता था।
“तुम?” मैंने हैरानी से कहा।
वह मुस्कुराया—
“हाँ… असली दुश्मन हमेशा पास होता है।”
मेरे दिल में डर की जगह गुस्सा आने लगा।
“तुम लोग जीत नहीं पाओगे,” मैंने कहा।
उसी वक्त दरवाज़ा जोर से टूटा।
धड़ाम!!!
अर्जुन अंदर आया।
उसकी आँखों में तूफान था।
गोलियों की आवाज़ गूंजी।
कमरे में अफरा-तफरी मच गई।
अर्जुन ने एक-एक कर सबको गिरा दिया।
उसका चेहरा खून और गुस्से से भरा था।
वह मेरे पास आया, रस्सियाँ खोलीं।
“मीरा… तुम ठीक हो?” उसकी आवाज़ काँप रही थी।
मैंने सिर हिलाया।
अचानक पीछे से एक आदमी ने अर्जुन पर बंदूक तान दी।
“पीछे हटो!”
मैंने बिना सोचे-समझे अर्जुन को धक्का दिया।
गोली चली।
मेरे कंधे में जलन फैल गई।
मैं जमीन पर गिर पड़ी।
“मीरा!!!” अर्जुन की चीख पूरे कमरे में गूँज गई।
उसने पागलों की तरह उस आदमी पर हमला कर दिया।
कुछ ही सेकंड में सब खत्म हो गया।
लेकिन मेरी आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा।
अर्जुन ने मुझे अपनी गोद में उठा लिया।
“तुमने मेरे लिए गोली क्यों खाई?” उसकी आवाज़ टूट रही थी।
मैंने मुश्किल से मुस्कुराकर कहा—
“क्योंकि… आप मेरी कमजोरी नहीं… मेरी जिंदगी हैं।”
उसकी आँखों से एक आँसू गिरा।
पहली बार।
अस्पताल…
मैं बेहोश थी।
अर्जुन मेरे बिस्तर के पास बैठा था।
डॉक्टर ने कहा—
“अब खतरा टल गया है।”
अर्जुन ने राहत की सांस ली।
जब मेरी आँख खुली, वह वहीं था।
“आप गए नहीं?” मैंने धीमे से पूछा।
वह हल्का-सा मुस्कुराया।
“अब कहीं नहीं जाऊँगा।”
कमरे में सन्नाटा था।
मैंने हिम्मत करके कहा—
“आप मुझसे नफ़रत नहीं करते… है ना?”
वह मेरी तरफ झुका।
“नफ़रत?”
“मीरा… जिस दिन तुम मेरी जिंदगी में आई, उसी दिन समझ गया था कि मैं हार गया।”
मेरे दिल की धड़कन तेज़ हो गई।
“हार गए?”
“हाँ… अपने उस नियम से कि मैं किसी से प्यार नहीं करूँगा।”
मेरी आँखों में आँसू आ गए।
उसने धीरे से मेरा हाथ पकड़ा।
“मैं तुम्हें खो नहीं सकता,” उसने पहली बार साफ शब्दों में कहा।
मैंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया—
“तो फिर मुझे दूर मत कीजिए।”
वह कुछ पल मुझे देखता रहा।
फिर धीरे-धीरे झुककर मेरे माथे को चूमा।
उस स्पर्श में नफ़रत नहीं… सिर्फ मोहब्बत थी।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई थी।
अस्पताल के बाहर…
एक काली गाड़ी खड़ी थी।
अंदर बैठा आदमी फोन पर बोला—
“प्लान फेल हो गया…
अब अगला वार और बड़ा होगा।”
उसकी आँखें ठंडी थीं।
“इस बार सिर्फ मीरा नहीं…
अर्जुन भी बचेगा नहीं।”
उधर कमरे में…
अर्जुन ने मेरा हाथ कसकर पकड़ा हुआ था।
उसे अंदाजा भी नहीं था…
कि असली दुश्मन अभी जिंदा है।
और यह जंग अभी शुरू हुई है।
(जारी रहेगा…)