आगे......
राशि अपने सामने अद्वैत को देखकर एकदम से चुप हो गई थी और किसी बेवकूफ की तरह उसे घूर रही थी। अद्वैत उसके रंग उड़े चेहरे को देखकर बिना कुछ कहे अपने हाथ में लिए बैग्स उसके सामने कर दिए।
भगर ये देखकर की वो अब भी कोई मूवमेंट नहीं कर रही। वो उसके सामने चुटकी बजाते हुए कहा- हेलो मिस कपूर कहां खो गई?
उसकी इस हरकत से जैसे उसे होश आया और वो तुरंत अपनी नजरें उससे हटा लेती है। फिर थोड़ा रूककर बोली- मम्मा कहां है?
अद्वैत अंदर जाकर बैठते हुए- घर आए मेहमान से कोई सिधे सवाल-जवाब करता है क्या? पहले हमें पानी दिजिए फिर हम आपको सब बताएंगे।
राशि उसके लिए पानी लेकर आई। पानी पिकर अद्वैत बोला- वो आंटी को चोट.... वो इतना ही बोला था कि राशि हड़बड़ा गई और परेशान हो कर पुछी- क्या हुआ मां को?
अद्वैत उसे शांत करते हुए बोला- शाम को मां और आंटी दादी के कहने पर महा गुरु के आश्रम गई थी। वहीं सिढियां उतरते वक्त उन्हें मोच आ गया। वो लोग आश्रम में ही रूकेंगे। आंटी ने कहा है कि हम आपको अपने घर ले जाएं इसलिए हम आपको लेने आए हैं।
राशि हिचकिचा गई। उसने बोलने की कोशिश की- वो भाई..!
आर्यन भाई और आयुष एक हफ्ते के लिए बाहर गए हैं। आयुष बहुत जिद्द कर रहा था।
राशि मन में बड़बड़ाने लगी- अच्छा है...अच्छा है, एक हमें छोड़कर सब अपने- अपने रास्ते चल पड़े हैं। हुंह। श्रु दी अपने होलिडे पर चली गई। मम्मी आश्रम गई है मतलब चार-पांच दिन तो हमें नज़र नहीं आएंगी और भाई भी मान को लेकर निकल लीए। मतलब सबसे बेरोजगार हम हीं हैं।
उसे ख्यालों से बाहर निकालते हुए हमारे अद्वैत जी बोले- मिस कपूर हम आपकी तरह फ्री नहीं है। जल्दी करिए और चलिए।।
राशि ने चिढ़कर उसे देखा और बड़बड़ाई - खडुस कहीं के। एक दफा अच्छे से बात कर लेंगे तो इनकी इज्जत चली जाएगी क्या।
वो बड़बड़ाते हुए ऊपर चली गई। कुछ देर बाद वो अपने कंधे पर छोटा सा बन्नी बैग टांग कर निचे आई और बोली- चलिए।।
आदि उसके बैग को देख बोला- इसमें आपके सारे कपड़े हैं? आपको चार से पांच दिन हमारे यहां रहना है।
राशि सच बोली- नहीं बिल्कुल नहीं इस बैग में सिर्फ खाने की चिंजे और कुछ पैसे हैं। हमारा एक पूरा कमरा आपके घर में मौजूद हैं। हम कपड़े लेकर क्यों जाएं।।
अद्वैत जानता था कि ये बात सच है।वो चुपचाप सर हिलाकर वहां से बाहर निकल गया। राशि ने घर की चाबी केयरटेकर को दी और कार में पिछे जाकर बैठ गई।
अद्वैत उसे रेयरवि्यु मिरर से घूरते हुए देखा और बोला- हम आपके ड्राइवर नहीं हैं। आगे आकर बैठिए।
राशि चुपचाप आगे आकर बैठ गई। उसका मूड ख़राब हो चुका था। उसने सोचा था उसकी फिलिंग्स के बारे में जानने के बाद एटलिस्ट अद्वैत थोड़ा तो अच्छे से बिहेव करेगा या उस बारे में बात करेगा मगर ऐसा कुछ नहीं हुआ।वो बिल्कुल नॉर्मल था।
वो मन ही मन सोची- हां, कैसे ही फर्क पड़ेगा। इन्हें तो ये सुनने की आदत ही हैं। इनकी बाकी गर्लफ्रेंड्स की तरह हमने भी बोल दिया जिसपर ये ध्यान देना जरूरी नहीं समझते...वो एक नज़र अद्वैत को देखी और अपना सर झुका ली।
अद्वैत सामने देखते हुए ड्राइव कर रहा था। बिच-बिच में वो राशि को भी देख लें रहा था।। रात गहरा गई थी। वो लोग इस वक़्त ट्रैफिक में फंसे हुए थे।
थोड़ी देर बाद ट्रैफिक क्लियर नहीं हुआ तो अद्वैत ने दूसरे रास्ते पर गाड़ी मोड़ ली। ये रास्ता कुछ लंबा था।
बनारस,
देर रात श्रुति ड्रेस की स्केच बनाती रही और फिर जाकर बालकनी में खड़ी हो गई। खुद को अपनी बाहों में समेटे हुए उसकी नज़र अस्सी घाट पर थी। अचानक उसके ज़हन में एक पुरानी याद कौंध गई।।
एक छोटी सी लड़की लोगों की बिच में फस चुकी थी। वो पापा-पापा कहते हुए इधर-उधर जाने की कोशिश कर रही थी। मगर लोगों की भिड़ में कुछ कर नहीं पा रही थी अचानक सिढी से उसका पैर फिसला और छपाक की आवाज़ के साथ वो पानी में गिर गई।
उसे तैरना नहीं आता था। छपाक की आवाज़ एक बार फिर हुई। वो छोटी सी लड़की अपने हाथ पैर मार रही थी मगर पानी के बहाव के कारण कोई भी पानी में नहीं जा रहा था।
तभी किसी ने उसे अपने गोद में उठाकर बाहर निकाला। सब ये देखकर हैरान हो गए की यह एक तेरह- चौदह साल का एक लड़का था। वो लड़की अपनी बंद होती हुई आंखों से देखी और बुदबुदाई-डेविल तुम...!
एक तेज़ हवा के झोंके ने श्रुति को वर्तमान में वापस खिंचा। श्रुति के होंठों पर एक दर्द भरी मुस्कान आ गई। वो धीरे से बोली- तुम शायद बहुत बदल गए होगे डेविल। तुम्हें मैं याद भी नहीं होंगी। कैसे याद होंगी कोई ऐसी थोड़ी ही हुं जिसे याद रखा जाए।।
यही वो जगह है जहां मैं तुमसे पहली और आखिरी बार मिली थी। तुम तो मुझे भूल गए मगर मैं तुम्हें नहीं भूली और ना ही कभी भूल सकती हुं। सबको अपने लिए प्रिंस चाहिए होते हैं मगर मुझे मेरा डेविल चाहिए पर....घाट के पानी को देख- शायद हम नदी के वो किनारे हैं जो साथ चल तो सकतें हैं मगर साथ हो नहीं सकते। हमारा दूर रहना ही अच्छा है। थोड़ी देर बाद वो सोने चली गई।
ईशान अपने बेड पर लेटा लैपटॉप पर कोई प्रोजेक्ट की डीटेल पढ़ रहा था। उसे अब भी सर दर्द दे रहा था। उसने लैपटॉप बंद कर साइड किया और बेड पर लेटकर आंखें बंद कर लिया। अनायास ही उसके सामने श्रुति का अपने चश्मे को एडजस्ट करना याद आ गया।
उसने झट से अपनी आंखें खोली और बोली- आह! ईशान
तू उस पागल लड़की के बारे में मत सोच। सोचना है तो उस रावत से निपटने के बारे में सोच।
दूसरी तरफ,
अद्वैत घर की तरफ जा ही रहा था कि उसे कोई सड़क पर गिरा हुआ दिखा। उसने अचानक ब्रेक मारा। राशि जो बिना सिट बेल्ट के बैठी थी उसका सर तेज़ी से डैशबोर्ड की तरफ बढ़ा मगर समय रहते अद्वैत ने अपना हाथ रख उसे चोट लगने से बचा लिया।
राशि उसके तरफ देखी तो अद्वैत फौरन उससे नजरें हटाते हुए बोला- शायद किसी को चोट आई है। हम देखते हैं।
राशि फौरन उसका हाथ पकड़ कर बोली- नहीं हमें कुछ ठीक नहीं लग रहा। आप बाहर ना जाएं।
आद्वैत ने अपने हाथ को देखा जिसे राशि ने शायद पहली बार अपनी मर्जी से पकड़ा था।राशि की भी नजर दोनों के हाथ पर गई उसने फौरन हाथ छोड़कर कहा- बाहर खतरा हो सकता है।
अद्वैत जो उसके तरफ़ स्नेह से देख रहा था चिढ़कर बोला- आपको हमारी चिंता करने की जरूरत नहीं है। बस आप कार से मत निकालना कहकर वो उतर गया।
To be continued......
आखिर क्या है श्रुति के जिंदगी का राज?
क्या कभी मिलागा श्रुति को उसका डेविल?
कैसे निपटेगा ईशान रावत से अकेले?
क्या सच में अद्वैत किसी मुसिबत में है?
जानने के लिए करें थोड़ा इंतजार