Dark Night - Part 4 in Hindi Thriller by Reena books and stories PDF | अंधेर रात - भाग 4

The Author
Featured Books
  • दरवाजा: काली हवेली का श्राप - 5

    एपिसोड 5 — “जिसने श्राप दिया… वो तुम ही थी”हवा… थम गई थी।पूर...

  • Bayaan - Part 17

    Part 17 "अगले चार महीने..."ये चार महीने मेरी ज़िंदगी के सबसे...

  • Sirf Tumhara - 5

    **Sirf Tumhara**  **Part 5**अंश का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा...

  • Conversations With Myself - 2

    शाम धीरे-धीरे ढल रही थी।पूरा दिन जैसे आँसुओं में भीगकर निकल...

  • Mafia King - 6

    जगह कोई आम ठिकाना नहीं, बल्कि 'रॉयल फिटनेस होटल' था।...

Categories
Share

अंधेर रात - भाग 4



मुख्य दरवाज़ा खुला था।
कॉरिडोर की सफेद लाइट्स झिलमिला रही थीं… और उसी रोशनी में आयुष ने उसे देखा—
वो खुद था।
उसी की ऊँचाई, वही चेहरा, वही कपड़े… यहाँ तक कि हाथ में वही टूटा हुआ फोन।
लेकिन फर्क सिर्फ एक था—
उसकी मुस्कान।
वो मुस्कान इंसानी नहीं थी… जैसे कोई और उसके चेहरे के अंदर छुपा बैठा हो।
आयुष के मुँह से आवाज़ तक नहीं निकली।
“ये… ये कैसे…”
दरवाज़े के बाहर खड़ा “दूसरा आयुष” धीरे-धीरे अंदर आया। उसके कदमों की आवाज़ नहीं थी, लेकिन फर्श पर पानी के निशान बनते जा रहे थे।
पीछे खड़ी नंदिनी ने फुसफुसाया—
“यही है…”
आयुष ने उसकी तरफ देखा— “कौन है ये?”
नंदिनी की आँखों में डर था, गुस्सा था… और दर्द भी।
“तुम्हारा साया… जो उस रात आया था।”
आयुष का दिमाग घूम गया।
“झूठ… ये सब झूठ है…”
दूसरा आयुष हँस पड़ा। उसकी हँसी दीवारों से टकराकर गूँजने लगी—
“झूठ वही होता है, जिससे तुम भागते हो।”
वह अब बिल्कुल सामने खड़ा था। दोनों के बीच बस एक कदम का फासला था।
आयुष ने देखा— उसकी आँखें काली थीं… बिल्कुल नंदिनी जैसी।
“तू… है कौन?”
दूसरा आयुष झुककर उसके कान के पास आया और फुसफुसाया—
“मैं वो हूँ… जो तू बनना चाहता था।”
आयुष पीछे हट गया।
“मैं ऐसा नहीं हूँ!”
“पर उस रात था…”
कमरे की लाइट अपने आप जल उठी।
अचानक सब कुछ साफ दिखने लगा—
और जो दिखा… उसने आयुष को अंदर से तोड़ दिया।
फर्श पर खून के धब्बे थे… पुराने, सूखे हुए… जो अब तक उसने कभी नहीं देखे थे।
बाथरूम की दीवार पर खरोंच के निशान थे—
जैसे किसी ने बाहर निकलने की कोशिश की हो।
आयुष का सिर घूमने लगा।
“ये… ये पहले नहीं था…”
नंदिनी की आवाज़ आई—
“तुम देखना नहीं चाहते थे।”
दूसरा आयुष आगे बढ़ा।
उसने हाथ उठाया… और अचानक आयुष के सिर को जोर से पकड़ लिया।
एक झटके में सब बदल गया।
अब आयुष अपने कमरे में नहीं था।
वो उसी रात में खड़ा था… 6 महीने पहले वाली रात।
बारिश हो रही थी।
नंदिनी सामने खड़ी रो रही थी—
“तुम मुझे यूज़ कर रहे हो!”
आयुष (पुराना वाला) गुस्से में चिल्लाया—
“ड्रामा बंद करो!”
उसने नंदिनी को धक्का दिया।
वो बाथरूम के पास गिरी… सिर टकराया… खून निकला।
आयुष (अभी वाला) चिल्लाया— “रुक जा!”
लेकिन वो सिर्फ देख सकता था, बदल नहीं सकता था।
पुराना आयुष डर गया।
उसी वक्त दरवाज़े पर दस्तक हुई।
टक…टक…टक…
पुराने आयुष ने दरवाज़ा खोला।
बाहर कोई नहीं था।
लेकिन जैसे ही उसने पीछे मुड़कर देखा—
वो “दूसरा आयुष” उसके कमरे में खड़ा था।
वही काली आँखें… वही मुस्कान।
उसने धीरे से कहा—
“अब ये मेरा है…”
और फिर सब कुछ तेजी से हुआ।
नंदिनी उठने की कोशिश कर रही थी…
दूसरा आयुष उसके पास गया…
और…
उसने उसे खत्म कर दिया।
आयुष की चीख निकल गई—
“नहीं!!!”
दृश्य टूट गया।
वो वापस अपने कमरे में था।
घुटनों के बल गिरा हुआ… पसीने से भीगा… आँखों में आँसू।
“मैंने… मैंने नहीं किया…”
दूसरा आयुष उसके सामने खड़ा था।
“पर रोका भी नहीं।”
नंदिनी धीरे-धीरे पास आई।
उसने आयुष के सामने झुककर कहा—
“सच से भागना बंद करो…”
आयुष ने सिर उठाया— “अब क्या चाहता है तू?”
दूसरा आयुष मुस्कुराया—
“बस… जगह बदलनी है।”
कमरे की सारी लाइट एक साथ बंद हो गई।
पूरा फ्लैट अंधेरे में डूब गया।
और उस अंधेरे में सिर्फ एक आवाज़ आई—
“अब तू बाहर जाएगा… और मैं अंदर रहूँगा।”

To be continued…

अगर चाहो तो Part 5 में सबसे बड़ा ट्विस्ट आएगा — आयुष बच पाएगा या उसकी जगह कोई और ले चुका होगा।
    Reena @loht ✍️