Paths - 7 in Hindi Crime Stories by shiromani mathur books and stories PDF | राहें - 7

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राहें - 7

आज का सत्य

भवन निर्माण का कार्य चल रहा था। पवन काम की देखभाल
कर रहा था, तभी एक अपरिचित व्यक्ति आकर बोला आप यहाँ 
देखभाल का काम करते हो? क्या आपका ही नाम पवन है?
पवन बोला - 'हॉ मेरा ही नाम पवन है, और मैं यहाँ सुपरवाइजर
हूँ- उसने सोचा काम की तलाश में यह व्यक्ति मुझे पूछता हुआ
यहाँ आया है- फिर बोला - "बोलो क्या काम है?"
अपरिचित बोला - तुम मेरे साथ चलो। सरदार ने तुम्हें बुलाया है।
पवन हड़बड़ाकर बोला - कौन सरदार?
अपरिचित बोला - हमारा सरदार।
पवन ने आश्चर्य से उसे देखा और ना जाने की मुद्रा में सिर
हिलाया।
अपरिचित ने रिवाल्वर दिखाते हुये बोला - "'चलते हो या
नहीं-?"
प्राणों को संकट में देख वह उसके पीछे पीछे चल दिया। कुछ
दूरी पर उसकी मोटर साइकिल खड़ी थी। दोनो मोटर साइकिल से
चल दिये। पवन घबराया सा मोटर साइकिल पर बैठा था, अपने
जीवन के लिये ईश्वर से प्रार्थना करता जा रहा था, उसे कुछ भी पता
नही कि वह कहाँ और क्यों जा रहा है? अपरिचित बिना बताये लिये
जा रहा था और वह उसके साथ मोटर साइकिल पर बैठा था।
लगभग 30-35 किलोमीटर चलने के बाद घने जंगल में उसने
गाड़ी रोक दी। अब दोनो पैदल चलने लगे, लगभग दो किलोमीटर
पैदल चलने के बाद वे लोग सरदार के डेरे पर पहुँचे। थोड़ी देर
पत्थरों पर बैठे रहे, बाद में सरदार ने उन्हें डेरे के अंदर बुलवाया।
सरदार ने पवन से पूछा क्या नाम है?
थरथर कॉपते हुये वह बोला- जी पवन नाम है। पवन को अपना
जीवन संकट में लग रहा था ।
सरदार ने पूछा - क्या काम करते हो?
पवन ने बताया - सुपरवाइजर हूँ, भवन निर्माण का काम चल
रहा हैं, उसी की देखभाल करता हूँ।
सरदार ने पूछा - किस ठेकेदार का काम है?
पवन ने बताया - गौतम चंद सेठ का।
सरदार ने पूछा - कितने का टेंडर है ?
पवन ने बताया बीस करोड़ का।
सरदार - क्या बिल्डिंग बना रहे हो?
पवन - अस्पताल बिल्डिंग और स्कुल बिल्डिंग दोनों का काम
चल रहा है।
सरदार - दोनो काम तुम्ही देखते हो?
पवन ने कहा - हॉ, मेन काम मैं ही देखता हूँ। वैसे और भी
आदमी है जो काम देखते हैं। साइट पर मैं ही रहता हूँ ।
सरदार ने पूछा "ठेकेदार कब कब साइट पर आता है?"
पवन ने कहा - वे कभी कभी साइट पर आते है। उनका मैनेजर
आता जाता है।
सरदार बोला - अपने ठेकेदार से कहो कि काम का पॉच
प्रतिशत हमें दे और गॉव में बरातूराम के घर एक ट्रक सीमेंट व पॉच
ट्रक ईट और दो ट्रक गिट्टी डाल दे।
पवन बोला - काम का पॉच प्रतिशत ठेकेदार नहीं दे पायेंगें ।
सरदार बोला - तू कुछ मत बोल, जितना बोल रहा हूँ उतना
कर, तू सिर्फ अपने सेठ को जाकर बता। ठेकेदार व्यवस्था करेगा,
नहीं तो तेरे ठेकेदार को हम देख लेंगे ।
कांपते हुये पवन बोला - ठीक है कह दूँगा वैसे बरातूराम का
घर कहाँ है?
अपरिचित की ओर ईशारा करते हुये सरदार बोला "यह
दिखा देगा। सब काम 15 से 20 दिन के अन्दर हो जाना चाहिये ।
अगर हमारा काम नहीं हुआ तो तुम्हारी और तुम्हारे ठेकेदार की खैर
नही, समझा । और ये सब बातें किसी को नहीं बोलोगे थाने में रिपोर्ट
की तो काम करने नहीं देगें, हम लोग।"
अपरिचित की और देखकर सरदार बोला "इसको छोड़
आओ।"
डरता-डरता पवन वापस आया। उसे अपने जीवन पर खतरा
लग रहा था। आते- आते उसे रात हो गई। दिन भर उसने कुछ
खाया नहीं था इसलिये उसके हाथ पॉव सब ढीले हो रहे थे। रात
में अपने कैम्प पर आकर उसने खाना खाया। किसी से कुछ कहते
भी नहीं बन रहा था। सुबह उठकर वह अपने मालिक गौतमचंद के
पास शहर आया ।
पवन ने एक अपरिचित व्यक्ति के साथ घने जंगल जाने और
वहाँ पर दस्यु सरदार की मॉगे व सब बातें सेठ को बतलायी। पॉच
प्रतिशत की बात पर गौतमचंद ने कहा - "कि भाई तू भी तो देख रहा
है कितने खर्चे हैं, पॉच प्रतिशत उनको कहाँ से दे पाऊँगा? अभी तो
ऐसेम्बली चुनाव में सभी पार्टी को चंदा दे चुका हूँ। ठेकेदार तो सब
की लुगाई होता है, जिसको चंदा ना दो तो वह ही नाराज हो जाता
है। पार्टी न, 1 और पार्टी न. 2 दोनों को व उनके कार्यकर्ताओं
को सबको खुश रखना होता है। पत्रकारों का खर्चा और
आफिस का खर्चा भी तो होता है।"
पवन बोला - परन्तु मालिक यहाँ तो जान का भी खतरा है?
सेठ बोले - हॉ तुम ठीक कहते हो, कुछ ना कुछ व्यवस्था
करता हूँ। यदि तुम्हें वह अपरिचित व्यक्ति दिखता है तो उससे

कहना कि भैया मैं पाच प्रतिशत पूरा नही दे पाऊगा वे भी मेरी बात
समझने का प्रयास करें। थोड़ी बहुत मदद मैं कर दूँगा। बरातूराम के
घर ईटा, गिट्टी व सीमेंट भेज देता हूँ । तुम जाकर बरातूराम का घर
कहाँ है? देख कर आओ और कहॉ मैटेरियल डालना है, देखकर
आओ।
पवन बोला - वह अपरिचित जैसे ही मिलता है तो उससे बात
करूगा।
अब पवन साइट पर काम में घबराने लगा, सोचता - पता नहीं
कब क्या हो जाये । साइट पर रहने वालों को हर समय खतरा बना
रहता है। कब किस वेश में कौन आ जाये। कभी नेता, कभी पत्रकार,
कभी पर्यवेक्षिक अधिकारी, कभी आसपास गाँव के छुट्टभैये नेता कभी
रेत तो कभी गिट्टी की मॉग करते और कभी दस्यु दल के लोग
आकर उससे कुछ ना कुछ बेगारी लगाते रहते हैं, और डरातें धमकाते
रहते है। साइट पर रहना भी कठिन काम होता है।
सेठ ने पवन को समझाया और पवन साइट पर चला गया। सेठ
ने अपने मैनेजर को साइट भेजकर सभी गाड़ियों को थाने में खड़े
करने व सुरक्षा प्रदान करने की मॉग पुलिस विभाग से की। जिले के
एस. पी. साहब ने गाड़ियों को थाने में खड़े करने की अनुमति दे दी।
सेठ ने थाने में रिपोर्ट तो नही की परन्तु अपने कामों पर सुरक्षा देने
की मॉग की।
लगभग 15 दिन बाद वह अपरिचित पवन के पास फिर आया
और सरदार की मॉगों को दोहराया-
पवन बोला ---भाई बरातूराम का घर मुझे दिखा दो ,मैं ईटा,
गिट्टी, सीमेन्ट वहाँ भिजवा देता हूँ।
अपरिचित (बाद मैं उसका नाम पता चला दयाराम है) -ने
पवन को बरातूराम का घर दिखा दिया। घर देखने के बाद पवन
बोला भैया मैटेरियल तो मैं कल ही भेजवा दूँगा, परन्तु पॉँच
प्रतिशत दे पाना कठिन होगा इस विषय में मैने सेठ से बात की है,
उन्होने कहा है इतनी य्यवस्था नही हो पायेगी थोड़ी बहुत सेवा कर
देंगें।
दयाराम बोला - यह सब मैं नही जानता तुम्हें सरदार से
मिलवा देता हूँ तुम्हीं बात कर लेना फिर सरदार समझे क्या करना
है क्या नहीं ? अभी तो सरदार दौरे पर गयें हैं । जब उनके आने की
खबर मिलेगी तो मै आपको उनसे मिलवा दूँगा। तब तक आप
मटेरियल भिजवाओ । पवन ने ईटा, गिट्टी, सीमेन्ट बरातूराम के घर
दूसरे दिन से डलवाना शुरू कर दिया।
गाड़ियाँ थाने में खड़ी करने से सेठ थोड़ा निश्चंत थे। सेठ
गौतमचंद के मैनेजर - राकेश थाने गये तो थानेदार ने कहा - कि
भैया आपके पास तो गिट्टी, सीमेन्ट का काम चलता रहता है। हमारे
थाने से जाने वाले रोड को भी कॉक्रीट का पक्का बनवा दो। बरसात
में गाड़ी निकालने में बड़ी परेशानी होती है।
राकेश ने कहा जरूर साहब, मै बनवा दूँगा और राकेश ने
साइट पर आकर पवन से कहा किे जैसा थानेदार साहब कहें वैसा
उनका रोड बनवा दो। साहब लोग हमको सुरक्षा देते हैं।
पवन ने थाने का रोड बनवा दिया थाने का रोड बनने से पुलिस
विभाग के स्थानीय अधिकारियों से पवन और राकेश के रिश्ते अच्छे
बनते गये।
चुनाव की गतिविधियाँ तीब्र होती जा रही थी अधिकारियों व
नेताओं का साइट पर आना जाना स्वाभाविक था। निर्माण कार्य के
अधिकारी भी रोज साइट पर आते थे। सरकारी इन्जीनियर साहब का
बराबर निर्देश रहता था कि काम सही होना चाहिये जरा सी भी
गड़बड़ी हुयी तो शिकायत ऊपर तक जायेगी और पत्रकार लोग
मनमाने छापेंगें इसलिये काम में गुणवत्ता बनी रहनी चाहिये। कई
बार अधिकारी जॉच करने आते और अपनी प्रतिक्रिया लिखकर जाते,
ठेकेदार के लोग हर बार जॉच में सहयोग करते और शिष्टाचार
निभाते।
होली का अवसर था थाने में शान्ति समिति की बैठक चल रही
थी। बैठक समाप्ति के बाद थानेदार ने राकेश जी को अपने पास
बुलाकर बड़े मीठे स्वर में कहा कि भाई रोड तो बन गया परन्तु
थाना प्रांगण पूरा गन्दा रहता है, आप थाने में पेवर बिछा दो तो यहाँ
भी साफ सफाई रहेगा।
राकेश जी बोले साहब इसमें बहुत खर्चा आयेगा। हमारी
कम्पनी इतना खर्च नही उठा पायेगी। वैसे भी हमारी कम्पनी काफी
लॉस में जा रही है।
थानेदार इस बात से नाराज हो गये उन्होनें ठेकेदार की
शिकायत एस.पी. साहब से कर दी और एस.पी. साहब ने दौरे में आये
कलेक्टर से कहा - कि ठेकेदार के निर्माण- कार्य गुणवत्ता विहीन
है- कलेक्टर ने निर्माण कार्यों के लिये कमेटी बनाकर जॉँच करने का
आदेश दे दिया।
                                     डॉ. शिरोमणि माथुर 
                                     दल्ली राजहरा
shiromanimathur@gmail.com 
9893742299