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Miss khan

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@abdulsamad.297328


मोहब्बत की खामोशी

कभी तेरी याद बारिश बनकर बरसती है,
कभी तेरी कमी दिल में चुपचाप उतरती है।

न कोई शिकायत, न कोई गिला है तुझसे,
बस तेरे बिना हर खुशी अधूरी लगती है।

तू साथ हो तो हर रास्ता आसान लगे,
तेरे बिना हर मंज़िल भी वीरान लगे।

कुछ रिश्ते किस्मत से मिलते हैं,
और कुछ उम्र भर दिल में बसते हैं।

अगर मोहब्बत सच हो,
तो फ़ासले भी हार जाते हैं,
और अगर झूठ हो,
तो पास रहकर भी लोग बिछड़ जाते हैं।

इसलिए मैंने तुझे दुआओँ में रखा है,
ज़िद में नहीं...
क्योंकि जो सच में अपना होता है,
वो एक दिन लौट ही आता है।

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मैं लड़की हूँ,
मुझे कमज़ोर समझने की भूल मत करना,
मैं टूटती ज़रूर हूँ,
लेकिन हर बार पहले से ज़्यादा मज़बूत होकर सँवरती हूँ।

मेरी मुस्कान देखकर
मेरी ज़िंदगी आसान मत समझ लेना,
मैंने भी कई रातें
तकिए को आँसुओं से भिगोकर गुज़ारी हैं।

हाँ, मैं चुप रहती हूँ,
मगर इसका मतलब ये नहीं कि मुझे दर्द नहीं होता,
बस मैंने सीख लिया है,
हर ज़ख्म दुनिया को दिखाया नहीं जाता।

मैं किसी की ज़रूरत बनना नहीं चाहती,
मैं किसी की इज़्ज़त बनना चाहती हूँ,
मोहब्बत मिले तो सिर आँखों पर,
वरना अकेले चलना भी मुझे आता है।

मेरे सपनों की कोई कीमत नहीं लगा सकता,
क्योंकि मैंने उन्हें अपने हौसलों से सींचा है,
मैं किसी के नाम से नहीं,
अपनी पहचान से जानी जाना चाहती हूँ।

अगर मेरी ख़ामोशी को मेरी हार समझोगे,
तो ये तुम्हारी सबसे बड़ी ग़लतफ़हमी होगी,
क्योंकि मैं वक्त आने पर
अपने हक़ के लिए पूरी दुनिया से लड़ सकती हूँ।

मैं लड़की हूँ,
कोई कमज़ोरी नहीं, एक ताक़त हूँ,
जो मुझे समझ ले, वही मेरा अपना है,
बाक़ी लोगों के लिए मैं सिर्फ़ एक अधूरी कहानी हूँ।

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इश्क़ की आख़िरी दुआ
लोग कहते हैं कि मोहब्बत इंसान को पूरा कर देती है,
पर किसी ने ये नहीं बताया कि वही मोहब्बत एक दिन अधूरा भी कर देती है।
जिसे अपनी हर दुआ में माँगा था,
उसी को एक दिन अपनी दुआओं से रुख़्सत करना पड़ा।

मैंने तुम्हें सिर्फ़ चाहा नहीं था,
अपनी हर साँस में बसाया था,
तुम मेरी आदत भी थे,
और मेरी सबसे खूबसूरत इबादत भी।

जब तुम साथ थे तो हर मौसम बहार लगता था,
बारिश भी दुआ लगती थी, धूप भी प्यार लगती थी,
फिर एक दिन तुम चले गए,
और वही दुनिया मुझे वीरान नज़र आने लगी।

तुम्हारे जाने के बाद मैंने मुस्कुराना तो सीख लिया,
मगर दिल से हँसना कभी नहीं आया,
चेहरे पर सुकून का नक़ाब पहन लिया,
लेकिन अंदर का शोर कभी ख़ामोश नहीं हुआ।

कभी-कभी सोचता हूँ,
अगर तुम लौट भी आओ तो क्या पहले जैसा सब हो पाएगा?
शायद नहीं...
क्योंकि टूटे हुए दिल जुड़ तो जाते हैं, मगर पहले जैसे नहीं रहते।

अब मेरी दुआ सिर्फ़ इतनी है,
जहाँ भी रहो, हमेशा मुस्कुराते रहो,
अगर मेरी मोहब्बत सच्ची थी,
तो मेरी दुआएँ तुम्हें हर दर्द से बचाती रहेंगी।

और मैं...
मैं तुम्हारी यादों के साथ जीना सीख लूँगा,
क्योंकि कुछ मोहब्बतें मुकम्मल होकर नहीं,
अधूरी रहकर हमेशा के लिए अमर हो जाती हैं।

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