मैं लड़की हूँ,
मुझे कमज़ोर समझने की भूल मत करना,
मैं टूटती ज़रूर हूँ,
लेकिन हर बार पहले से ज़्यादा मज़बूत होकर सँवरती हूँ।
मेरी मुस्कान देखकर
मेरी ज़िंदगी आसान मत समझ लेना,
मैंने भी कई रातें
तकिए को आँसुओं से भिगोकर गुज़ारी हैं।
हाँ, मैं चुप रहती हूँ,
मगर इसका मतलब ये नहीं कि मुझे दर्द नहीं होता,
बस मैंने सीख लिया है,
हर ज़ख्म दुनिया को दिखाया नहीं जाता।
मैं किसी की ज़रूरत बनना नहीं चाहती,
मैं किसी की इज़्ज़त बनना चाहती हूँ,
मोहब्बत मिले तो सिर आँखों पर,
वरना अकेले चलना भी मुझे आता है।
मेरे सपनों की कोई कीमत नहीं लगा सकता,
क्योंकि मैंने उन्हें अपने हौसलों से सींचा है,
मैं किसी के नाम से नहीं,
अपनी पहचान से जानी जाना चाहती हूँ।
अगर मेरी ख़ामोशी को मेरी हार समझोगे,
तो ये तुम्हारी सबसे बड़ी ग़लतफ़हमी होगी,
क्योंकि मैं वक्त आने पर
अपने हक़ के लिए पूरी दुनिया से लड़ सकती हूँ।
मैं लड़की हूँ,
कोई कमज़ोरी नहीं, एक ताक़त हूँ,
जो मुझे समझ ले, वही मेरा अपना है,
बाक़ी लोगों के लिए मैं सिर्फ़ एक अधूरी कहानी हूँ।