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AbhiNisha

AbhiNisha

@abhinisha
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हां मैं हमारे अमर्यादित स्त्री
कविता


हां मैं समाज में बड़ी अमर्यादित स्त्री हूं

उन मर्यादित स्त्रियों की तरह मैं बिल्कुल भी नहीं हूं


क्योंकि मैं दिखावा नहीं करती
मैं बिल्कुल वैसी हूं
जैसी मैं हूं
मैं झूठ नहीं बोलता
मैं जी हजूरी नहीं करती

मैं नहीं करती और स्त्रियों की तरह बड़ों बुड़ो की सम्मान
बस इसलिए कि वह बड़े और बूढ़े हैं

मैं नहीं करती घर की वह सभी काम
जो बरसों से स्त्री के नाम मर्यादित होने के तौर पर
स्त्री पर एक बोझ सी लादी गई है




उन सभी की
अपने बड़ों की छोटो की ख्याल रखने की
जिम्मेदारियां उठाने की
तीन समय उनके लिए रोटियां पकाने की
24 घंटे उनके लिए ही जीने की


मैं नहीं कर सकती
क्योंकि मुझ में धैर्य नहीं है


मैं नहीं करती
मैं बेवाक सी स्त्री
वही करती हूं जो मेरा मन भाता है


मैं किसी के हिसाब से अपने समय नहीं देती
मेरा समय स्वयं बस मेरा है


उसे मैं अपनी जरूरत
और अपने हिसाब से ही खर्च करती हूं



हां मैं समाज में बहुत ही अमर्यादीत स्त्री हुं


क्योंकि मुझे मुखौटे पहनने का शौक नहीं
मैं वही शक्ल लेकर चलती हूं
जो मेरा है

मैं दूसरों की तरह नियंत्रण चेहरा नहीं बदलती
दिखाबा के लिए
मैं हद से ज्यादा अच्छी नहीं होती



कोई मेरी बात पर यकीन करें
बस सिर्फ इसलिए मैं मीठी बातें नहीं बोलती



मुझे फर्क नहीं पड़ता कोई साथ रहे या ना
बस किसी के साथ पाने के लिए
खुद को नहीं बदलती



मैं कभी जरूरत से ज्यादा अच्छी नहीं होती
मैं जैसी हूं
उसे समाज में अमर्यादीत कहते हैं


पर मेरा एक सवाल है अखिल मर्यादित होना क्या है
क्या खुद को मार कर
दूसरे के लिए सुख का कामना करना मर्यादित है



क्या खुद की ना सम्मान कर के
बड़ों की बातों की सम्मान रखना मर्यादित है

बस इसलिए कि वह बड़े हैं अपने हैं
चाहे उसके लिए खुद की सांस गिरवी क्यों न रखने पड़े



क्या मर्यादित उसे कहते हैं
जो मुंह पर अच्छे बनते हैं
और पीठ पीछे बुराई करते हैं



क्या मर्यादित होना इसे कहते हैं
जो किसी को ना नहीं कहते
चाहे उसके लिए खुद को दर्द क्यों ना हो



क्या मर्यादित उसे कहते हैं
समाज के हिसाब से जिंदगी गुजर दे
चाहे खुद को पता चल ही ना कि
वह कौन है
और क्यों जी रही है


अगर मर्यादित होना उसे कहते हैं
जो दूसरों के लिए
अपनी जिंदगी को बर्बाद कर दे


अपने होने ना होने की खबर जाने बिना
तो मै अमर्यादित स्त्री ही सही



और मुझे कोई शौक नहीं है
समाज के हिसाब से चलने की
और उनके नज़रों में मर्यादित पूर्व शांति स्त्री बनने की



मुझ में तूफान है अंगार है एक धधकती हुई ज्वाला है

जो शांत नहीं जो पूझा नही
वह ठहेर ठहेर कर ऊठती रहती है धधकते रहती है
वह खुद को ढूंढने के लिए
किसी भी हद तक गुजारना हरदम तैयार रहती है

हां मैं अमर्यादित स्त्री
क्योंकि मुझे खुद को थोड़ा और जानना है
और खुद ढुंढ कर पा कर
खुद को पूरी तरह खुद का ही कहना है

हां मैं हुं आमर्यादित स्त्री

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पछतावा क्यों नहीं पता

कविता




निराशा में डूबी हुई मन
धीरे-धीरे पछतावा में जा रहा है




निराशा किस लिए है पता है
पछतावा क्यों है नहीं पता



और यह मुझे बेचैन कर रही है
और गहरी पिरा महसूस करने पर मजबूर कर रही है


पर वह पीरा क्या है
वह दर्द किसकी है
मुझे नहीं समझ में आ रहा
बस है अंदर दुख


और दुख में डूबे हुए एक धड़कन
जो ठहरना चाहता है
जैसे यह बेचैनी बर्दाश्त नहीं हो रही
जिसे यह घबराहट बरदास नहीं हो रही



या तो ऐ रुक जाना चाहता है
या तो ऐ चाहता है कि मैं कुछ करूं
जिसके वजह से उसे थोड़ी राहत मिले


उस पछतावे को जानू
जो निराशा की वजह से आया है
उस दर्द को पहचानो जो मैं महसूस कर रही हूं


और सच कहूं तो
मुझे समझ में नहीं आ रहा
क्यों और क्या


मुझे नहीं समझ में आ रहा है
कि क्यों पछतावा हो रहा है
मैं मुझे नहीं समझ में आ रहा है
कि मेरा जो दर्द है
वह क्या है


वह पछतावे की दर्द
मेरे खुद की बेकार जिंदगी बिता देने की बात की है
या किसी और की दर्दों को महसूस करके मुझे
पछतावा हो रहा है


सच कहूं तो मुझे नहीं पता
मैंने उम्र भर खुद के लिए क्या किया
और दूसरों के लिए क्या नहीं किया


मुझे नहीं पता इस तरफ इस बेचैनी
इस बहते हुए आंखों
और इस पछतावे की असली मतलब

मुझे नहीं पता

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मैं भी दूसरों के लिए रोए



क्या कभी किसी और के लिए रोया है
मैं जिंदगी भर सोचती रही मैं सेल्फिश

इसमें दो राय नहीं है
मैं सचमुच में सेल्फिश हूं


खुद की आजादी के लिए मैं दुनिया छोड़ सकती हुं

और वसी अगर किसी को अपनी मानलु तो
उसके लिए मैं खुद को तोड़ दूं




मै ऐसे ही हुं
थोड़ी सी जिद्दी थोड़ी सी बेपरवाह
थोड़ी सी पागल



लोग मुझे मतलबी कहते हैं
पर मैं भी दूसरों के लिए रोती हुं


मेरे सीने में भी दिल ही है पत्थर नहीं
और यह दिल इंसानी जज्बातों से भरी हुई है



हां मैं भी दूसरों के लिए रोया
और बहुत रोया

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मेरी कटी हुई बालों को देख रहे हैं
कविता


सब मेरी कटी हुई बालों को देख रहे हैं
मेरी थकी हुई आंखों को नहीं
सब मेरे कटे हुए बालों को देख रहे हैं
मेरे बेजान परे हुए जिस्मो को नहीं

कहते हैं बाल काटने के बाद
मैं अच्छी नहीं दिख रही
मेरी सुंदरता गायब हो गई है


लोग मेरी सुंदरता को देख रहे हैं
मेरे अंदर चल रही हलचल को नहीं


लोग मेरे कटे हुए बालों को देख रहे हैं
मेरे दर्द को नहीं


देखने का बहुत कुछ है
एक बदले हुए इंसान के अंदर
एक भटकते हुए रुह के अंदर

पर लोग वही देखना चाहते हैं
जो नारी के जिस्म में सजावट के काम करते हैं
काले घने बाल
सुंदर कपड़े सजी हुई चेहरे
पर जो नहीं देखते
रुह का तरपन


नहीं देखते थके हुए जिस्म को
नहीं देखते टूटती हुई हिम्मत को


नहीं देखते अटकती हुई सांसों को
नहीं देखते धक-धक धड़कते हुई धड़कनों को

नहीं देखते उसके कंपन को
जो हजारों उमिद टूट जाने के बाद होती है

जो हर जाने के बाद उठाती है
एक सेहरन सी पूरी बॉडी में
डर गुटन तरफ अकेलापन
हताशा निराशा नाउम्मीद


फिर भी ठेहरते हुए सांस धीरे-धीरे ले रहे हैं
कैसे वह जी रहे हैं

वह नहीं देखते एक इंसान जो चल रहा है
वह अंदर से जिंदा है
डरा हुआ है अकेला है
या कब की मर चुका है


वह कभी नहीं देखते
वह बस देखते हैं
रूप रंग चेहरे
हर ऊपरी बदलाव को
वह मन के अंदर की दुनिया को नहीं देखते

वो देखते हैं इस समाज में चल रही
उन औरतों को
जो खूबसूरती और लंबी वालों को सुंदरया मान चुके हैं



उन्हें नहीं भाता
वो औरतें जो खुद से परेशान होकर
खुद की ही बाल काट देती हैं
राहत पाने के लिए अपनी सर की बोझ थोड़ा कम कर देती है

पर अफसोस वह या नहीं देखते

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थके हो तो सुनो
तुम अकेले नह ींहो
कविता


थके हो तो सुनो थोड़ा आराम कर लो
आराम करना आलस नहीं है

दिल में बहुत कुछ दबे है तो बोलो
दिल की बात बताना कमजोरी नहीं है

अगर रोना आता है तो रो लो जी भर रो लो
रोना कोई गुनाह नहीं है

तुमसे कोई नहीं कहेगा कि तुम विक्टिम कार्ड प्ले कर रहे हो
बस कहाँ एक बार मैं थक गया हूं
और मैं आराम करना चाहता हूं

मुझे गले लगाओ मैं तुम्हारे बाहों में सोना चाहता हूं

तुम्हारी कमजोरी को कोई नहीं जाचेगा
नहीं तो तुम्हारी गलती को कोई गिनबाने बैठेगा

बस वह तुम्हारे साग तुम्हारे गम में तुम्हारे हो ले गा
तुम्हारी गलतियों को भूल कर तुम्हें गले से लगाएगी

तुम्हें प्यार से गले लगाएगा कोई तो होगा

मत दिखाओ अपनी कठोर चेहरा हर बार
जो तुमसे प्यार करता है
उसके आगे थोड़ा नरम रहना कोई कमजोरी नहीं

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तुम अकेले तो नहीं पार्ट 1




सच कहते हैं
खतरनाक वह लोग नहीं जो सचमुच में खतरनाक दिखते हैं सबसे ज्यादा खतरनाक वह लोग होते हैं
जो हम आम इंसानों की तरह रहते हैं
जिस मे उसकी ही टूटन भारी होती है
और उसे जब भी मौका मिलता है
किसी और पर उतरने की कोशिश करता है
अपने दर्द अपने फर्स्टशन को
अपने गमों को समझने की वजह वह अपनी तकलीफों की वजह किसी और को ठहर आता है


वे अपने दर्द को समझने और संभालने के बजाय
वो किसी और को चोट पहुँचाकर हल्का करने लगते हैं
उसका दर्द तब किसी और की तकलीफ बन जाता है


हम किसी टूटे हुए इंसान के लिए सहानुभूति रख सकते हैं
लेकिन उसके उस व्यवहार का समर्थन नहीं कर सकते

यह नैतिक नहीं है
कोई भी यह नहीं मान सकते कि
वह अपने दर्द की वजह से किसी
और चोट पहुंचा



हां
मैं जानती हूं कि लोग अपने तकलीफों से ऊभर नहीं सकते
पर और साथ में जरूरी यह भी है कि
धीरे-धीरे उसे दर्द को खुद की जिंदगी से निकाल कर दूर फेंकना सीखे


अपने दर्द के लिए अपने आय हुई जिंदगी में दूसरे इंसान को तकलीफ नहीं दे सकते
ऐ कहे के की मुझे भी दर्द हुआ है

दर्द सबको होता है उसे इंसान को भी
जो खुद टूट जाते हैं
पर दूसरों को तकलीफ नहीं देता

इस दुनिया में तुम अकेला विक्टिम नहीं हो
बात को समझो
जिंदगी सचमुच में खूबसूरत है
अपने दर्द से बाहर निकाल कर दुनिया की तरफ देखो

वह पार्टनर जो तुम्हारे प्यार से बातें करने के इंतजार कर रही है
जरा उसकी तरफ देखो
क्या सचमुच में तुम्हें लगता है कि
दुनिया में कहीं भी प्यार नहीं है

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कविता
मैं सब जानती हूं


मैं सब जानती हूं
और मान भी चुकी हूं

फिर भी तकलीफ हो रही है
इस बात से नहीं की मुझे अब भी किसी से उम्मीद है
इस बात से तकलीफ हो रही है
की सच्चाई को स्वीकार करके भी
मैं भूल नहीं पा रही बीते हुए समय को
या तो जो हो रहा है
उन सबको

मैं स्वीकार तो कर रही हूं
पर वह मुझे तकलीफ दे रही है
मुझे चोट पहुंचा रही है

मैं नहीं सोच रही की किसी और के लिए अवेलेबल है
तो मेरे लिए क्यों नहीं

मैं जानती हूं कि सबके लिए हो सकती है
पर मेरे लिए नहीं
फिर भी तकलीफ हो रही है


सब कुछ जानते हुए
सबको पहचानते हुए भी तकलीफ हो रही है

और सब जान भी मैं इस तकलीफ से बाहर खुद को नहीं निकल पा रही
मैं इस दर्द को छोटा नहीं कह सकती
नहीं तो खुद के दर्द को नाकर पा रही हूं


सब कुछ ऐसा ही है
ऐसा ही होता है
मैं मानती हूं
की समाज परिवार यह दुनिया सब ऐसे ही है
हमेशा से

और मुझे भी उम्मीद नहीं किसी से
क्यों यह सब ऐसे हैं
नहीं तो मेरे अंदर किसी के लिए शिकायत है

पर अंदर है
बस निराश गहरा निराश
और उदासी
जिसमें कोई उम्मीद नहीं है किसी से भी नहीं
पर अकेले छोड़े जाने का गम सबसे ज्यादा है



शांति बिल्कुल नही है
है तो बस गहरी खामोशी
राहत बिल्कुल नहीं है
है तो बस चुप्पी

उम्मीद से छुटी हुई
अंदर से टूटी हुई
अकेलेपन में पड़ा हुआ

सब जानकर भी रोता हुआ
मैं यहां

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कविता
तू रहता कौन से शहर में है




क्या तेरे पास जाने की कोई और रास्ता है
है तो बताना
मुझे सचमुच में तेरे पास जाना है

तू रहता कौन से शहर में
और तुम्हारा घर का पता क्या है

मुझे नहीं मालूम बताना
मुझे तुझे ढूंढते हुए तुम्हारे शहर तक जाना है
तुम्हें गले लगाने के लिए तुम्हारे घर तक आना है




तू है इस दुनिया की या तेरा दुनिया कही और है
सच-सच बताना तू किस दुनिया से है


मुझे सचमुच में तुमसे मिलना है
तेरी एहसासों में जीती रही आज तक मैं
तुम्हें सपनों में देखती रही आज तक में


पर अब ऊब गई हूं मैं
इस नियंत्रर एक जैसे चलते हुए जिंदगी से



अब मुझे तुम्हारे पास आकर
तुम्हें महसूस करना है


क्या-क्या बताऊं तुम्हें
तुम्हें गले लगाना है तुम्हें चूमना है
तुम्हारे साथ पूरी दुनिया घूमना है



मेरी ख्वाहिश तुझसे शुरू होती है
और तुम्हें तक जाती है

पर मैं निराश हूं
इन ख्वाहिशों से
जो हकीकत होते हुए मुझे कभी ना देखा


तू है कहीं पर इन आंखों के सामने तू कभी ना दिखा
क्या यही मुकद्दर है हमारी



या बस यह मेरी किस्मत है
तुम्हें सोचते रहना
और सोचते रहना पागलों की तरह
सोचते रहना
और सोच सोच कर तुम्हें पाने की झूठी ख्वाब बुनना


उफ
कितनी पागलपन से भरी हुई मेरी ऐ दिमाग है
जिससे तुम कभी जाते ही नहीं



पर क्या करूं अगर तुम्हें भुलाना आसान होता तो
भुला दिया होता
और दिल मै किसी और से कब की लगा लिया होता


सच कहूं तो तुम्हें भुलाने सच में बहुत ही मुश्किल है
मेरे लिए





पर अब सोचती हूं तुम्हें ढूंढती रहूं
या तुम्हें ढूंढना छोड़ कर
थोड़ी ध्यान खुद पर दे दु


ऊफ तुम्हारा नाम लेकर
मेरे लिए यह डिसाइड करना भी मुश्किल है

क्या करूं तुम्हारा नाम लेना छोड़ दूं
पर तुम्हारा नाम से ही तो यह धड़कन धड़कती है
यह थम जाएगी तो मैं मर ही जाऊंगा

आ कितना मुश्किल है
मेरे लिए ऐ जहां मे
तुम्हें ढूंढना और खुद को संभालना

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एक लड़की अपनी अधूरी यादों के लिए
किसी को ढूंढती फिर रहा है
शेहरो शेहरो गलियों गलियों
उसकी आंखें एक जगह नहीं टिक रही
बस भटकती जा रही है
बेहती जा रही है


वो जिसे ढूंढ रहा है
वह उसे मिल नहीं रहा
कहीं भी नहीं
ना शहरों में ना गलियों में
ना गांव में ना चलती फिरती कहीं भी राहों में
कहां जाकर छिप है
उसे नहीं पता
बस वह पागलों की तरह से ढूंढ रही है





गीत निर्मोही बलिए

बावरी हो गई मैं
बीरहा बीरहा मारा फिरती
नैना बस तुमको निहारा करती



कहा कहा ना मैंने तुमको ढूंढा बलिए

तू है की बड़ी निर्मोही
कहां जा छुपा बलिए


नैना बस तुमको डगर डगर निहार करती
डगर डगर मटका कहीं ना तो मुझको मिला बलिए

तू है बड़ी निर्मोही बलिए
तू है बड़ी निर्मोही बलिए


हु हु हु हाआ। हाआ। हाआ


नैंन मोही बिरहा बिरहा मारे रोते।
नयनं सूख गई पनिया


मोहि कुछ नहीं भावे
जोगी रे तोहरे सुरतिया बिन
जागे नैन कटे रतिया याद करतो रहित तोहरे तिरत्या


हु। हु। हु हु। हु। हू 3




मैं तो भूली बीछरी यादों के सहारे
हाथों में बिखरे हुए लेकर लकीरों के सहारे


फिरता फिरता बंजारों की तरह
बिरहा मारे मारे विचारों की तरह
फिरता फिरता बंजारों की तरह
बिरहा मारे मारे बंजारों की तरह





हा। हा। हा।


बाबरी मैं इश्क के जोक ना जानू
बीना जाने बिना पहचाने सोची ना समझी में
पर गई उलझी सी नयनं हमें अपना नयनं मिला ते



रोई मैं बिना आंसू अंखियों से रोई मैं

मैं बाबरी
बिरहा बिरहा मारे फिरती
नैनो से तुमको नहारे फिरती

तू है कि बलिए निर्मोही
मिलता ही नहीं मुझको कहीं

हा। हा। हा।

कहां जा छिपा है मेरे निर्मोही बलिए





अल्फाज
जगह-जगह ढूंढा मैंने तुझे
पागलों की तरह ढूंढा
और ढूंढता रहा
तू निर्मोही मुझे कहीं ना मिला
शायद तुम्हें मुझे इस हाल में देखकर अच्छा लगता है




अगर मजा आ रहा है तो छिपकर ही देखा करो
और मुझे देखा करो
तब तलक देखा करो
जब तलक मेरी बहेम टूट नहीं जाती
की मोहब्बत में मोहब्बत पागलों की तरह करना
मेरे हिस्से में आई
और यह हिस्सा तुम्हारे लिए कोई खास नहीं



उसे दिन से
मेरा घुटना मेरा मरना बस मेरी किस्मत है
जब नैंन तुम्हें देखकर
और कुछ देखना चाहा ही नहीं




अगर गीत आप सबको अच्छी लगे तो आगेपढ़ते रहिए
मैं आपके प्रिया राइटर अभिनिशा 🦋❤️💯

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सांसे गहरी गहरी सांसे
गीत


अल्फाज

मेरी दुनिया रंगीन हो गई किसी के आने से
मेरी आंखें एक इसी चेहरे पर ठेहर गई
जिसे देखकर मेरी सांसे गहरी हुई

अब दिल बस कर रहा है
उसकी बाहों में समा जाने को
उम्र भर उसके हो जाने को

हां सांस गहरी


गीत



मेरी दुनिया दुनिया में रंग भरी
सारी दुनिया से दूर जाकर मेरी नजर तुम पर ठेहरी
और हुई सांसे गहरी


गहरी सांसे सांसे गहरी



आ जा मेरी जाने जिगर आके मेरी बाहों में समा
गहरी सांसे सांसे गहरी





सांसे गहरी सांसे गहरी
तेरे संग घूमु मैं घूमु दिन दुपहरी

दु। पहरी


तुझे मांगा है दुआओं में
ऐ मेरे साथिया मेरे साथ चल दिन से रात तक

साथिया बनके मेरे साथ चल
चल दिन रात तक


तक दिन रात तक तेरे साथ भटकु खुले आसमान के नीचे
हरी धरती के बीचों-बीच

मैं भटकु सारी उम्र तेरे पीछे पीछे




ओ ओ ओ ओ ओ ओ 3


साथिया मांग ले मुझसे मेरी उम्र सभी
दे दूंगी तुझे अपनी जिंदगी
साथ तेरे चलने को हूं मैं बेताब बड़ी




मैं हूं कहां। हूं यहां
तेरी बाहों में समाऐ तेरी राहों में बंके तेरे साऐ

सांसे गहरी गहरी सांसे
सांसे गहरी गहरी सांसे


हु हू हु हु।



मैं दुनिया भूल गई तेरी बाहों में आके
मेरी दुनिया में रंगीन हुई तेरे साथ पा के


सांसे गहरी गहरी सांसे
तेरे संग चल दूं मैं कहीं भी जब भी कहे तु
दिन हो या रात



ऐ मौसम ऐ हवा ऐ चांदनी सब गवाह है
मेरे मेरे इश्क


मैंने किया है वादा
मेरे ढलते उम्र तक मैं निभाऊंगी
ढलती उम्र तक तुम्हें चाहूंगी




दूर तेरी बाहों से और कहीं ना जाऊंगी
हां कहीं ना जाऊंगी

सांसे गहरी गहरी सांसे

मैं मुकम्मल हो गई तेरी बाहों में आ के
सांसे गहरी गहरी सांसें


अब ऐ निगाहें तुम पर ही ठहर ठेहरी उम्र भर आ के
सांसे गहरी गहरी सांसे

हु। हु हू हू। हु हु

सांसे गहरी गहरी सांसे

हु। हु। हु। 2





अगर यह गीत आप सबको पसंद आए तो
आगे पढ़ते रहिए
मैं आपकी प्रिय लेखक अभीनिशा ❤️🦋💯

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