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नन्ही सी जान कविता सीने के अंदर एक बच्चा है जो हर वक्त भागते रहता है इसे जब मैं रुकने के लिए कहती हूं तो यह कहता है मुझे हमेशा के लिए ही ठहर जाना है मैं भागते हुए थक चुकी हूं मुझे भी थम कर सांस लेना है मगर मैं रुक जाऊं तो तुम ठंडी पर जाओगे दो इजाजत में थामती हूं पर तुम मर जाओगी सीने के अंदर एक बच्चा है जो हर वक्त भागते रहता है जब मैं फिर से उससे कहती हूं तू ठहर नहीं सकती मान तो क्या तुम अपने कदम धिमा थोड़ा कर सकते हो क्या तो उसने कहा हां मैं कर सकता हूं मगर मुझे थोड़ा प्यार चाहिए तुम्हारा देखभाल चाहिए तुम दे सकते हो क्या जो तुम्हारे पास तुम्हारे लिए है ही नहीं है उसका सौदा तुमने नन्ही सी जान के साथ कर सकती हो क्या यह सुनकर मेरी आंखें भर आई मैं उस नन्ही सी जान के सवालों के जवाब क्या दूं जब मेरे पास उसे देने के लिए कुछ नहीं है तो उससे धीरे चलने के लिए सौदा के आधार पे करूं जब मेरे पास उसे देने के लिए कुछ भी नहीं है तो मैं उससे और सवाल क्या करूं अच्छी कविता तेज धड़कते हुए दिल के बारे में है उम्मीद करता हूं कि आप सबकोअच्छे लगे अगर अच्छे लगे तो कमेंट में फीडबैक देना मत भूलिएगा मैं आपकी प्रिय लेखक अभी निशा ❤️🦋💯
आंखें पत्थर बन ही जाए तो अच्छा है कविता आंखें पत्थर बन जाए उम्मीद करती हूं सारे जज्बतें थम जाए ऐ उम्मीद करती हूं पलके बंद हो जाए ऐ उम्मीद करती हूं और मैं सो जाऊं उम्मीद करती हूं सोने के बाद शायद दर्द कम हो जाएंगे सोने के बाद शायद बेचैनी काम हो जाएंगे सोने के बाद शायद आराम मिलेंगे थकावट से चूर हूं शायद मरघट में जाने के बाद थमे सासे को नई उम्मीद मिलेंगे मरघट में परे हड्डियां गाबा है आखिरी उम्मीद यही है मौत से कौन डरता है मौत अंतहीन है तो मौत अंतहीन भी नहीं आसान सारे सवालों की जवाब ढूंढना मुश्किल लगता है मौत के बाद जिंदगी कौन चाहता है जिंदगी मरघट में जलते मसाले हैं और इस मसाल को रोज मैंने देखा है सवेरा होते ही बुझा दिया जाता है आधी मुर्दा होकर जी रही हूं जिंदा होने की ख्वाहिश में पर अब लगता है थम थम के सांस जो चलते हैं वह हमेशा के लिए थम ही जाए तो अच्छा है आंखें पत्थर हो जाए तो अच्छा है अगर यह कविता आप सबको पसंद आए तो आगे पढ़ते रहिए मैं आपके प्रिय लेखक अभी निशा ❤️🦋💯
फिर भी मैं बुरी हूं हमसे पूछा सभी ने हमने उन्हें दिया क्या किसी ने पूछा ही नहीं की हमें उनसे मिला क्या हमेशा एक तरफा ही उम्मीद लगाई गई और मैं उम्मीद लगाई तो वेमत हुई वो उम्मीद जो सख्त पहेरो से लगे थे उसमें बस एक तिनका ही हिला और उन तीनके ने साबित कर दिया कि मैं क्या हूं उनके लिए जो मेरे अपने थे सब मांगते गए और मैं देता गया मेरे हंसी मेरी खुशी मेरा रोना मेरा कहना मेरा बहन मेरी वक्त मेरी जज्बात सबको दे दिया उनकी जरूरत के हिसाब से जब मुझे जरूर परी मेरी ही वक्त के तो ताना मिला मैंने वह क्यों नहीं की जो उसने कहा शिकायत पर बहाना मिला मैं खुद के लिए वक्त कैसे बचा ली इस बात पर सख्त और जलील भरी लेहजे मिला जब मैं पल भर सांस लेने की सूची तो मैं बुरी हुई अपने प्रिय जनों से मुझे यह नाम मिला मैं ने किसी से उनके हिस्से की वक्त नहीं मांगा मैं ने किसी से उनके हिस्से की हंसी नहीं मांगा मैंने किसी से उनके हिस्से की कुछ भी वेसकीमती की नहीं मांगा मैं ने बस अपने हिस्से के जज्बात अपने पास रखना चाहा फिर भी मैं बड़ी बुरी हूं सबके हिस्से की मैंने दर्द लिया गम लिया और मेरे हिस्से का दर्द और गम अपने दिल में दवा लिया फिर भी मैं बुरी हूं मैंने कहां कैसे की मुझे से नहीं होगा जो मैं आज तक करता रहा मैं एक बुरी बेटी हूं सबने मुझे से सब ले लिया और किसी ने कुछ दिया नहीं फिर भी पूछा मैंने उनके लिए क्या किया जहां मे एक लाइन सच है जो बड़ी फेमस है चिड़कर सीना दिल निकाल कर भी रख दो तुम अपनी प्रिय जनों के सामने फिर भी कहेंगे यह कम ही है सब कुछ लेने के बाद भी मुझे अंदर से खोखला कर देने के बाद भी कहते हैं तुमने मुझे दिया क्या अगर आप सबको यह कविता अच्छी लगे तो आगे पढ़ते रहिए मैं आपका प्रिय लेखक अभिनिशा❤️🦋💯
कविता रोने की आजादी है जब रोने का जी करें तो रो लो ठहरे हुए आंसू आंखों में रहकर जहर बन जाएंगे इससे पहले रो लो जी भर रो लो इससे पहले की तुम्हारा जी किसी को मारने के करें रो लो जब रोने का जी करे तो रो लो इससे पहले की तुम्हें जग के साथ-साथ खुद से नफरत हो जाए रो लो तुम्हारा दर्द तुम्हें खो दे इससे पहले तुम रो लो जी भर रो लो दुनिया भर के गम लेकर तुम लाचार हो यह भरम लेकर तुम खुद के नशे काटो इससे पहले रो लो रोने से शायद तुम हल्का महसूस करोगी इसलिए रो लो जी भर रो लो चिक चिक कर रो लो हां तुम रो लो सायद रोने से मन में बिछे नफरत काम हो जाए इसलिए रो लो शायद रोने के बाद जीने का इच्छा करें इसलिए रो लो शायद रोने के बाद जीने की कोई उम्मीद मिल जाए इसलिए रो लो जी भर तुम रो लो सारे थकान खत्म हो जाएंगे इसलिए रो लो तुम रो लो जी भर रो लो जिंदा रहने के लिए घुट घुट कर कब तलक जिओगे जो जहर है दिल के अंदर वह बाहर निकालो खुद से ही बोलो अगर कोई नहीं है सुनने वाला खुद के जख्मी दिल को डटोलो और जी में जो आए बोलो तुम रो लो खुद को तुम प्यार से सहलाओ खुद को तुम खुद ही गले लगाओ और खुद को और रोने दो दर्द थोड़ी कम होंगे और तुम फिर से मुस्कुराने के लिए नज़रें उठा होगी शायद और ज्यादा मुस्कुराओगी हां तुम रो लो जब तक जी चाहे रो लो किसी चीज की आजादी हो या ना हो तुम्हें रोने की आजादी है तुम रो लो जी भर रो लो और फिर आओ उठो और खुद को संभालो रहा लंबी है दर्द गेहरा है फिर भी चलना है डगमगाते कदम लेकर कापते बदन लेकर रोते हुए तुम्हें खुद को संभालना है हां तुम रो लो पर खुद को संभालो रोने की आजादी है तुम रो लो जी भर रो लो आगर ऐ कविता अच्छी लगे तो आगे पढ़ते रहिए मैं आपके प्रिय लेखक अभिनिशा❤️🦋💯
सोचा मैं तितली हूं थकावट के बाद भी मैं ने थोड़ा काम किया और फिर दोस्तों के साथ गई और सांस लिया और फिर आई थोड़ा काम किया जीने का जी नहीं था फिर भी जीने की सूची नल से निकलते ठंडा पानी सर पर डाला और गहरी सांस लिया और फिर शगुन से बाल धोया और नहाया और फिर अपनी पसंदीदा कपड़े पहने जो कंफर्टेबल था और फिर आईने के सामने खड़ी रहकर खुद को दिखाऔर वो चेहरा जो मैंने देखा वह मेरी ही था ना वह खूबसूरत था ना सुखा बस था शिकायतों से भरा कुछ देर उस चेहरे को निहारता हुआ सोचा इसमें नूर नहीं है तो मुस्कुराई शिकायत की हजारों लव्ज थे चेहरे के साथ होठों पर भी फिर भी मुस्कुराई और फिर उल्टे कदम लौट कर घर की छोटी सी अलमारी के पास आए अलमारी खोली और हाथ डालकर डोटोलते हुए उस से बालों की पिन निकाला और छोटी सी झुमका भी और पिन बालों में डाला और झुमका कानों में डालते हुए फिर मैं आईने के पास आई और झुमका कानों डालते हुए मैं आईने में खुद को दिखा और मैं फिर से मुस्कुराए और फिर से बालों के पिन बालों से निकलते हुए होटो के बीच में दवाई और फिर बालों को अपने हाथों से सावरा और फिर उन में पिन लगाया और फिर अपनी बेबी हेयर को अपने हाथों से आगे करते हुए मुस्कुराई और सोचा मैं तितली हूं कितने दिनों के बाद खुद को आईना में देखा और सबरी हूं हां मैं तितली हूं इतराने के लिए ही बनी हूं और यह बगिया मेरी है और सोचा ही नहीं कि इस बगिया में माली भी है और सोचा ही नहीं की माली मेरा दुश्मन भी हो सकता है हां मैंने सोचा मैं तितली हूं इतराने के लिए ही बनी हूं पर सोचा ही नहीं की तितली किसी मनचले के हाथों के बीच आकर मिसला जाऐगे हां मैंने सोचा ही नहीं की आसमान की तरफ देखना मेरी नसीब है ऊरना नहीं अगर कविता अच्छी लगे तो आगे पढ़ते रहिए मैं आपके प्रिय लेखक अभिनिशा ❤️🦋💯
जिंदगी क्यों दूसरा किनारा एक सपना जिंदगी के पार जिंदगी कहते हैं जिंदगी एक रहस्य से भरा हुआ है एक पजल की तरह जिंदगी की हर मोड़ हर रास्ता है जिसे सुलझाना आसान नहीं और जिंदगी की कहानी एक पजल है हमें नहीं पता कि किन्हे जिंदगी सौगात में क्या देता है पर जिंदगी सौगात मै एक चीज देती है जो शगुन से भरी होती है एक लंबी नींद एक लंबा सपना पर सपना क्या है और उसके रहस्य क्या है ज दुनिया में आप तरह तरह की सवाल है कहते हैं सपना अपने दिमाग की उलझन से पैदा होते हैं और दिमाग तो उलझने के लिए ही होते हैं ना
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