अब कोई फर्क नहीं पड़ता
कविता
अब अमीर बनने की ख्वाहिश नहीं
अब मुझे कुछ चाहिए ही नहीं
चाहे कोई कुछ भी कहे
मैं खुद से नहीं कहती
बहुत ज्यादा मेहनत करेंगे
और
बहुत सारे पैसा कमाएंगे
और उन्हें दिखा दूंगी कि मैं क्या हूं
अब कोई फर्क नहीं पड़ता
किसी की बातों से भी
मैं क्या हूं नहीं हूं
बस खुद में खत्म हो गई
समझने वाले कहते हैं
जिंदगी बहुत ही प्यारी है
मत मरने की चाह रखो
ऐसा तो होता ही रहता है
तुम्हें जीना चाहिए
और खुद को बेहतर बनाना चाहिए
इस बात से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता
लिखना गीते गाना अल्फाज कहानी कल्पना मेरी मेरी सांस है
और मुझे अब मेरे सांसों पर भी काम करने का मन नहीं करता
बस लगता है सारी ज़रूरतें खत्म हो चुकी है
अंदर के खालीपन के साथ मैं
अब सारी उम्मीद छोड़ चुकी हूं
अब जिंदगी बोझ लगती है
और हर दिन सांस लेना एक सजा
अब दुनिया देखने की ख्वाहिश नहीं है
अब दिल लगाने से चाहत नहीं है
अब कुछ भी नहीं है
ऐसा जिसे जरूरी समझ कर मैं जीते रहछ
और जिंदगी की बोझ ढोते रहु
I like you life
पर
I don't love you