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गुलाब मिले या ना मिले, पर कांटे ना मिले । किसी को कोई मिले या ना मिले, पर लेकिन बेवफा सनम ना मिले। तुम्हारे लिए खुदा से यही दुआ करुगा मै , कोई तुम्हे तुम्हारे जैसा ना मिले । :- लोधी अखीरा
जब तुम मिलोगी मै एक बार मिलना चाहता हू तुम्हे कुछ बताना चाहता हू अपने दर्द एक दिल की वया करुगा और कुछ नही तुम से दो बाते करूगा होता है दिल मे दर्द इसकी दवा बता देना और कुछ कर ना सको तो गले ही लगा लेना मै चाहूंगा नही तुमसे मिलना फिर भी तुमसे मिलने की अरदास करूगा मै पूछू तेरा हाल ,तो सच सच बताना हो सके तो अपने दिल का हाल बताना अब तेरे बिन मुझ से रहा नही जाता ये टूटा दिल मुझ से सभाला नही जाता अब इस दिल को कैसै समझाऊ अब तू मेरा नही है कैसै बताऊ - Lodhi Akhira
देखकर उनकी ऑखो को, हमे इश्क की बीमारी लग गयी । रहते रहते उनके साथ, हमे उनकी आदत लग गयी । बचकर चले हम उम्र भर काटो से , ऐ अखीरा और चोट एक फूल से लग गयी । :- लोधी अखीरा
दिमाग लगाने की उम्र मे दिल लगा बैठे है। जिन्दगी साबारने की उम्र मे मोहब्बत कर बैठै है। और सब कुछ पता होते हुए भी, अखीरा जो हमारा नही हो सकता उसे ही अपना समझ बैठे है । :- लोधी अखीरा
बढे ढंग से छिपाया करती थी ,मुझे अपना बताया करती थी वो गली मे आने जाने के बहाने, वो मुझ से भी मिला करती थी । और बढी मासूम थी वो लडकी, जो मिलता सभी को अपना बना लिया करती थी । :- लोधी अखीरा
बसंत आया बसंत ,छाया बसंत महीना नही एक याद है बसंत शीत ऋतु का आगमन है बसंत बर्षा का गमन है बसंत कुछ यादे भुलाने का दौर है बसंत कुछ नयी यादे बनाने का दौर है बसंत पत्ते यू ही नही गिरते पेड से पुरानी यादे भुलाने का दौर है बसंत नये पत्ते अपनाने का मतबल शुरुआत करने का महीना है बसंत देखो इस ऋतु को बडा प्यारा है बसंत थोडी सी बारिस थोडी सी गर्मी थोडी सी सर्दी सभी ऋतु का समावेश है बसंत आरम्भ है बसंत अन्त है बसंत :- लोधी अखीरा
संघर्ष कर अभी तू जिन्दा है , तुझे जीना होगा । हुए है जो घाव , इन्हे खुद भरना होगा । थोडे से घाव क्या देखे, तू तो डर गया । लगता है , तू जीते-जी मर गया । मत डर इन घाव से, ये तो भर जाएगे। अगर कदम हटे तेरे पीछे, तो पछतावा उम्र भर को दे जाएगे। थोडी सी तो हिम्मत दिखा , अभी दिन है तेरे जवानी के। मनता हू कि, लगता है सभी को डर संघर्ष से। अपने लिए नही तो, उठ उस माॅ के लिए । नही निभा सकता फर्ज तो, लड उस माॅ के कर्ज के लिए। अगर अभी थक गया , तो थू है ,तेरी जवानी पे । मिलाएगा कैसै ऑख , अपनी माॅ के देखे सपनो की कहानी से । :- लोधी अखीरा
जब से तुम से मिला हु मै स्वभाव नर्म रखता हू । पिस्तौल चलाने की उम्र मे , मै हाथ मे गुलाब 🌹 रखता हू। और मत करना मुझ पर भरोसा ,मै वो इन्सान हू , जो सभी का सच जानकर भी खुद को धोखे मे रखता हू। :- लोधी अखीरा
खुद को दुर्योधन तो तुझे अपना कर्ण लिखुगा। लिखू अपने को अर्जुन तो तुझे कृष्ण लिखुगा। यू तो दुनिया मे है लाख बन्दे , सभी को लिखू मै मित्र तो तुझे मै अपना भाई लिखुगा। :- लोधी अखीरा
मेरी बहन वो लडती है झगडती भी है वो एक लडकी है मै उससे छोटा वो मुझसे थोडी बडी भी है वो और कोई नही मेरी बहन है मेरी बहन है करता हूॅ परेशान तो मै वो दो थप्पड लगा भी देती है रोता मै जब फिर वो मुझे मना भी लेती है वो और कोई नही मेरी बहन है मेरी बहन है खेलते है खाते है साथ भी स्कूल जाते है मुझे ना लगे बोझ मेरा बैग ले लेती है आता नही मुझे कुछ तो बडे प्यार से समझाती है वो और कोई नही मेरी बहन है मेरी बहन है करती है प्यार बहुत तभी तो बहन दूसरी माॅ कलाती है भाग्य से नही मिलती ये सौभाग्य से मिलती है बडी बहनै कैसै अदा करु मै अपना फर्ज कैसे चुकाऊ मै तेरा कर्ज तेरा कर्ज मुझ पर बाकी रहेगा जिन्दगी भर चुका नही पाऊगा इसे उमर भर :- लोधी अखीरा
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