संघर्ष कर
अभी तू जिन्दा है ,
तुझे जीना होगा ।
हुए है जो घाव ,
इन्हे खुद भरना होगा ।
थोडे से घाव क्या देखे,
तू तो डर गया ।
लगता है ,
तू जीते-जी मर गया ।
मत डर इन घाव से,
ये तो भर जाएगे।
अगर कदम हटे तेरे पीछे,
तो पछतावा उम्र भर को दे जाएगे।
थोडी सी तो हिम्मत दिखा ,
अभी दिन है तेरे जवानी के।
मनता हू कि,
लगता है सभी को डर संघर्ष से।
अपने लिए नही तो,
उठ उस माॅ के लिए ।
नही निभा सकता फर्ज तो,
लड उस माॅ के कर्ज के लिए।
अगर अभी थक गया ,
तो थू है ,तेरी जवानी पे ।
मिलाएगा कैसै ऑख ,
अपनी माॅ के देखे सपनो की कहानी से ।
:- लोधी अखीरा