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मेरे हरेभरे खेत मेरे हरे-भरे खेत, मेहनत करते पापा खेतों में, मेहनत उनके रंग लाई, धान, गेहूं और गन्ना, चारों तरफ लहराई। पापा ने खेतों में पूरा जीवन बिताया, छाले पड़ गए हाथों में, फिर भी दिल मुस्कुराया। चारों तरफ ये हरे-भरे खेत, गाँव लगे बड़ा प्यारा, रंग-बिरंगे खेत देखकर, जीवन इस पर सारा। पापा ने मुझसे कहा - जल्दी पढ़कर आना, खेतों में मेरे साथ थोड़ा हाथ बटाना। मैं जब स्कूल से घर आया, बस्ता रखकर जल्दी खेत में आया। पानी चल रहा था खेतों में, पापा को नींद सी आई, लहलहा रही थीं फसलें, चल रही थी ठंडी पुरवाई। भूख लगी थी पापा को, माँ रोटी लेकर आई, चूल्हे की रोटी और अचार, सत्तू के संग खाई। खेतों में रोटी खाने का, स्वाद बहुत ही निराला, पिता के संग जो काम करे, वो बेटा किस्मत वाला। हरे-भरे खेतों के बीच में, रास्ता लगे निराला, सुंदर सा ये दृश्य देखकर, मन में बड़ी खुशहाली। माँ कहती है - बेटा थोड़ी लकड़ी घर ले आना, दाल-सब्जी और चने की रोटी, मुझको है बनाना।
ना तमन्ना है सितारों की ना तमन्ना है नजारों की आप जैसा एक दोस्त मिला क्या जरूरत है हजारों की
पीपल की पत्ती कभी नाम नहीं होती जुदाई लाख हो जाए मोहब्बत कम नहीं होती
बेखुदी की जिंदगी हम जिया नहीं करते जाम दूसरों से छीन कर हम पिया नहीं करते उनको अगर मोहब्बत है तो आकर हमसे मिले क्योंकि पीछा हम किसी का किया नहीं करते
चाहे तो दिल से हमको मिटा देना चाहे तो दिल से हमको भुला देना लेकिन यह वादा करो अरे जब भी याद हमारी रोना मत एक बार मुस्कुरा देना
कोई ना समझे कोई न जाने मिलना बिछड़ना ही जिंदगी है हर आदमी की किस्मत में देखो थोड़े से आंसू थोड़ी खुशी है कैसे मुसाफिर हैं हम कैसा है जीवन सफर मंजिल मिलेगी कहां किसको यहां है खबर
लोग अपना बना कर छोड़ देते हैं गैरों से रिश्ता जोड़ लेते हैं हमें तो फूल तोड़ना भी नहीं आता न जाने लोग कैसे दिल तोड़ देते हैं - Dharmpal Sroj
खुदा की रहमत सारे संसार पर बरसे मेरे हिस्से की रहमत मेरी जान पर बरसे ए खुदा बना देना मुझे पानी अगर मेरी जान कभी प्यास को तरसे - Dharmpal Sroj
यूं ही तनहाइयों में हम अपने दिल को सजा लेते हैं तेरा नाम लिखते हैं और मिटा लेते हैं हम अपने दर्द का एहसास कर गए होते शराब न होती तो हम मर गए होते - Dharmpal Sroj
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