मेरे हरेभरे खेत
मेरे हरे-भरे खेत,
मेहनत करते पापा खेतों में,
मेहनत उनके रंग लाई,
धान, गेहूं और गन्ना, चारों तरफ लहराई।
पापा ने खेतों में पूरा जीवन बिताया,
छाले पड़ गए हाथों में, फिर भी दिल मुस्कुराया।
चारों तरफ ये हरे-भरे खेत, गाँव लगे बड़ा प्यारा,
रंग-बिरंगे खेत देखकर, जीवन इस पर सारा।
पापा ने मुझसे कहा - जल्दी पढ़कर आना,
खेतों में मेरे साथ थोड़ा हाथ बटाना।
मैं जब स्कूल से घर आया,
बस्ता रखकर जल्दी खेत में आया।
पानी चल रहा था खेतों में,
पापा को नींद सी आई,
लहलहा रही थीं फसलें, चल रही थी ठंडी पुरवाई।
भूख लगी थी पापा को, माँ रोटी लेकर आई,
चूल्हे की रोटी और अचार, सत्तू के संग खाई।
खेतों में रोटी खाने का,
स्वाद बहुत ही निराला,
पिता के संग जो काम करे,
वो बेटा किस्मत वाला।
हरे-भरे खेतों के बीच में,
रास्ता लगे निराला,
सुंदर सा ये दृश्य देखकर,
मन में बड़ी खुशहाली।
माँ कहती है - बेटा थोड़ी लकड़ी घर ले आना,
दाल-सब्जी और चने की रोटी, मुझको है बनाना।