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झूठे और फरेबी लोगों की तरक्की देखकर अक्सर लोग दुष्कर्म करने को तैयार हो जाते है। वे ये नहीं समझते है कि उनका अधिक पैसे, धन, संपत्ति आदि कमाना उनकी तरक्की नहीं बल्कि, उनके पिछले कर्मों का हिसाब है। जब भी ये हिसाब पूरा होगा, उनके कर्मों का उन्हें , न्यायपूर्ण सबक मिलेगा। भूरे व्यक्ति को पहले तरक्की रूपी भ्रम में रखा जाता है। ताकि उसका विनाश बहुत भ्रमक हो जबकि एक सदाचार के रास्ते चलने वाले व्यक्ति को, उसके भूरे कर्मों का फल, पहले मिलता है । यदि वह उसे झेल ले तो आगे उसे सर्वव्यापी आनंद उसे प्राप्त जरूर होगा।
आप बीती 😔 "दवा के नाम पर अब सिर्फ कारोबार होता है, मरीज से ज्यादा यहाँ जेबों का शिकार होता है।"
"तलाश बस इतनी सी है कि तुम मिल जाओ, फिर पूरी दुनिया से भी कोई वास्ता नहीं।"
"हज़ार चेहरे हैं इस दुनिया की भीड़ में, मगर ये दिल सिर्फ तुम्हें देखकर ठहरता है।" - Kiran
गरीबी, गरीबों को मिटाने से नहीं, बल्कि उन्हें समानता की मुख्य धार में लाने से खत्म होती है।” ये विचार ही स्वतंत्रता आंदोलन का मूल था। इसके लिए ही कई समाज सुधार आंदोलन हुए,साथ ही कई समाज सुधारकों ने इसे अपना मूल लक्ष्य बनाया। इसी के फलस्वरूप हमे संविधान में आर्टिकल 14 में विधि के समक्ष क्षमता और विधि का समान संरक्षण जैसे प्रावधान प्राप्त होए।
अछूतपन (Untouchability) लोगों में नहीं, बल्कि उनके व्यवहार में निहित है” - Kiran
सुंदरता क्या है… नैनों की भूख है या, या समाज की बनाई कोई तस्वीर, जो हर चेहरे पर एक जैसा नाप ढूंढती है? कभी वो आँखों में ठहर जाती है, एक मुस्कान की हल्की सी लकीर बनकर, तो कभी शब्दों में छलकती है, किसी के सच्चे व्यवहार की तरह। समाज ने बाँधना चाहा उसे, रंगों, आकारों और मापों में, पर वो तो बहती रही चुपचाप, हर दिल की अपनी किताबों में। नैनों को जो भा जाए, वो पलभर की छाया है, भीतर जो चमक उठे, वही असली माया है। क्योंकि चेहरों की चमक ढल जाती है एक दिन, पर आत्मा की रोशनी कभी कम नहीं होती। तो सुंदरता… न तो केवल नैनों की भूख है, न ही सिर्फ समाज की बनावट, वो तो एक एहसास है—
ख्वाबों में रोज तुम आती जरूर हो , लेकिन केवल मेरी गलती याद दिलाने। - Kiran
कहते रहे हमेशा तुम, भरोसा करो मेरा , में तुम्हारा अपना हूं। कैसे करू भरोसा उस पर, जिसने धोखे के अलावा, कोई तोहफा ही नहीं दिया। - Kiran
पहुंची तेरे द्वार बड़ी उम्मीद से, सोचकर आई थी कहूंगी बहुत कुछ, पर जैसे ही सूरत सामने आई तेरी, सब कुछ भूल गई मैं उस पल में। न रहा कोई सवाल, न कोई शिकायत, बस आँखों में ठहर गए कुछ आंसू, और दिल ने चुपचाप कह दिया— तू ही था, तू ही है, बस तू ही तू।
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