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known stranger

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@knownstranger


તારા આગમનથી બદલાય છે કુદરતના નિઝામ
આજે ગરમાળા એની ક્ષમતાથી વધુ ખીલ્યા છે

गुलशन है तुम्हारे चश्म, पलकें हैं कोई गुलाब,
बैठती हैं तितलियाँ बन कर तुम्हारे हसीं ख़्वाब।
इस नज़ाकत से जो ठहरी हैं ये आँखों पर,
जैसे सच हो गया हो मुकम्मल सा इल्त़िख़ाब।

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બનાવી લીધી છે આંખોને સક્ષમ એટલી
લોહી વહાવે છે પરંતુ હવે આંસુ નહીં
- known stranger

છે એ ખુદ એક ગઝલ જેવી,
હું એના પર શું શાયરી લખું?
સાક્ષાત દેખાય છે ઈશ્વર,
તો પછી કયા મંદિરને પરખું?

- known stranger

रेगज़ार-ए-साहिल पर ये कैसा हसीन मंज़र है,
एक ज़र्रे की आगोश में सिमटा हुआ समंदर है

- known stranger

अब हम दस्त में मानिंद-ए-सूखे सजर हैं
हम पे इश्क़ की बौछार बेकार है

आँसुओं का अब नहीं होता कोई असर है
ज़ब्त-ए-ग़म की हर दीवार बेकार है

ख़्वाब सब राख हुए, बुझ गई है सहर है
सूरज की अब ये रफ़्तार बेकार है

तय कर चुके हैं हम तन्हाई का सफर है
मंज़िल का अब इंतज़ार बेकार है
- known stranger

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मिरे जुनून की जग में मुज़म्मत होती है,
दश्त-ओ-दर में भी अब तो बयाबाँ होती है।

ज़माने भर को तअज्जुब है मेरी हालत पर,
ख़िज़ाँ ज़िक्र से क्यूँ रूह गुलिस्ताँ होती है।

अदब की शर्त है खामोश रह के सुन लेना,
जहाँ पे प्यार की ज़ालिम मुज़म्मत होती है।
- known stranger

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अज़मा लो सारे आईने घर के,
वो अक्स उनमें नज़र न आएगा।

मेरी आँखों से खुद को देखोगी,
तो कोई आईना काम न आएगा।

- known stranger

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खल्वत में तेरे ख़याल की खुशबू बसा ली है,
मैंने उजड़ी हुई महफ़िल फिर से सजा ली है।

दुनिया की भीड़ से अब कोई वास्ता नहीं मेरा,
तेरी यादों के साये में एक दुनिया बना ली है।

ज़माने की गर्द से बचकर निकाला है खुद को,
तेरी तस्वीर अपनी आँखों के नूर में छुपा ली है।

- known stranger

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इस ज़ीस्त के मरहले पे सब कुछ छूट रहा है,
हर साथ दिया चेहरा ख़ामोश रूठ रहा है।

कल तक जो मेरी राह का हमसफ़र बना था,
वो आज मेरी नज़रों से चुपचाप छूट रहा है।

थामा था जिसे दिल ने बड़ी शिद्दतों के साथ,
वो रिश्ता भी अब वक़्त के हाथों टूट रहा है।

आँखों में जो सपनों का इक शहर बसा था,
देखो वही हर मोड़ पे बिखर के छूट रहा है।

मैं खुद को संभालूँ कि इन हालात को थामूँ,
हर लम्हा मेरी मुट्ठी से फिसलता छूट रहा है।

किससे करूँ अब हाल-ए-दिल अपना बयाँ मैं,
अपना ही साया मुझसे कहीं दूर छूट रहा है।
- known stranger

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