मिरे जुनून की जग में मुज़म्मत होती है,
दश्त-ओ-दर में भी अब तो बयाबाँ होती है।
ज़माने भर को तअज्जुब है मेरी हालत पर,
ख़िज़ाँ ज़िक्र से क्यूँ रूह गुलिस्ताँ होती है।
अदब की शर्त है खामोश रह के सुन लेना,
जहाँ पे प्यार की ज़ालिम मुज़म्मत होती है।
- known stranger