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थक गई है रो कर आँखें मेरी अब पलके उम्र भर का सुकून लेकर हमेशा के लिए सोना चाहता है,,,,, बहुत इल्जाम लगे मुझ पर जैसी थी नहीं मैं वैसी बताया गया क्या करूं अब खुद को संभाल कर ? खुद को बिखरने से भी न रोका गया ,,,,,, _Manshi K
आज बहुत बोलने का मन हो रहा मेरा पर शब्दों का चयन नहीं कर पा रही मै, वो जो बोलते है न रेप का जिम्मेदार लड़कियां खुद होती हैं उन पर आज उंगलियां उठाने का मन हो रहा है, कहते हैं लड़कियां अपनी इज्जत संभाल नहीं सकती इसीलिए उनके साथ रेप होता है.... पर हम आज ऐसे दौर में रह रहे हैं जहां झूठ को सच और सच को झूठ बताया जाता है। उतनी ही शर्मनाक है हमारे देश की प्रशासन... जो एक कान से सुन कर दूसरे से निकाल देती है.... आजकल आम बात हो गई है रेप होना हरियाणा, दिल्ली,up, बिहार महाराष्ट्र राजस्थान पूरे भारत देश में महफूज ही नहीं है औरत, लड़की जाति..... आज ऐसी घटना मेरे घर से महज 5 से 6 km की दूरी पर घटना सामने आई है....महज 10 साल की थी वो मासूम जिसका बेरहमी से रेप कर मार दिया गया ,,,, कही भी safe है ही नहीं हम .....हर वक्त अपनों का हाथ थाम कर चल नहीं सकते हैं ....क्या करे और क्या नहीं ???? कैसे होगा ?? 😞
लगा लो बंदिशें फिर से हम पर दोहरा दो वही रिवाज पुरानी दे दो सौगात में हमें फिर से नई बता कर घूंघट, पर्दा और चार दिवारी लेट जाने दो जलती चिता पर, हो जाने तो सती हमें ताकि कोई कर न सके अपनी मनमानी,,,,,,, नर्क से अच्छा , मार दो मां के गर्भ में हमें कोई जिल्लत न सहना पड़े इस जमाने की रूह कांप उठती है हमारी खुद को पाकर सुनसान सड़कों पर हर रोज नई सुर्खियां बटोर रही है एक मासूम लड़की की इज्जत की कहानी ,,,,,,,, बलात्कार शब्द दिल झकझोर देता है आंखों में आ जाती है डर की निशानी कल उन दरिंदों का शिकार मै तो नहीं रहने दो बस अब रहने दो महफूज हमें यहां लगा लो बंदिशें फिर से हम पर दोहरा दो वही रिवाज पुरानी ,,,,,,,,, _Manshi K
तेरे बाद ज़िन्दगी तो चल रही है, पर हर मोड़ पर ठहर सी जाती हूँ.... हँसी चेहरे पर सजा लेती हूँ मैं, पर आईने के सामने टूट सी जाती हूँ.... तेरी यादों का क्या करूँ मैं, न चाहकर भी रोज़ चली आती हैं मेरे पास यूंही..... लोग कहते हैं भूल जाओ उसे, पर मैं कैसे भूलूँ, जब साँसों में वही ठहर जाता है.... दिल को समझाना आसान होता है क्या, अगर तू सिर्फ़ एक रिश्ता होता तो जरूर होता तू तो मेरी दुआओं का हिस्सा था, जिसे अब माँग भी नहीं पाती हूँ... - Manshi K
सुनो बोलना बहुत कुछ था तुमसे पर लगता है अब बोल नही पाऊंगी जो राज कुछ सीने में दफ़न हुए थे उन पर से पर्दा अब उठा नही पाऊंगी बेवजह आंखों में जो नमी ठहरे थे तुम्हारी याद आने पर झट से उन्हें मिटा नहीं पाऊंगी हां , चांद आसमां में जो अधूरा और अकेला था शायद उसका किस्सा सबको अब सुना नही पाऊंगी........ - Manshi K
दिल के दर्दों ने आँखों को ज़ुबां दे दिया है, अब ख़ामोशी अपनी तोड़ूँ भी तो किसके सामने??? जिससे कहूँ, वही ग़लत समझ लेता है, अब अपने जख़्म भी छुपाऊँ तो किसके सामने??? - Manshi K
तेरे बिना भी जी रही हूँ, पर ज़िन्दगी अधूरी-सी लगती है,,,, तेरी यादों का सहारा है मुझे, वरना हर साँस मजबूरी-सी लगती है,,,,, तू चाहे लौट आ या न आ, मैंने इंतज़ार आज भी तुझ पर छोड़ रखा है,,,, - Manshi K
अपना होने और अपना मानने में बहुत फर्क होता है,,,,,,,, हर किसी को अपना न कहे बाद में तकलीफ आपको ही होगा ,,,,,,, - Manshi K
तेरे बिना अधूरी हूँ मैं, ये तू जान ले, साँसें भी रुक-रुक के चलें, ये बात तू मान ले,,,, ख़्वाबों में हर रोज़ तेरा ही नाम आता है, दिल की हर धड़कन में तू है, ये तो पहचान ले,,,,, लफ़्ज़ कम पड़ जाते हैं तुझे समझाने में, मेरी खामोशी को भी इज़हार मान ले,,,,, तू अगर साथ हो तो हर दर्द छोटा लगे, तेरी जुदाई से बड़ा कोई ग़म नहीं ये जान ले,,, - Manshi K
चल तेरे इश्क का एक नाम देते हैं विश्वासघात, फरेब , भरोसा नहीं मुझे अब हम तेरी मोहब्बत को इन्हीं नामों का कर्जदार बताते हैं,,,,,, - Manshi K
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