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MASHAALLHA KHAN

MASHAALLHA KHAN

@mashaallhakhan600196


गर मन्नत है तेरी तो आज माले मुझे
तेरे हक मे हू अपना बना ले मुझे

मेरी ही कमी मुझसे ही है दूर
चल बाहे फैला और समाले मुझे

कच्चा भी है थोड़ा टूटा हुआ सा
मट्टी का हू घर बना ले मुझे

सांसे मेरी अब थमने लगी
वक्त कम है आ बचाले मुझे

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दर्द वो नही है जो हम सह नही सकते
दर्द वो है जिसके बिना हम रह नही सकते

दूरिया बेहतर है साथ रहने से
उन्हे और तकलीफ देखकर खो नही सकते

हमने खुद को बदला है उनके लिए
अब इससे बेहतर हम हो नही सकते

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खायोशिया भी बड़ी भयानक होती है
पता नही चलता इनसाफ मिलेगा या सजा

कुछ आवाजे थी जो मे सुन रहा था
कुछ अंदाजे थे जो बुन रहा था
झूठो से घिरा था बस तारीफे ही सुन रहा था

खुशबू फूलो की थी हम इतर ढूंढ रहे थे
जल्द बाजी के शहर मे हम सब्र ढूंढ रहे थे

जल्दबाजी में मै उसको मनाना भूल गया
निकला सफर में उसे बताना भूल गया
लोटा तो लोग हैरत में थे
वो छोड़ गया मुझे मे समझाना भूल गया

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एक चाराग लेकर निकला कुछ अंधेरा मिटाने को
एक हवा का झोका काफी था हमे होश मे लाने को

महंगा शोक नही मेरा , बस कुछ ख्वाब पूरे करने है
सब ने सब कुछ लिखा , बस मेरे किताब और खाली पन्ने है
कस्तिया दुब रही है सागर मे , बस मुझे तो किनारे तक उतरना है .

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