ऐ जिन्दगी मुझे ये बता दे जरा,मै किस मोड़ से हूँ गुजर रहा
कहा है मंजिले कहा है रास्ते, मेरा बचा वक्त भी है धल रहा
ना कोई समझता है मुझे और ना कोई समझ पाया है मुझे
यू अपनो के बीच रहे कर भी,गेरो सा है लग रहा
कांप जाता हूं ये देखकर हूँ किस मुकाम पर अभी,
मै एक रुक सा वक्त बाकी सब बदल रहा .