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samiksha

samiksha

@samiksha6726


ये भविष्य की कल्पनाएं इतनी उलझन भरी क्यूं हैं
जब हकीकत सामने से ही होकर गुजरेगा।

बैठ जाता हूँ ख़ाक पर अक्सर,
अपनी औक़ात अच्छी लगती है मुझे !!

कौन ज़्यादा बेबस है—
ये नदियाँ जो रुक नहीं सकतीं,
या ये किनारे जो चल नहीं सकते।

"जो खुद पर यक़ीन रखना सीख लेते हैं,
उन्हें हालात हराना भूल जाते हैं…"

किसी के साथ देने या न देने से क्या फ़र्क पड़ता है
हम कल भी चल रहे थे और आज भी सफर में हैं!

मां !!

जिसकी ममता सूर्य सा चमकता बना दें
वो प्रशंसा मां के नाम !!

जिसकी चांद सी छांव शालीनता सिखा दें
वो राहत मां के नाम !!

जिन्हें हमेशा ही भगवान से ऊपर रखा गया
वो दर्जा मा के नाम !!

जिनका व्याख्यान आज तक किसी कवि से न पूरा हुआ
वो सफलता मां के नाम !!

जिन्होंने उपवास रखा केवल हमारे अच्छे दिन के लिए
वो तपस्या मां के नाम !!

परिवार की भरी मेहफिल में भी जिसकी कमी का अहसास हो जाए
वो योग्यता मां के नाम!!

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वह बदले तो हम भी कहां पुराने से रह गए,.....
वह आने से रहे और हम भूलाने से रहे,...

परिणाम चाहे जो भी हो
प्रयास करना कर्तव्य है हमारा।।

खूबसूरती के दौर में हम वफादारी लेके कहां जाए।।

Tumhare baad log mujhe tumhare jikr se marenge।।