hindi Best Moral Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Moral Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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अजीब दास्तां है ये.. - 6 By Ashish Kumar Trivedi

(6) मुकुल अपने और रेवती के रिश्ते को लेकर दुविधा में पड़ गया था। समझ नहीं पा रहा था कि क्या करे। वह रेवती को प्यार करने लगा था। पर रेवती उसके बारे में क्या सोचती है वह नहीं जानता थ...

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बेनज़ीर - दरिया किनारे का ख्वाब - 33 - अंतिम भाग By Pradeep Shrivastava

भाग - ३३ मेरेअब कई-कई घंटे, कई-कई दिन, ऐसे ही दीवार के उस पार ज़ाहिदा के परिवार को सोचते-सोचते गुजरते जा रहे थे। मुन्ना भी अक्सर ऐसी रातों के इस गहन सन्नाटे में मेरे साथ होते। एक दि...

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मेरा पति तेरा पति - 3 By Jitendra Shivhare

3 सबकुछ सामान्य भी हो जायेगा। किन्तू दिपिका के साथ हुये अन्याय का हिसाब हम सभी को कभी न कभी तो देना ही होगा। उसकी तड़प और आंखों से बहते आसुं कहीं किसी रूप में हम सभी से इस अन्याय क...

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यादों के झरोखों से-निश्छल प्रेम (6) By Asha Saraswat

मातृभारती के सभी सदस्यों और पाठकों को मेरा नमस्कार ? यादों के झरोखों से —निश्छल प्रेम (1),(2),(3),(4),(5)आपने पढ़ी कैसी लगी रेटिंग करके अवश्य बताइएगा।जिन्होंने पढ़...

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कोड़ियाँ - कंचे - 6 By Manju Mahima

Part- 6 आज बलदेव की परीक्षा थी, ऐसा लग रहा था. बलदेव क्या बताए क्या न बताए...बिचारी गौरी ने यह सवाल इतने सालों में एक बार भी नहीं पूछा. पर आजकल के बच्चे तर्क के आधार पर सोचते हैं,...

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अनमोल सौगात - 2 By Ratna Raidani

भाग २ २० वर्षीय नीता बी.ए. फाइनल ईयर में पढ़ रही थी। अपने कॉलेज की टॉपर और अन्य गतिविधियों में भी हरफनमौला थी। खेल कूद का भी उसे बहुत शौक था। बैडमिंटन उसका पसंदीदा खेल था। बी.ए. की...

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भारत के गावों में स्वतंत्रा संग्राम - 2 By Brijmohan sharma

2 १८५७ का गदरदेश की आम जनता के साथ हिंदुस्तान के रजवाडो व अंग्रेजी सेना के भारतीय सैनिको में अंग्रेजी शासन के विरुद्ध विद्रोह पनप रहा था। अंग्रेज चाहे जिस राजा का राज्य बिना कारण ब...

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और उदासी छंट गई विस्तार वात्सल्य का By Alka Agrawal

निधि सुबह उठकर बाहर बरामदे में बैठकर अखबार पढ़ती है। बरसों से यहा नियम है, सुबह की चाय के साथ दोनों पति-पत्नी समाचारों का आनन्द लेते हैं। गर्मी में, उनके बगीचे से आने वाली शीतल, सु...

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एक किस्सा ऐसा भी By Smita

छींटदार नीले रंग का पर्दा अपनी जगह पर व्यवस्थित हो चुका था. भगतजी(देवधर ) अपनी खटिया पर लेट चुके थे। अपने बेटे की पदचाप उन्हें साफ सुनाई दे रही थी। बेटा बिल्कुल बरामदे तक आ चुका था...

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बालिश्तिया By Deepak sharma

बालिश्तिया सद्गुण प्रसाद का जाना तय हो चुका था| उसे रोडज़ छात्रवृत्ति मिल गयी थी| ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी की ओर से उसकी टिकट भी खरीदी जा चुकी थी| पासपोर्ट वीज़ा सब तैयार था| दो दिन बाद...

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ताज़िया By आदित्य अभिनव

ताज़िया प्रो. रामेश्वर उपाध्याय नित्य नियमानुसार वॉकिंग पर जाने के लिए अपना स्पोर्टस सू पहन रहे थे कि उनका ध्यान टेलीविजन पर चल रहे चैनल...

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सुंदरा और नारली पूर्णिमा By Ramesh Yadav

सिंधुदुर्ग जिले में समुद्र किनारे बसे एक छोटे से गांव ओटव में मल्हारी और मैनावती नामक युवक और युवती रहते थे। वे दोनों कोली समाज से थे। कोली अर्थात मछुआरे। मत्स्य व्यवसाय उनका खानदा...

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राम राज By राज कुमार कांदु

प्रस्तुत है मेरी एक रचना उस वक्त की लिखी हुई जब वर्तमान महामहिम श्री रामनाथ कोविंद जी का राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में चयन हुआ था ! ?-------------------------------------...

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थप्पड़: स्वाभिमान और अभिमान की जंग By Anil Patel_Bunny

नमस्कार मित्रो, आशा है आप सभी कुशल-मंगल होंगे। इस Lockdown period में सब लोगो की आम समस्या ये थी कि समय कैसे बिताए? हंमेशा की तरह हर सवाल का जवाब अपने पास ही होता है। सभी...

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तिश्नगी By Abdul Gaffar

तिश्नगी (कहानी) लेखक - अब्दुल ग़फ़्फ़ार __________________1980 के दशक में गौना के बाद मायके से जब दुल्हन की दूसरी बिदाई होती थी तो उसे हमारे यहां दोंगा बोला जाता था। तब सीधे शादी...

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एक दूजे के लिए (अंतिम भाग) By Kishanlal Sharma

"थैंक्स।इतने बड़े महानगर में अगर तुम न होते तो"दोस्ती मैं थैंक्स कैसा?तुम्हारा दोस्त और रूम पार्टनर के नाते मेरा फर्ज था।तुम्हारी देखभाल करना।जो मैने निभाया।कोई एहसान नही किया है,तु...

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स्पर्श रेखाएं By Deepak sharma

स्पर्श रेखाएं झगड़े के बाद माँ अकसर इस मंदिर आया करतीं| घंटे, दो घंटे में जब मेरा गुस्सा उतर कर चिन्ता का रूप धारण करने लगता तो उन्हें घर लिवाने मैं यहीं इसी मंदिर आती| एक-एक कर मैं...

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आर्टिफिशियल By Sunita Bishnolia

आर्टिफीशियल ड्रेसिंग टेबल के सामने बैठकर रीना ने गले में मोटे मोती वाली माला पहनी। परन्तु दुबारा देखने पर लगा कि ये सिल्वर बार्डर वाली ग्रे साड़ी पर सूट नहीं हो रही। तब उसने फटाफट...

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प्रजा का रक्षक By Ramesh Yadav

मावल प्रांत में कान्होजी नामक एक पराक्रमी सरदार था। उसे अपने राजा द्वारा जागीरदारों जैसा सम्मान प्राप्त था। जागीरदारी देने की परंपरा उसके राजा के दरबार में नहीं थी। शत्रुओं से मुका...

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अपने-अपने कारागृह - 28 - अंतिम भाग By Sudha Adesh

अपने-अपने कारागृह-28 अगले हफ्ते हमें बेंगलुरु जाना था । जाने का पहला कारण प्रिया का बार-बार उलाहना देना था कि आप मुझसे अधिक भैया को चाहते हो तभी उनके पास लंदन चले गए पर बेंगलुरु...

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सिद्धपुरुष By Deepak sharma

सिद्धपुरुष ‘आपसे एक हस्ताक्षर लेना है, मामा,’ अपने नाश्ते के बाद अपनी पहिएदार कुर्सी पर बैठा मैं अपना आई-फोन खोलने ही लगा हूँ कि युगल मेरे कमरे में आन धमका है| युगल मान...

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एक पल By Upasna Siag

सुधा जब से किट्टी पार्टी से लौटी है तभी से चुप है। जैसे कुछ सोच रही है। हाँ, सोच तो रही है वह। आज जो बातें किट्टी में हुई। वे बातें उसे थोडा आंदोलित कर रही है। कभी -कभी वह खुद अपने...

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शामियाना By Chaya Agarwal

कहानी- शामियाना"रिश्तों की समझ नही है तुम्हें या रिश्तों की माँग से अनभिज्ञ हो तुम, उठा लेते हो बीच में अपनेपन की खुशबूदार अनुभूति जो पहले ही पीछे छूट चुकी है या पाट दी गयी है अपने...

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गरीब किसान और जिन्न By Ramesh Yadav

एक गांव में ज्ञानेश्वर नामक एक गरीब किसान रहता था। वह अभी कुछ जवान था इसलिए उसमें कुछ कर गुजरने का माद्दा था। उसने धनवान होने का सपना अपने जेहन में पाल रखा था। धनवान होने के लिए उस...

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अजीब दास्तां है ये.. - 6 By Ashish Kumar Trivedi

(6) मुकुल अपने और रेवती के रिश्ते को लेकर दुविधा में पड़ गया था। समझ नहीं पा रहा था कि क्या करे। वह रेवती को प्यार करने लगा था। पर रेवती उसके बारे में क्या सोचती है वह नहीं जानता थ...

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बेनज़ीर - दरिया किनारे का ख्वाब - 33 - अंतिम भाग By Pradeep Shrivastava

भाग - ३३ मेरेअब कई-कई घंटे, कई-कई दिन, ऐसे ही दीवार के उस पार ज़ाहिदा के परिवार को सोचते-सोचते गुजरते जा रहे थे। मुन्ना भी अक्सर ऐसी रातों के इस गहन सन्नाटे में मेरे साथ होते। एक दि...

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मेरा पति तेरा पति - 3 By Jitendra Shivhare

3 सबकुछ सामान्य भी हो जायेगा। किन्तू दिपिका के साथ हुये अन्याय का हिसाब हम सभी को कभी न कभी तो देना ही होगा। उसकी तड़प और आंखों से बहते आसुं कहीं किसी रूप में हम सभी से इस अन्याय क...

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यादों के झरोखों से-निश्छल प्रेम (6) By Asha Saraswat

मातृभारती के सभी सदस्यों और पाठकों को मेरा नमस्कार ? यादों के झरोखों से —निश्छल प्रेम (1),(2),(3),(4),(5)आपने पढ़ी कैसी लगी रेटिंग करके अवश्य बताइएगा।जिन्होंने पढ़...

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कोड़ियाँ - कंचे - 6 By Manju Mahima

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अनमोल सौगात - 2 By Ratna Raidani

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भारत के गावों में स्वतंत्रा संग्राम - 2 By Brijmohan sharma

2 १८५७ का गदरदेश की आम जनता के साथ हिंदुस्तान के रजवाडो व अंग्रेजी सेना के भारतीय सैनिको में अंग्रेजी शासन के विरुद्ध विद्रोह पनप रहा था। अंग्रेज चाहे जिस राजा का राज्य बिना कारण ब...

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निधि सुबह उठकर बाहर बरामदे में बैठकर अखबार पढ़ती है। बरसों से यहा नियम है, सुबह की चाय के साथ दोनों पति-पत्नी समाचारों का आनन्द लेते हैं। गर्मी में, उनके बगीचे से आने वाली शीतल, सु...

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एक किस्सा ऐसा भी By Smita

छींटदार नीले रंग का पर्दा अपनी जगह पर व्यवस्थित हो चुका था. भगतजी(देवधर ) अपनी खटिया पर लेट चुके थे। अपने बेटे की पदचाप उन्हें साफ सुनाई दे रही थी। बेटा बिल्कुल बरामदे तक आ चुका था...

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बालिश्तिया By Deepak sharma

बालिश्तिया सद्गुण प्रसाद का जाना तय हो चुका था| उसे रोडज़ छात्रवृत्ति मिल गयी थी| ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी की ओर से उसकी टिकट भी खरीदी जा चुकी थी| पासपोर्ट वीज़ा सब तैयार था| दो दिन बाद...

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ताज़िया By आदित्य अभिनव

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सुंदरा और नारली पूर्णिमा By Ramesh Yadav

सिंधुदुर्ग जिले में समुद्र किनारे बसे एक छोटे से गांव ओटव में मल्हारी और मैनावती नामक युवक और युवती रहते थे। वे दोनों कोली समाज से थे। कोली अर्थात मछुआरे। मत्स्य व्यवसाय उनका खानदा...

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राम राज By राज कुमार कांदु

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एक दूजे के लिए (अंतिम भाग) By Kishanlal Sharma

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अपने-अपने कारागृह - 28 - अंतिम भाग By Sudha Adesh

अपने-अपने कारागृह-28 अगले हफ्ते हमें बेंगलुरु जाना था । जाने का पहला कारण प्रिया का बार-बार उलाहना देना था कि आप मुझसे अधिक भैया को चाहते हो तभी उनके पास लंदन चले गए पर बेंगलुरु...

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सिद्धपुरुष By Deepak sharma

सिद्धपुरुष ‘आपसे एक हस्ताक्षर लेना है, मामा,’ अपने नाश्ते के बाद अपनी पहिएदार कुर्सी पर बैठा मैं अपना आई-फोन खोलने ही लगा हूँ कि युगल मेरे कमरे में आन धमका है| युगल मान...

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एक पल By Upasna Siag

सुधा जब से किट्टी पार्टी से लौटी है तभी से चुप है। जैसे कुछ सोच रही है। हाँ, सोच तो रही है वह। आज जो बातें किट्टी में हुई। वे बातें उसे थोडा आंदोलित कर रही है। कभी -कभी वह खुद अपने...

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शामियाना By Chaya Agarwal

कहानी- शामियाना"रिश्तों की समझ नही है तुम्हें या रिश्तों की माँग से अनभिज्ञ हो तुम, उठा लेते हो बीच में अपनेपन की खुशबूदार अनुभूति जो पहले ही पीछे छूट चुकी है या पाट दी गयी है अपने...

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गरीब किसान और जिन्न By Ramesh Yadav

एक गांव में ज्ञानेश्वर नामक एक गरीब किसान रहता था। वह अभी कुछ जवान था इसलिए उसमें कुछ कर गुजरने का माद्दा था। उसने धनवान होने का सपना अपने जेहन में पाल रखा था। धनवान होने के लिए उस...

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