hindi Best Moral Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Moral Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


Languages
Categories
Featured Books
  • उर्वशी - 8

    उर्वशी ज्योत्स्ना ‘ कपिल ‘ 8 " क्या हुआ ?" शौर्य ने उसकी ओर देखा। " कुछ भी नहीं...

  • आधा आदमी - 20

    आधा आदमी अध्‍याय-20 मैंने बड़ी चतुराई से उसे जवाब दिया, ”ऐसा कुछ नहीं हैं.” ‘‘सुन...

  • अनूठा प्रयोग

    अनूठा प्रयोग मौका था, स्कूली दिनों के अपने एक दोस्त के यहांॅ गृह-प्रवेश आयोजन मे...

गवाक्ष - 5 By Pranava Bharti

गवाक्ष 5== सत्यव्रत ने आँखें मूंदकर एक लंबी साँस ली। वे समझ नहीं पा रहे थे इस अन्य लोक के प्राणी से वे क्या और कैसे अपने बारे में बात करें? " हर वह धातु सोना नहीं होती जो च...

Read Free

उर्वशी - 8 By Jyotsana Kapil

उर्वशी ज्योत्स्ना ‘ कपिल ‘ 8 " क्या हुआ ?" शौर्य ने उसकी ओर देखा। " कुछ भी नहीं " " आप मुस्कुरा क्यों रही हैं ?" " क्या अब मुस्कुराने के लिए भी आपसे इजाज़त माँगनी होगी ?" " बिल्कुल...

Read Free

बडी प्रतिमा - 10 - अंतिम भाग By Sudha Trivedi

बडी प्रतिमा (10.) अगली शाम विभा पिछवाडे की नल पर बैठी कपडे धो रही थी। उसी समय गीतू बागीचों की ओर जाती दिखी। फजली सर या किसी ने भी किसी को यह नहीं बताया था कि असली चोर पकडा गया है।...

Read Free

आधा आदमी - 20 By Rajesh Malik

आधा आदमी अध्‍याय-20 मैंने बड़ी चतुराई से उसे जवाब दिया, ”ऐसा कुछ नहीं हैं.” ‘‘सुना हैं तुम्हारी शादी हो गई हैं.‘‘ ‘‘शादी भी हो गई हैं और एक बच्ची भी हैं.‘‘ ‘‘ठीक हैं मैं शाम को मिलन...

Read Free

महामाया - 26 By Sunil Chaturvedi

महामाया सुनील चतुर्वेदी अध्याय – छब्बीस शाम को बाबाजी का संदेश मिला तो वो बाबाजी के कमरे की ओर चल दिया। बाबाजी भगवा रंग का गाउन पहने कमरे में एक ओर लगे रेकलाइनर पर बैठे थे। उनके पै...

Read Free

होने से न होने तक - 41 By Sumati Saxena Lal

होने से न होने तक 41. सुबह देर से ही ऑख खुली थी। मानसी जी शायद रसोई घर में हैं। सूजी भुनने की सोंधी सी महक चारों तरफ फैली हुयी है। शायद मानसी जी हलुआ बना रही हैं। अचानक शिद्दत से य...

Read Free

भुइंधर का मोबाइल - 3 By Pradeep Shrivastava

भुइंधर का मोबाइल - प्रदीप श्रीवास्तव भाग 3 जानती हैं अम्मा आपका पूत बड़ा जबरा है। इतना जबरा कि मारे भी और रोने भी न दे। मगर मेरी भी एक ही धुन थी कि इन्हें रास्ते पर लाना है, तो मैं...

Read Free

आँखों देखा हाल - क्रिकेट By Siniwali Sharma

आँखों देखा हाल क्रिकेट आइये चलते हैं ३२- ३३ साल पहले जब भारत के गांवों में क्रिकेट अपनी पैठ बना रहा था। ठीक उसी समय कपिल देव की अगुआई में भारत ने क्रिकेट का विश्व कप जीता था। इस जी...

Read Free

अपनों के बीच By Asha Pandey Author

अपनों के बीच गर्मी में झुलसता मई का महीना। जीवन-मरण के बीच झूलती अम्मा । सबको खबर कर दी गई थी कि अम्मा अब नहीं बचेंगी। ये शायद उनकी अन्तिम बीमारी होगी। बेटे एवं बहू सभी अलग-अलग शहर...

Read Free

राम रचि राखा - 1 - 4 By Pratap Narayan Singh

राम रचि राखा अपराजिता (4) दिन बहुत तेजी से निकल रहे थे। दो सप्ताह कब बीत गये पता भी नहीं चला। इस बीच अनुराग से फोन पर और इ-मेल से बातचीत की आवृत्ति बढ़ गई थी। जिस भी रुप में वे मेरी...

Read Free

समंदर और सफेद गुलाब - 2 - 2 By Ajay Sharma

समंदर और सफेद गुलाब 2 पता नहीं क्यों मुम्बई मेरे दिलो-दिमाग से निकलती ही नहीं थी। मुम्बई नगरी का कीड़ा मेरे दिमाग में घुसा हुआ था। हालांकि मैं रेडियो स्टेशन और टी.वी. पर कार्यक्रम...

Read Free

केसरिया बालम - 8 By Hansa Deep

केसरिया बालम डॉ. हंसा दीप 8 गर्माहट पर पानी के छींटे बेकरी में धानी का काम जम जाने व उसे अच्छी तनख्वाह मिलने से बाली अब निश्चिंत हो गया था कि एक ओर से इतना पैसा आ रहा है तो वह खतरो...

Read Free

आधी दुनिया का पूरा सच - 15 By Dr kavita Tyagi

आधी दुनिया का पूरा सच (उपन्यास) 15. कुछ समय बाद पुजारी जी कोठरी में वापिस आये और रानी से कहा - "बिटिया, मुझे पूछना तो नहीं चाहिए, पर पूछे बिना मन नहीं मानता ! तू अकेली इतने सवेरे य...

Read Free

अनूठा प्रयोग By Ram Nagina Maurya

अनूठा प्रयोग मौका था, स्कूली दिनों के अपने एक दोस्त के यहांॅ गृह-प्रवेश आयोजन में सम्मिलित होने का। बाकी आमंत्रित मेहमानों के साथ मैं भी नवनिर्मित मकान के उस हाॅलनुमा बड़े से ड्राइं...

Read Free

जननम - 7 By S Bhagyam Sharma

जननम अध्याय 7 सब लोगों से अपने को छुड़वा कर कार से घर की ओर रवाना हुआ। हिंदी में अच्छी तरह बात करना जानती है, वह उत्तर भारत के इलाके में पली-बड़ी होगी। यहां कहां आकर फंस गई ? उसके...

Read Free

मंथरा By Deepak sharma

मंथरा इस बार हम पति-पत्नी मेरी स्टेप-मॉम की मृत्यु की सूचना पर इधर पापा के कस्बापुर आये हैं। “मंथरा अभी भी जमी हुई है,” हमारे गेट खोलने की आवाज़ पर बाहर के बरामदे में मालती के प्रकट...

Read Free

अहंकार By ललिता अय्यर

पंकजजी सुबह की सैर से लौटकर घर के आंगन की लान में रखी हुई कुर्सी में जैसे ही बैठे उनकी धर्मपत्नी सुधा ने उनके हाथ में अखबार पकडाया और वहीं दूसरी कुर्सी में बैठ गई। वह भी एक दूसरा अ...

Read Free

चिडि़या की उड़ान By Sonali Misra

अभी अभी विधान सभा के चुनाव हुए थे। रिकोर्डतोड़ मतों से जीते थी अम्बर जी! जीत का स्वाद कितना सुन्दर होता है! वह जब सारे अवरोध तोड़कर झोली में गिरती है तो मानो दुनिया भर के चाँद सितारे...

Read Free

शहादत By Abhinav Singh

शाम के 6 बज रहे हैं। श्यामलाल धीरे धीरे कदमों से घर को लौट रहे थे, घर के मोड़ पर पहुँचे तो सामने अपने द्वार पर बैठे ननकू ने टोका,’ का श्यामलाल कछु बात बनी कि नाहीं’। अपने कदमों पर...

Read Free

फिर मिलेंगे... कहानी - एक महामारी से लॉक डाउन तक - 13 By Sarvesh Saxena

कुछ दिनों बाद… अर्पित - “यार मैं ठीक तो हो जाऊंगा ना” |मोहित - “अरे क्या बात कर रहा है, अब हम दोनों ही ठीक हो गए हैं, एक-दो दिन में हमारी रिपोर्ट आ जाएगी और मुझे पता है नेगेटिव ही...

Read Free

शहर का उदास स्केच By प्रतिभा चौहान

शहर का उदास स्कैच ओस की बूंदें पत्तों-टहनियों से रूख़सती लेतीं … टिपटिपाती हुई ज़मींदोज़ ... सुबह की धुंध के बीच आलीशान किंतु बुज़ुर्गियत झेल रहा अंग्रेजी जमाने का पांच कमरे का र...

Read Free

वह सुबह कुछ और थी By Hansa Deep

कहानी वह सुबह कुछ और थी हंसा दीप “नमस्ते जी, आज तो जल्दी निकल पड़े हो।” खन्ना साहब की आवाज सुनकर चौंका नील। आज से पहले कभी काम पर जाते हुए उनसे मुलाकात नहीं हुई थी। शाम को टहलते...

Read Free

इनाम By Pranava Bharti

इनाम ------ बहते हुए पानी में जैसे कोई छोटा बच्चा कागज़ की नाव चला दे, कुछ ऐसे ही उसने अपने जीवन की नाव को जीवन के समुद्र में बहने के लिए छोड़ दिया ।आख़िर कब तक लड़ सकता है...

Read Free

आत्मदीपो भव By Poonam Singh

आत्मदीपो भव: ( कहानी ) -------------------- ' इतनी सुबह फोन की घंटी..? भला किसकी हो सकती है ? नंबर भी कुछ अजीब सा दिख रहा है। फिर भी सोचा उठा कर देखती हूँ क्या पता किसी रिश्ते...

Read Free

बेआवाज़ तमाचा By Vandana Bajpai

बेआवाज़ तमाचा “उफ़ दीदी कितना पढ़ोगी ?” छोटे भाई के सवाल पर एकता ने मुस्कुरा कर कहा, “बिट्टू किताबें तो मेरी जान हैं | तू भी अपना समय बर्बाद ना कर | जा गणित की किताब ले आ, तुझे भी पढ़ा...

Read Free

प्रतिकर्षण By Kailash Banwasi

प्रतिकर्षण कैलाश बनवासी बस से उतरकर उसने घड़ी देखी-ग्यारह दस. यह गाँव उसका नहीं है. वह तो यहाँ से दस मील दूर दक्षिण-पूर्व में है.यह तो उसके गाँव के लिए बस स्टैंड है.उसका गाँव भी अजी...

Read Free

समय की यात्रा By Swati Solanki Shahiba

यह कहानी है उस मंजीरी की जिसने समय पटल पर बहुत कुछ बातें बहुत कुछ खो दिया। तो आइए मिलते हैं इस मंजीरी से । हेलो मंजीरी !मैं सरल बोल रहा हूं ,सेवा संस्थान की तरफ से। आज साउथ से एक ब...

Read Free

शेष भाग आगामी अंक में By Ram Nagina Maurya

‘शेष भाग आगामी अंक में’, उन गौरैय्यों के इधर-उधर फुदकते दाना चुगते, चहचहाने, की वजह से हाथ में ली हुई डाॅयरी में कुछ नोट करते, नवाजुद्दीन साहब का ध्यान अचानक भंग हुआ था। हर रोज की...

Read Free

दूसरा फैसला By Vandana Bajpai

दूसरा फैसला मीरा ने नंबर देखा, माँ का फोन था, एक बार होठों पर मुस्कराहट तैर गयी, ये नंबर उसके लिए कितना कितना खास रहा है, उसके जीवन का संबल रहा है. तभी एक झटका सा महसूस हुआ, कुछ तल...

Read Free

गोमती एक नदी का नाम है By Kailash Banwasi

गोमती एक नदी का नाम है कैलाश बनवासी मौका पाते ही मैंने बिसाहिन बाई से पूछ लिया, “ कइसे, ये गोमती चलही नहीं?” बिसाहिन बाई खोली में पानी पी रही थी, गिलास के ऊपर दीखती उसकी आँखें मुझे...

Read Free

गवाक्ष - 5 By Pranava Bharti

गवाक्ष 5== सत्यव्रत ने आँखें मूंदकर एक लंबी साँस ली। वे समझ नहीं पा रहे थे इस अन्य लोक के प्राणी से वे क्या और कैसे अपने बारे में बात करें? " हर वह धातु सोना नहीं होती जो च...

Read Free

उर्वशी - 8 By Jyotsana Kapil

उर्वशी ज्योत्स्ना ‘ कपिल ‘ 8 " क्या हुआ ?" शौर्य ने उसकी ओर देखा। " कुछ भी नहीं " " आप मुस्कुरा क्यों रही हैं ?" " क्या अब मुस्कुराने के लिए भी आपसे इजाज़त माँगनी होगी ?" " बिल्कुल...

Read Free

बडी प्रतिमा - 10 - अंतिम भाग By Sudha Trivedi

बडी प्रतिमा (10.) अगली शाम विभा पिछवाडे की नल पर बैठी कपडे धो रही थी। उसी समय गीतू बागीचों की ओर जाती दिखी। फजली सर या किसी ने भी किसी को यह नहीं बताया था कि असली चोर पकडा गया है।...

Read Free

आधा आदमी - 20 By Rajesh Malik

आधा आदमी अध्‍याय-20 मैंने बड़ी चतुराई से उसे जवाब दिया, ”ऐसा कुछ नहीं हैं.” ‘‘सुना हैं तुम्हारी शादी हो गई हैं.‘‘ ‘‘शादी भी हो गई हैं और एक बच्ची भी हैं.‘‘ ‘‘ठीक हैं मैं शाम को मिलन...

Read Free

महामाया - 26 By Sunil Chaturvedi

महामाया सुनील चतुर्वेदी अध्याय – छब्बीस शाम को बाबाजी का संदेश मिला तो वो बाबाजी के कमरे की ओर चल दिया। बाबाजी भगवा रंग का गाउन पहने कमरे में एक ओर लगे रेकलाइनर पर बैठे थे। उनके पै...

Read Free

होने से न होने तक - 41 By Sumati Saxena Lal

होने से न होने तक 41. सुबह देर से ही ऑख खुली थी। मानसी जी शायद रसोई घर में हैं। सूजी भुनने की सोंधी सी महक चारों तरफ फैली हुयी है। शायद मानसी जी हलुआ बना रही हैं। अचानक शिद्दत से य...

Read Free

भुइंधर का मोबाइल - 3 By Pradeep Shrivastava

भुइंधर का मोबाइल - प्रदीप श्रीवास्तव भाग 3 जानती हैं अम्मा आपका पूत बड़ा जबरा है। इतना जबरा कि मारे भी और रोने भी न दे। मगर मेरी भी एक ही धुन थी कि इन्हें रास्ते पर लाना है, तो मैं...

Read Free

आँखों देखा हाल - क्रिकेट By Siniwali Sharma

आँखों देखा हाल क्रिकेट आइये चलते हैं ३२- ३३ साल पहले जब भारत के गांवों में क्रिकेट अपनी पैठ बना रहा था। ठीक उसी समय कपिल देव की अगुआई में भारत ने क्रिकेट का विश्व कप जीता था। इस जी...

Read Free

अपनों के बीच By Asha Pandey Author

अपनों के बीच गर्मी में झुलसता मई का महीना। जीवन-मरण के बीच झूलती अम्मा । सबको खबर कर दी गई थी कि अम्मा अब नहीं बचेंगी। ये शायद उनकी अन्तिम बीमारी होगी। बेटे एवं बहू सभी अलग-अलग शहर...

Read Free

राम रचि राखा - 1 - 4 By Pratap Narayan Singh

राम रचि राखा अपराजिता (4) दिन बहुत तेजी से निकल रहे थे। दो सप्ताह कब बीत गये पता भी नहीं चला। इस बीच अनुराग से फोन पर और इ-मेल से बातचीत की आवृत्ति बढ़ गई थी। जिस भी रुप में वे मेरी...

Read Free

समंदर और सफेद गुलाब - 2 - 2 By Ajay Sharma

समंदर और सफेद गुलाब 2 पता नहीं क्यों मुम्बई मेरे दिलो-दिमाग से निकलती ही नहीं थी। मुम्बई नगरी का कीड़ा मेरे दिमाग में घुसा हुआ था। हालांकि मैं रेडियो स्टेशन और टी.वी. पर कार्यक्रम...

Read Free

केसरिया बालम - 8 By Hansa Deep

केसरिया बालम डॉ. हंसा दीप 8 गर्माहट पर पानी के छींटे बेकरी में धानी का काम जम जाने व उसे अच्छी तनख्वाह मिलने से बाली अब निश्चिंत हो गया था कि एक ओर से इतना पैसा आ रहा है तो वह खतरो...

Read Free

आधी दुनिया का पूरा सच - 15 By Dr kavita Tyagi

आधी दुनिया का पूरा सच (उपन्यास) 15. कुछ समय बाद पुजारी जी कोठरी में वापिस आये और रानी से कहा - "बिटिया, मुझे पूछना तो नहीं चाहिए, पर पूछे बिना मन नहीं मानता ! तू अकेली इतने सवेरे य...

Read Free

अनूठा प्रयोग By Ram Nagina Maurya

अनूठा प्रयोग मौका था, स्कूली दिनों के अपने एक दोस्त के यहांॅ गृह-प्रवेश आयोजन में सम्मिलित होने का। बाकी आमंत्रित मेहमानों के साथ मैं भी नवनिर्मित मकान के उस हाॅलनुमा बड़े से ड्राइं...

Read Free

जननम - 7 By S Bhagyam Sharma

जननम अध्याय 7 सब लोगों से अपने को छुड़वा कर कार से घर की ओर रवाना हुआ। हिंदी में अच्छी तरह बात करना जानती है, वह उत्तर भारत के इलाके में पली-बड़ी होगी। यहां कहां आकर फंस गई ? उसके...

Read Free

मंथरा By Deepak sharma

मंथरा इस बार हम पति-पत्नी मेरी स्टेप-मॉम की मृत्यु की सूचना पर इधर पापा के कस्बापुर आये हैं। “मंथरा अभी भी जमी हुई है,” हमारे गेट खोलने की आवाज़ पर बाहर के बरामदे में मालती के प्रकट...

Read Free

अहंकार By ललिता अय्यर

पंकजजी सुबह की सैर से लौटकर घर के आंगन की लान में रखी हुई कुर्सी में जैसे ही बैठे उनकी धर्मपत्नी सुधा ने उनके हाथ में अखबार पकडाया और वहीं दूसरी कुर्सी में बैठ गई। वह भी एक दूसरा अ...

Read Free

चिडि़या की उड़ान By Sonali Misra

अभी अभी विधान सभा के चुनाव हुए थे। रिकोर्डतोड़ मतों से जीते थी अम्बर जी! जीत का स्वाद कितना सुन्दर होता है! वह जब सारे अवरोध तोड़कर झोली में गिरती है तो मानो दुनिया भर के चाँद सितारे...

Read Free

शहादत By Abhinav Singh

शाम के 6 बज रहे हैं। श्यामलाल धीरे धीरे कदमों से घर को लौट रहे थे, घर के मोड़ पर पहुँचे तो सामने अपने द्वार पर बैठे ननकू ने टोका,’ का श्यामलाल कछु बात बनी कि नाहीं’। अपने कदमों पर...

Read Free

फिर मिलेंगे... कहानी - एक महामारी से लॉक डाउन तक - 13 By Sarvesh Saxena

कुछ दिनों बाद… अर्पित - “यार मैं ठीक तो हो जाऊंगा ना” |मोहित - “अरे क्या बात कर रहा है, अब हम दोनों ही ठीक हो गए हैं, एक-दो दिन में हमारी रिपोर्ट आ जाएगी और मुझे पता है नेगेटिव ही...

Read Free

शहर का उदास स्केच By प्रतिभा चौहान

शहर का उदास स्कैच ओस की बूंदें पत्तों-टहनियों से रूख़सती लेतीं … टिपटिपाती हुई ज़मींदोज़ ... सुबह की धुंध के बीच आलीशान किंतु बुज़ुर्गियत झेल रहा अंग्रेजी जमाने का पांच कमरे का र...

Read Free

वह सुबह कुछ और थी By Hansa Deep

कहानी वह सुबह कुछ और थी हंसा दीप “नमस्ते जी, आज तो जल्दी निकल पड़े हो।” खन्ना साहब की आवाज सुनकर चौंका नील। आज से पहले कभी काम पर जाते हुए उनसे मुलाकात नहीं हुई थी। शाम को टहलते...

Read Free

इनाम By Pranava Bharti

इनाम ------ बहते हुए पानी में जैसे कोई छोटा बच्चा कागज़ की नाव चला दे, कुछ ऐसे ही उसने अपने जीवन की नाव को जीवन के समुद्र में बहने के लिए छोड़ दिया ।आख़िर कब तक लड़ सकता है...

Read Free

आत्मदीपो भव By Poonam Singh

आत्मदीपो भव: ( कहानी ) -------------------- ' इतनी सुबह फोन की घंटी..? भला किसकी हो सकती है ? नंबर भी कुछ अजीब सा दिख रहा है। फिर भी सोचा उठा कर देखती हूँ क्या पता किसी रिश्ते...

Read Free

बेआवाज़ तमाचा By Vandana Bajpai

बेआवाज़ तमाचा “उफ़ दीदी कितना पढ़ोगी ?” छोटे भाई के सवाल पर एकता ने मुस्कुरा कर कहा, “बिट्टू किताबें तो मेरी जान हैं | तू भी अपना समय बर्बाद ना कर | जा गणित की किताब ले आ, तुझे भी पढ़ा...

Read Free

प्रतिकर्षण By Kailash Banwasi

प्रतिकर्षण कैलाश बनवासी बस से उतरकर उसने घड़ी देखी-ग्यारह दस. यह गाँव उसका नहीं है. वह तो यहाँ से दस मील दूर दक्षिण-पूर्व में है.यह तो उसके गाँव के लिए बस स्टैंड है.उसका गाँव भी अजी...

Read Free

समय की यात्रा By Swati Solanki Shahiba

यह कहानी है उस मंजीरी की जिसने समय पटल पर बहुत कुछ बातें बहुत कुछ खो दिया। तो आइए मिलते हैं इस मंजीरी से । हेलो मंजीरी !मैं सरल बोल रहा हूं ,सेवा संस्थान की तरफ से। आज साउथ से एक ब...

Read Free

शेष भाग आगामी अंक में By Ram Nagina Maurya

‘शेष भाग आगामी अंक में’, उन गौरैय्यों के इधर-उधर फुदकते दाना चुगते, चहचहाने, की वजह से हाथ में ली हुई डाॅयरी में कुछ नोट करते, नवाजुद्दीन साहब का ध्यान अचानक भंग हुआ था। हर रोज की...

Read Free

दूसरा फैसला By Vandana Bajpai

दूसरा फैसला मीरा ने नंबर देखा, माँ का फोन था, एक बार होठों पर मुस्कराहट तैर गयी, ये नंबर उसके लिए कितना कितना खास रहा है, उसके जीवन का संबल रहा है. तभी एक झटका सा महसूस हुआ, कुछ तल...

Read Free

गोमती एक नदी का नाम है By Kailash Banwasi

गोमती एक नदी का नाम है कैलाश बनवासी मौका पाते ही मैंने बिसाहिन बाई से पूछ लिया, “ कइसे, ये गोमती चलही नहीं?” बिसाहिन बाई खोली में पानी पी रही थी, गिलास के ऊपर दीखती उसकी आँखें मुझे...

Read Free